
अंतरिक्ष और भू-स्थानिक क्षेत्रों के लिए कौशल विकास
प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 3:55PM by PIB Delhi
भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) आंध्र प्रदेश राज्य सहित पूरे देश में समाज के सभी वर्गों को विभिन्न योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।
सरकार कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की प्रमुख योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) और राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) के माध्यम से अंतरिक्ष और भू-स्थानिक उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कौशल विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। ये योजनाएँ जीआईएस, स्थानिक डेटा प्रबंधन, ड्रोन प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर विकास, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में पूर्व अधिगम मान्यता (आरपीएल) और संरचित ऑन-द-जॉब शिक्षुता प्रशिक्षण के माध्यम से अल्पकालिक कौशलीकरण, कौशलोन्नयन और पुन: कौशलीकरण, प्रदान करती हैं। इसके अलावा, गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) और अकादमिक संस्थानों की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए, अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत इन-स्पेस ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में 11 अल्पकालिक कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनके तहत देश भर में 1,000 से अधिक उम्मीदवारों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान अंतरिक्ष और भू-स्थानिक संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत प्रशिक्षित उम्मीदवारों और प्रशिक्षुओं का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार ब्यौरा, साथ ही पीएमकेवीवाई और एनएपीएस के अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्रों/संस्थानों की संख्या, क्रमशः अनुबंध– I और II में दी गई है। देश भर में विभिन्न अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों का ब्यौरा भी अनुबंध– III में दिया गया है।
(घ) से (छ): सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में स्थापित जिला कौशल समितियों (डीएससी) को जिला कौशल विकास योजना (डीएसडीपी) तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार के अवसरों, कौशलीकरण की मांग और उपलब्ध प्रशिक्षण अवसंरचना की पहचान करके विकेंद्रीकृत, जमीनी स्तर पर कौशल नियोजन का समर्थन करना है। इसके बाद, विभिन्न क्षेत्रों में इन कौशल अंतरों को कम करने के लिए सरकारी कौशल कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। उद्योग विशेषज्ञों के नेतृत्व में क्षेत्र कौशल परिषदें (एसएससी) नियमित रूप से कौशल अंतर अध्ययन करती हैं ताकि क्षेत्रवार कौशल आवश्यकताओं का आकलन किया जा सके और योग्यता मानक निर्धारित किए जा सकें। ये मानक सरकार को कार्यबल को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) द्वारा संकल्प (आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अर्जन और ज्ञान जागरूकता) समर्थित राष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन सात उच्च-विकास क्षेत्रों में कौशल अंतर का आकलन करने के लिए एक मानकीकृत, डेटा-आधारित ढांचा प्रदान करता है। यह एमएसडीई के कौशल विकास पहलों को उद्योग की मांग और भविष्य के कार्यबल की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में मदद करता है। इसके अलावा, इनस्पेस ने उद्योग के साथ परामर्श करके अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, प्रक्षेपण यान, रॉकेट, उपग्रह आदि जैसे क्षेत्रों में कौशलीकरण आवश्यकताओं का आकलन किया है और पहचानी गई जरूरतों के आधार पर, प्रासंगिक पाठ्यक्रम पाठ्यचर्या विकसित करने का कार्य शुरू किया है।
