US government shutdown ends: अमेरिका में चार दिन से चल रहा आंशिक सरकारी शटडाउन आखिरकार खत्म हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खर्च से जुड़े विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. ये शटडाउन डेमोक्रेटिक पार्टी के विरोध के कारण शुरू हुआ था. डेमोक्रेट सांसद उस संघीय एजेंसी को फंड देने के खिलाफ थे, जो ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई को लागू कर रही है. मंगलवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ने इस बिल पर दस्तखत किए हैं. इससे पहले इसी दिन रिपब्लिकन बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा में यह बिल बहुत कम अंतर से पास हुआ था. मतदान में 217 सांसदों ने समर्थन किया और 214 ने विरोध किया है. इस फैसले के बाद बंद पड़ी कई सरकारी सेवाओं को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है.
रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी ही पार्टी का क्यों किया विरोध?
इस बिल के समर्थन में 21 डेमोक्रेट सांसदों ने भी रिपब्लिकन का साथ दिया है. वहीं उतने ही रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी ही पार्टी के बिल का विरोध किया है. उनका कहना था कि डेमोक्रेट्स की मांगों को माने बिना यह बिल पास नहीं किया जाना चाहिए. डेमोक्रेट सांसद होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यानी डीएचएस में बदलाव चाहते थे. वे चाहते थे कि इमिग्रेशन कार्रवाई के तरीकों में सुधार किया जाए. डीएचएस को मिलने वाले नए फंड को लेकर बातचीत उस समय और बिगड़ गई, जब मिनियापोलिस में दो अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई. आरोप है कि संघीय एजेंटों ने कार्रवाई के दौरान उन्हें गोली मार दी थी. इसके बाद यह शहर ट्रंप की इमिग्रेशन नीति का बड़ा विवाद केंद्र बन गया है.
डीएचएस को चलाने के लिए दिया अस्थायी फंड
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने अलग पैकेज को मंजूरी दी थी. इसमें पांच ऐसे खर्च विधेयक शामिल थे, जिनसे ज्यादातर संघीय एजेंसियों को सितंबर तक फंड मिल सके. इसके साथ ही डीएचएस को चलाने के लिए दो हफ्ते का अस्थायी फंड भी दिया गया था. ताकि इस दौरान सांसद इमिग्रेशन नीति पर आगे की बातचीत कर सकें. राष्ट्रपति ट्रंप लगातार अपनी पार्टी के सांसदों पर दबाव बना रहे थे. वे चाहते थे कि यह बिल जल्द पास हो और शटडाउन खत्म किया जाए. यह बंदी शनिवार से शुरू हुई थी. ट्रंप पहले भी 43 दिन तक चले लंबे शटडाउन के दौरान राष्ट्रपति रह चुके हैं.
बिल पर हस्ताक्षर करते समय ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिकी जनता के लिए बड़ी जीत है. उन्होंने कहा कि यह कोई फिजूलखर्ची वाला बड़ा पैकेज नहीं है. बल्कि यह जिम्मेदारी से बनाया गया खर्च प्रस्ताव है. ट्रंप के अनुसार इसमें बेकार सरकारी खर्च में कटौती की गई है. साथ ही देश की सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और जरूरी कार्यक्रमों को समर्थन दिया गया है. दूसरी ओर डेमोक्रेट सांसदों की नाराजगी बनी हुई है. वे डीएचएस के काम करने के तरीके में बदलाव चाहते थे. उनका आरोप है कि एजेंट भारी हथियारों के साथ आते हैं. कई बार चेहरे ढके रहते हैं. पहचान भी साफ नहीं होती. कुछ मामलों में बिना वारंट लोगों को पकड़ा गया है.
मिनियापोलिस का बवाल
मिनियापोलिस में हुई गोलीबारी के बाद देशभर में विरोध भी हुआ था. मरने वालों में तीन बच्चों की मां रेनी गुड और पूर्व सैनिकों के साथ काम करने वाले नर्स एलेक्स प्रेट्टी शामिल थे. इसके बाद दबाव बढ़ा तो कुछ रियायतें दी गईं. डीएचएस की प्रमुख क्रिस्टी नोएम ने सोमवार को घोषणा की कि अब मिनियापोलिस में तैनात एजेंट तुरंत बॉडी कैमरे पहनेंगे. बाद में यह व्यवस्था पूरे देश में लागू की जाएगी. अब सांसदों के पास केवल दो हफ्ते हैं. इसी दौरान उन्हें पूरे साल के लिए डीएचएस का फंड तय करना है. दोनों पार्टियों का मानना है कि यह बातचीत आसान नहीं होगी. डेमोक्रेट सख्त निगरानी चाहते हैं. जबकि कंजर्वेटिव सांसद अपनी नीतियों पर जोर दे रहे हैं.
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