
अमेरिका ने बुधवार को उत्तर अटलांटिक में एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया गया था. अब जो सूचना आ रही है वह हैरान करने वाली है. रूस टुडे (आरटी) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज पर 28 क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें 3 भारतीय नागरिक शामिल हैं. जहाज का नाम पहले ‘बेला 1’ था, जो एक प्राइवेट ट्रेडर ने चार्टर्ड किया था. बाद में इसका नाम बदलकर ‘मरिनेरा’ कर दिया गया और यह गयाना के झंडे तले चल रहा था. क्रू में 6 जॉर्जियन, 17 यूक्रेनी, 3 भारतीय और 2 रूसी थे.
जहाज की पूरी कहानी
रूस टुडे (आरटी) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज का नाम पहले ‘बेला 1’ था, जो किसी प्राइवेट ट्रेडर ने किराए पर लिया था. फिर इसका नाम बदलकर ‘मरिनेरा’ कर दिया गया और ये गयाना के झंडे तले चलने लगा. क्रू में 6 जॉर्जियन, 17 यूक्रेनी, 3 भारतीय और 2 रूसी थे. आरटी ने बताया कि जहाज को कैरिबियन सागर से ट्रैक किया गया था. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये वेनेजुएला से जुड़ा हुआ था, जहां अमेरिका के सख्त प्रतिबंध लगे हैं. जहाज ने अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी को चकमा देने की कोशिश की और यूएस कोस्ट गार्ड की बोर्डिंग को भी इग्नोर किया. दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आरटी ने लिखा है कि “ये हाल के सालों में पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने रूसी झंडे वाला जहाज जब्त किया है.” ये घटना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद हुई है. मतलब, टाइमिंग भी कमाल की है. जहाज पर तेल था, जो शायद वेनेजुएला से लोड हुआ था, और ये सब प्रतिबंधों को तोड़ने की कोशिश लग रही है.
भड़का रूस
जैसे ही अमेरिका ने ये हरकत की रूस तो भड़क गया. रूसी संसद के सीनियर लॉमेकर आंद्रेई क्लिशास ने तास न्यूज एजेंसी को बताया, “यह अमेरिका की सरासर समुद्री डकैती है.” रूस के ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने कहा कि जहाज से सारा संपर्क टूट गया है. आरटी ने एक फोटो भी शेयर की, जिसमें हेलिकॉप्टर जहाज के ऊपर मंडरा रहा है, लगता है अमेरिकी फोर्सेस बोर्डिंग कर रही हैं. रूस का कहना है कि ये अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, और वो इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे. सोचो, अगर इसी तरह घटनाएं होती रहीं तो वैश्विक व्यापार पर बहुत असर पड़ेगा, तेल की सप्लाई चेन बिगड़ सकती है.
अमेरिका ने इस मामले में क्या कहा?
अमेरिका ने ऑफिशियल बयान में पुष्टि की कि उन्होंने दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को पकड़ा है. जिसमें एक रूसी झंडे वाला ‘बेला 1’ (जो बाद में मरिनेरा बना) और दूसरा पनामा झंडे वाला ‘एम सोफिया’ शामिल है. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया था “दोनों जहाज वेनेजुएला में आखिरी बार डॉक हुए थे या वहां जा रहे थे. बेला 1 हफ्तों से कोस्ट गार्ड से बचने की कोशिश कर रहा था, झंडा बदलकर और नाम पेंट करके. यूएससीजीसी मुनरो के बहादुर क्रू ने तूफानों में पीछा किया और देश की रक्षा की.” नोएम ने आगे लिखा, “ये बहादुर पुरुष और महिलाएं हमारे राष्ट्र की शुक्रगुजारी की हकदार हैं.” साउदर्न कमांड ने बताया कि एम सोफिया एक ‘स्टेटलेस, प्रतिबंधित डार्क फ्लीट मोटर टैंकर’ था. मतलब, ये वो जहाज हैं जो गुपचुप तरीके से प्रतिबंधों को तोड़ते हैं.अमेरिका का कहना है कि ये ऑपरेशन उनके देश की सुरक्षा के लिए जरूरी था.
ब्रिटेन ने इस मामले में अमेरिका का दिया साथ
ब्रिटेन ने भी इस घटना में अमेरिका का साथ दिया है. ब्रिटिश डिफेंस मिनिस्ट्री ने बयान में कहा: “यूके आर्म्ड फोर्सेस ने अमेरिकी रिक्वेस्ट पर बेला 1 को यूके-आइसलैंड-ग्रीनलैंड गैप में इंटरसेप्ट करने के लिए प्री-प्लांड ऑपरेशनल सपोर्ट दिया, जिसमें बेसिंग शामिल थी.” ये घटना समुद्री कानूनों और प्रतिबंधों पर बड़े सवाल उठा रही है.भारतीय क्रू मेंबर्स की सुरक्षा पर अभी कोई बयान नहीं आया, लेकिन ये भारत के लिए चिंता का विषय है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे ऑपरेशन ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं, और वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा सकते हैं. देखते हैं आगे क्या होता है.