कौशलीकरण और रोजगार के बीच संबंध को सुदृढ़ करने और पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार जून 2022 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेलों (पीएमएनएएम) का आयोजन कर रही है, साथ ही जागरूकता पैदा करने, नियोक्ताओं से संपर्क साधने और उम्मीदवारों को जुटाने जैसी गतिविधियां भी चला रही है। नियोक्ताओं, उद्योग निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और क्षेत्रीय कौशल परिषदों के सहयोग से, राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) उद्योग से संबंधित कौशल हासिल करने में मदद करती है और ग्रामीण क्षेत्रों सहित युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को बढ़ाती है। इसके अलावा, इन-स्पेस में अल्पकालिक कौशल विकास के लिए संकाय सदस्य इसरो, इन-स्पेस, पूर्व इसरो अधिकारियों , निजी अंतरिक्ष संस्थाओं/स्टार्ट-अप/शैक्षणिक संस्थाओं से होते हैं, जो पाठ्यक्रम के दौरान व्याख्यान और व्यावहारिक पहलुओं को कवर करते हैं।
अंतरिक्ष और भू-स्थानिक जैसे उभरते क्षेत्रों में औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को अनुरूप बनाने और कुशल मानव संसाधन की रोजगार क्षमता और उद्यमिता के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए निजी संस्थाओं/शैक्षणिक संस्थाओं के साथ साझेदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए, एमएसडीई द्वारा आंध्र प्रदेश सहित पूरे देश में निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करती है।
- एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ मानचित्रित (मैप) करें और उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।
- एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 10,209 योग्यताओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 2,975 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं, और 7,234 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
- संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणियों के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदें (एसएससी) स्थापित की गई हैं, जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।
- एमएसडीई के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईटीआई के छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।
- पीएमकेवीवाई के तहत, नई पीढ़ी/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं विशेषकर एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए के अनुरूप तैयार किया गया है।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- viii. राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- अहमदाबाद और मुंबई में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत स्थापित भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण से लैस उद्योग के लिए उद्योग-तैयार कार्यबल का एक समूह बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
- कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन प्रमाणित उम्मीदवारों को रोजगार और शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए किया जाता है।
- इनस्पेस ने इनस्पेस कैनसैट इंडिया स्टूडेंट प्रतियोगिता के दो संस्करण और इनस्पेस मॉडल रॉकेट्री स्टूडेंट इंडिया प्रतियोगिता का एक संस्करण आयोजित किया है, जिसके परिणामस्वरूप कॉलेज के छात्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि पैदा हुई और रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित हुए।
- इनस्पेस कॉलेज के छात्रों को अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए प्रासंगिक कौशल से सशक्त बनाने के लिए इंटर्नशिप और गहन प्रशिक्षण के अवसर भी प्रदान कर रहा है।
अनुबंध-I
दिनांक 27.07.2026 को उत्तरार्थ लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1227 के भाग (क) से (ग) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध।
एमएसडीई की पीएमकेवीवाई और एनएपीएस योजनाओं के तहत पिछले तीन वर्षों के दौरान अंतरिक्ष और भू-स्थानिक संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षित उम्मीदवारों और कार्यरत प्रशिक्षुओं का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र–वार ब्यौरा निम्नलिखित है:
क्रं. सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम | वित्तीय वर्ष 2023-24 | वित्तीय वर्ष 2024-25 | वित्तीय वर्ष 2025-26 | |||
पीएमकेवीवाई | एनएपीएस | पीएमकेवीवाई | एनएपीएस | पीएमकेवीवाई | एनएपीएस | ||
