पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
अंतर-राज्य संरक्षण प्रयासों से गुजरात में एक दशक बाद गोडावन के चूजे को सफलता पूर्वक अंडे से निकाला गया
संरक्षण प्रजनन केंद्रों में जीआईबी की संख्या 73 तक पहुंच गई है; निकट भविष्य में पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की योजना है: श्री भूपेंद्र यादव
प्रविष्टि तिथि: 28 MAR 2026 1:46PM by PIB Delhi
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की। गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद एक चूजे का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि जंपस्टार्ट अप्रोच नामक एक नवीन संरक्षण उपाय के माध्यम से संभव हुई है। इस प्रयास की योजना एक वर्ष पहले बनाई गई थी और इसका समन्वय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने राजस्थान और गुजरात के राज्य वन विभागों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से किया था।
देश में जीआईबी की यह पहली अंतरराज्यीय पहल है, जिसे गुजरात में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह बताना महत्वपूर्ण है कि गुजरात में कच्छ के घास के मैदानों में केवल तीन मादा जीआईबी ही बची हैं, जिससे जंगल में उपजाऊ अंडे मिलने की कोई संभावना नहीं है। एक सेए हुए अंडे को कच्छ में वांछित घोंसले के स्थान तक पहुंचाने के लिए 770 किलोमीटर की कठिन सड़क यात्रा करनी पड़ी, जिसे सम (राजस्थान) से नालिया (गुजरात) तक बिना रुके एक मार्ग बनाकर पूरा किया गया।
सोशल मीडिया पोस्ट में श्री यादव ने बताया कि प्रोजेक्ट जीआईबी की परिकल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2011 में गुजरात सहित इसके प्राकृतिक आवासों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए की थी और इसे औपचारिक रूप से 2016 में लॉन्च किया गया था। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रजाति के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति प्रयासों को मजबूत करने में लगातार प्रगति कर रही है।
Gujarat sees a GIB chick after a decade, through a novel conservation measure – the jumpstart approach, coordinated by the Ministry, State Forest Departments of Rajasthan and Gujarat, and Wildlife Institute of India.
Envisioned by PM Shri @narendramodi ji in 2011 to conserve… pic.twitter.com/oE2DYTZBUF
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) March 28, 2026
मंत्री जी ने जानकारी दी कि राजस्थान के सैम और रामदेवरा स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्रों में पक्षियों की संख्या 73 हो गई है, जिसमें वर्तमान प्रजनन मौसम के दौरान पांच नए चूजे शामिल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि दीर्घकालिक संरक्षण योजना के तहत भारत निकट भविष्य में पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस अभूतपूर्व पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री जी ने कहा कि अगस्त 2025 में टैग की गई मादा जीआईबी ने कच्छ में एक बांझ अंडा दिया, जहां स्थानीय आबादी के सभी नर बहुत पहले ही मर चुके थे। एक बड़े अंतरराज्यीय संरक्षण प्रयास के तहत, राजस्थान के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से एक बंदी-प्रजनित जीआईबी अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे से अधिक की सड़क यात्रा करके सफलतापूर्वक 22 मार्च को घोंसले में वापस रख दिया गया।
मंत्री जी ने बताया कि मादा ने उपजाऊ अंडे को सेने की प्रक्रिया पूरी कर ली और 26 मार्च को चूजे को सफलतापूर्वक जन्म दिया। क्षेत्रीय निगरानी दल ने चूजे को उसके प्राकृतिक आवास में उसकी पालक माँ द्वारा पाला-पोसा जाते हुए देखा। उन्होंने इसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
श्री यादव ने कहा कि यह प्रयास ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए उठाए जा रहे कई कदमों में से एक है और वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इस प्रयास में शामिल सभी वैज्ञानिकों, फील्ड अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी और चूजे के जीवित रहने की आशा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार संरक्षण के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।
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