Trump on the US Supreme Court tariff verdict: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ टेरर को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. सर्वोच्च अदालत के फैसले से भड़के ट्रंप ने कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘शर्मनाक’ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. ट्रंप ने कहा, वो अदालत के इस फैसले से वे सहमत नहीं हैं, इसलिए उनके पास आगे की रणनीति तैयार है और जरूरत पड़ी तो वे ‘बैकअप प्लान’ यानी प्लान-B लागू कर सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि कुछ लोग अमेरिका को लूट रहे हैं और कुछ लोग महान देश को बर्बाद करने पर तुले हैं. देशहित में जो कुछ बन पड़ेगा, वो करेंगे.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करता हुए आदेश दिया कि राष्ट्रपति को इसे लगाने का अधिकार नहीं है. अब ट्रंप को न सिर्फ टैरिफ हटाने होंगे. बल्कि वसूले गए टैरिफ को भी लौटाना पड़ेगा. ट्रंप का टैरिफ गैर कानूनी है. ये फैसला अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत का है. जिसने ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. 9 जजों ने 6-3 के बहुत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा. जिसमें ये कहा गया था कि टैरिफ लगाना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र के बाहर है. फैसले में कहा गया कि इस टैरिफ का पावर यूज करने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति लेनी होगी.

टैरिफ लगाने की शक्ति केवल अमेरिकी सीनेट के पास: SC

जजों ने कहा कि अमेरिका का संविधान टैक्स लगाने की शक्ति कांग्रेस को देता है. न कि किसी कार्यकारी शाखा को. राष्ट्रपति ट्रंप ने अप्रैल 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर आयात शुल्क लगाया था. ट्रंप का दावा था इससे अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू मिला. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं. मुमकिन है कि अमेरिका को अब उन देशों को टैरिफ का वो पैसा भी लौटाना पड़े. जो दूसरे देशों पर थोप करके वसूला गया है. 

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अब क्या होगा ट्रंप का ‘प्लान-B’ ?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. इमरजेंसी एक्ट (IEEPA) के इस्तेमाल पर कोर्ट ने रोक जरूर लगा दी है, लेकिन ट्रंप ने साफ संकेत दे दिया है कि यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होगी. उन्होंने अपने अगले कदम को ‘प्लान बी’ का नाम दिया है, यानी एक वैकल्पिक रणनीति पहले से तैयार है दरअसल, कोर्ट का फैसला सिर्फ IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की शक्ति तक सीमित है. ट्रंप के पास अभी भी कई अन्य कानूनी रास्ते खुले हैं 1974 का ट्रेड एक्ट और 1930 का स्मूट-हॉली एक्ट जैसे पुराने लेकिन प्रभावी कानून उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में आयात पर शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.

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मसलन, ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत राष्ट्रपति 150 दिनों तक के लिए 15 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू कर सकते हैं. यह एक अस्थायी लेकिन असरदार कदम हो सकता है, जिससे प्रशासन को अपनी आर्थिक रणनीति आगे बढ़ाने का समय मिल सकता है.  ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने भी संकेत दिया है कि प्रशासन वैकल्पिक कानूनी विकल्पों पर काम कर रहा है, ताकि टैरिफ व्यवस्था को फिर से लागू किया जा सके. साफ है कि कानूनी अड़चनों के बावजूद ट्रंप की टीम पीछे हटने के बजाय नए रास्ते तलाशने में जुटी है. यानी, कोर्ट का फैसला एक रुकावट जरूर है, लेकिन ट्रंप के लिए यह अंत नहीं है बल्कि ‘प्लान बी’ की शुरुआत हो सकती है.