प्रशिक्षित/ अभिविन्यस्त | नियुक्त प्रशिक्षु | प्रशिक्षित/ अभिविन्यस्त | नियुक्त प्रशिक्षु | प्रशिक्षित/ अभिविन्यस्त | नियुक्त प्रशिक्षु को | ||
1 | अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | – | 12 | 38 | – | 34 | |
2 | आंध्र प्रदेश | 2,414 | 5,163 | 4,239 | 5,336 | 247 | 5,074 |
3 | अरुणाचल प्रदेश | 120 | 11 | – | 12 | – | 30 |
4 | असम | 31 | 2,782 | 481 | 1,344 | 74 | 2,320 |
5 | बिहार | 169 | 939 | 3,380 | 1,000 | 50 | 2,496 |
6 | चंडीगढ़ | – | 689 | – | 982 | – | 1,005 |
7 | छत्तीसगढ | 30 | 2,161 | 90 | 1,864 | – | 2,109 |
8 | दिल्ली | 13 | 2,521 | 160 | 3,551 | – | 4,288 |
9 | गोवा | – | 3,695 | – | 4,554 | – | 4,435 |
10 | गुजरात | 245 | 23,189 | 4,445 | 22,211 | 51 | 26,542 |
11 | हरियाणा | 57 | 18,058 | 2,086 | 19,047 | 224 | 24,799 |
12 | हिमाचल प्रदेश | 71 | 1,803 | 190 | 1,645 | 156 | 2,122 |
13 | जम्मू और कश्मीर | 79 | 166 | 3,815 | 118 | 617 | 230 |
14 | झारखंड | 228 | 2,825 | 319 | 2,415 | 81 | 3,098 |
15 | कर्नाटक | 80 | 25,112 | 14,813 | 34,033 | 2,734 | 37,254 |
16 | केरल | 60 | 4,481 | 451 | 6,080 | 130 | 5,292 |
17 | लद्दाख | – | 23 | – | 8 | – | 6 |
18 | लक्षद्वीप | – | 4 | – | 7 | – | 11 |
19 | मध्य प्रदेश | 257 | 7,882 | 4,805 | 7,290 | 1,128 | 8,768 |
20 | महाराष्ट्र | 542 | 81,371 | 2,768 | 87,060 | 236 | 91,640 |
21 | मणिपुर | – | 1 | – | 4 | 60 | 22 |
22 | मेघालय | – | 59 | 139 | 89 | – | 52 |
23 | मिजोरम | 28 | 3 | 177 | 0 | – | 0 |
24 | नागालैंड | 29 | 0 | 111 | 2 | – | 6 |
25 | ओडिशा | 273 | 3,995 | 1,389 | 2,870 | 23 | 3,141 |
26 | पुदुचेरी | – | 924 | – | 994 | 124 | 1,510 |
27 | पंजाब | 79 | 4,001 | 2,177 | 4,050 | 293 | 6,132 |
28 | राजस्थान | 546 | 4,486 | 5,146 | 5,434 | 348 | 6,924 |
29 | सिक्किम | – | 52 | – | 97 | – | 121 |
30 | तमिलनाडु | 1,267 | 22,352 | 6,579 | 22,549 | 655 | 27,404 |
31 | तेलंगाना | 70 | 15,509 | 2,543 | 13,494 | 975 | 13,912 |
32 | दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | – | 852 | 237 | 1,494 | – | 1,155 |
33 | त्रिपुरा | – | 70 | 19 | 57 | 209 | 70 |
34 | उत्तर प्रदेश | 583 | 39,276 | 10,305 | 40,666 | 924 | 46,327 |
35 | उत्तराखंड | – | 7,618 | 1,337 | 7,331 | 45 | 8,831 |
36 | पश्चिम बंगाल | 61 | 7,638 | 208 | 7,981 | 276 | 12,072 |
अनुबंध– II
दिनांक 27.07.2026 को उत्तरार्थ लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1227 के भाग (क) से (ग) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध।
एमएसडीई की पीएमकेवीवाई और एनएपीएस योजनाओं के अंतर्गत राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार प्रशिक्षण केंद्रों/प्रतिष्ठानों की संख्या (दिनांक 30.06.2026 तक):
क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का नाम | पीएमकेवीवाई (प्रशिक्षण केंद्र) | एनएपीएस (प्रतिष्ठान) |
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 11 | 8 | |
आंध्र प्रदेश | 527$ | 241* | |
अरुणाचल प्रदेश | 82 | 7 | |
असम | 864 | 93 | |
बिहार | 548 | 236 | |
चंडीगढ़ | 15 | 26 | |
छत्तीसगढ | 183 | 77 | |
दिल्ली | 148 | 165 | |
गोवा | 6 | 159 | |
गुजरात | 276 | 2,520 | |
हरियाणा | 536 | 1,871 | |
हिमाचल प्रदेश | 183 | 181 | |
जम्मू और कश्मीर | 554 | 38 | |
झारखंड | 208 | 139 | |
कर्नाटक | 436 | 889 | |
केरल | 146 | 464 | |
लद्दाख | 11 | 2 | |
लक्षद्वीप | 1 | 1 | |
मध्य प्रदेश | 1,417 | 364 | |
महाराष्ट्र | 577 | 2,666 | |
मणिपुर | 164 | 4 | |
मेघालय | 108 | 9 | |
मिजोरम | 109 | 0 | |
नागालैंड | 96 | 4 | |
ओडिशा | 242 | 162 | |
पुदुचेरी | 29 | 88 | |
पंजाब | 619 | 217 | |
राजस्थान | 1,474 | 276 | |
सिक्किम | 38 | 18 | |
तमिलनाडु | 530 | 668 | |
तेलंगाना | 173 | 381 | |
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 10 | 61 | |
त्रिपुरा | 170 | 7 | |
उत्तर प्रदेश | 2,664 | 1,972 | |
उत्तराखंड | 198 | 237 | |
पश्चिम बंगाल | 280 | 340 |
* कोनासीमा जिले में 5 सहित
$ कोनासीमा जिले में 6 सहित
अनुबंध- III
