अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर प्रवासियों की एक लिस्ट शेयर की, जिसमें सरकारी कल्याण पाने वाले देशों की रैंकिंग है. हैरानी की बात, भारत का नाम इस लिस्ट में कहीं नहीं है. इस लिस्ट में भूटान टॉप पर है, जहां 81.4% प्रवासी मदद लेते हैं. भारतीय प्रवासी ज्यादा कमाते हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं. आइए जानते हैं पूरी खबरों की कहानी.

प्रवासियों की कल्याण लिस्ट में भारत नहीं शामिल
अमेरिका में प्रवासी और सरकारी मदद का मुद्दा हमेशा गर्म रहता है. हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर एक दिलचस्प लिस्ट शेयर की. ये लिस्ट अमेरिकी सरकार से कल्याणकारी लाभ उठाने वाले प्रवासियों की देशवार रैंकिंग दिखाती है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस दो पेज वाली लिस्ट में भारत का नाम तक नहीं है.

ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं, बल्कि ये दिखाता है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय कितने आत्मनिर्भर हैं.ट्रंप ने ये आंकड़े पोस्ट करते हुए लिखा कि ये लिस्ट उन देशों को हाइलाइट करती है जहां के प्रवासी सबसे ज्यादा सरकारी मदद पर निर्भर हैं. ये आंकड़े अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का प्रतिशत दिखाते हैं, जो 80% से ज्यादा से लेकर 40% तक जाते हैं.

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टॉप देश: जहां प्रवासी सबसे ज्यादा मदद लेते हैं
लिस्ट के पहले हिस्से में उन देशों का जिक्र है जहां मदद की दर सबसे ऊंची है. भूटान सबसे ऊपर है, जहां 81.4% भूटानी प्रवासी अमेरिकी सरकार से लाभ उठाते हैं. उसके बाद यमन (उत्तर) 75.2%, सोमालिया 71.9% और मार्शल आइलैंड्स 71.4% पर हैं. ये देश ज्यादातर अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और सेंट्रल अमेरिका से हैं, जहां युद्ध, गरीबी या राजनीतिक अस्थिरता की वजह से लोग अमेरिका आते हैं. उदाहरण के लिए, डोमिनिकन रिपब्लिक और अफगानिस्तान दोनों 68.1% पर हैं. कांगो 66%, गिनी 65.8% और इराक 60.7% पर लिस्टेड हैं. ग्वाटेमाला 56.5%, सूडान 56.3% और अल साल्वाडोर 55.4% जैसी दरें दिखाती हैं कि इन देशों के प्रवासी कितने संघर्ष में हैं. होंडुरास 52.9% और बांग्लादेश 54.8% पर हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि इन प्रवासियों को अमेरिका में बसने के लिए सरकारी सपोर्ट की ज्यादा जरूरत पड़ती है.

दूसरे पेज में पाकिस्तान का नाम भी शामिल
लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश हैं जहां मदद की दर कम है, लेकिन फिर भी ध्यान देने लायक. आइवरी कोस्ट 49.1% के साथ टॉप पर है, उसके बाद लाइबेरिया 48.9% और अल्जीरिया 48.1%. सीरिया 48%, जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8%, इथियोपिया 47.6%, रवांडा 47.1% और मोरक्को 46.6% पर हैं. पाकिस्तान 40.2% और मिस्र 39.3% पर शामिल हैं. लेकिन भारत? कहीं नहीं है. ये लिस्ट अमेरिका में प्रवासियों के राजनीतिक महत्व को भी रेखांकित करती है. भारत हमेशा चर्चा में रहता है, क्योंकि यहां से लाखों लोग अमेरिका जाते हैं. लेकिन रिसर्च बताती है कि भारतीय प्रवासी सबसे ज्यादा कमाने वाले ग्रुप में से एक हैं. वे जॉब्स में ज्यादा भाग लेते हैं और सरकारी मदद पर कम निर्भर रहते हैं.

भारतीय प्रवासियों की सफलता की कहानी
अमेरिका में भारतीयों की कहानी अलग है. वे टेक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ा रोल प्ले करते हैं. सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स भारतीयों ने शुरू किए हैं. स्टडीज से पता चलता है कि वे ज्यादा टैक्स देते हैं और अर्थव्यवस्था को बूस्ट करते हैं. ट्रंप की ये पोस्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी पर बहस जोरों पर है. भारत जैसे देशों के प्रवासी खुद को साबित कर रहे हैं कि वे बोझ नहीं, बल्कि एसेट हैं. ये लिस्ट हमें सोचने पर मजबूर करती है कि प्रवासी नीतियां कैसे बनाई जाएं. कुल मिलाकर, भारत की गैर-मौजूदगी एक गर्व की बात है, जो दिखाती है कि हमारे लोग मेहनत से आगे बढ़ते हैं.