दिनांक 27.07.2026 को उत्तरार्थ लोक सभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1227 के भाग (क) से (ग) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध।
देश भर में विभिन्न अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों का ब्यौरा (दिनांक 30.06.2026 तक):
क्र.सं. | संस्थान |
1 | आदित्य विश्वविद्यालय |
2 | बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस पिलानी |
3 | करुण्य इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइन्स |
4 | भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान |
5 | अमृता विश्व विद्यापीठम |
6 | बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा |
7 | एमिटी यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश, नोएडा |
8 | ग्राफिक एरा डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी |
9 | मणिपाल प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपाल |
10 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर |
11 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास |
12 | वैमानिकी इंजीनियरिंग संस्थान |
13 | कलिंगा औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान, डीम्ड टूबी यूनिवर्सिटी |
14 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की |
15 | आईआईटी खड़गपुर |
16 | अनुराग विश्वविद्यालय |
17 | रेवा विश्वविद्यालय |
18 | मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर |
19 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर |
20 | दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय |
21 | हिंदुस्तान प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान |
22 | सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी |
23 | एसआरएम विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान |
24 | एमिटी यूनिवर्सिटी, महाराष्ट्र, मुंबई |
25 | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय |
26 | थापर इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान |
27 | डॉ. विश्वनाथ कराड एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे, महाराष्ट्र, भारत |
28 | विग्नान फाउंडेशन फोर साइन्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च |
29 | सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी पुणे |
30 | श्री साई राम इंजीनियरिंग कॉलेज |
31 | एनआईटी रायपुर |
32 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति |
33 | क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी |
34 | गोकाराजू रंगराजू इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी |
35 | निट्टे मीनाक्षी प्रौद्योगिकी संस्थान |
36 | कोयंबटूर प्रौद्योगिकी संस्थान |
37 | मल्ला रेड्डी एमआर डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी |
38 | असम डॉन बोस्को विश्वविद्यालय |
39 | जेएसएस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मैसूरु |
40 | जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय |
41 | डीएसपीएम ट्रिपल आईटी नया रायपुर |
42 | सांकलचंद पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग/ सांकलचंद पटेल विश्वविद्यालय |
43 | आदिकवि नन्नया विश्वविद्यालय |
44 | डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, लखनऊ |
45 | केजे सोमैया स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग |
46 | इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्युट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (ट्रिपल आईटी दिल्ली) |
47 | अजींक्या डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय, लोहेगांव, पुणे |
48 | शाह और एंकर कच्छी इंजीनियरिंग कॉलेज, चेंबूर, मुंबई |
49 | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे, पवई, मुंबई |
50 | लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फागवारा, पंजाब |
51 | एमकेएसएसएसएस कमिंस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन, पुणे |
यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी द्वारा आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2290022)

