
Pakistan- Iran Expels Afghan Refugees: पाकिस्तान और ईरान से अफगानिस्तान शरणार्थियों को जबरन निकाले जाने का सिलसिला अब तक थमा नहीं है. एक ही दिन में 5,700 से ज्यादा अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान और ईरान से जबरदस्ती वापस भेज दिया गया. तालिबान ने इस पर चिंता जताते हुए दोनों देशों से मानवीय संवेदना दिखाने की अपील की है.
पाकिस्तान-ईरान का अफगानियों पर कहर
तालिबान के डिप्टी प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्ला फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रवासियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए हाई कमीशन की रिपोर्ट साझा की. अफगान न्यूज पझवोक के अनुसार, इस रिपोर्ट में बताया गया कि गुरुवार को 1,084 परिवार अफगानिस्तान लौट आए. इन परिवारों में कुल 5780 लोग शामिल थे.
हमदुल्ला फितरत ने कहा कि ये लोग हेरात में इस्लाम कला क्रॉसिंग, हेलमंद में बहरामचा, नंगरहार में तोरखम क्रॉसिंग, निमरोज में पुल-ए-अब्रेशम और कंधार में स्पिन बोल्डक के जरिए वापस लौटे. इससे पहले 1178 परिवार वापस लौटाए गए थे. जिनमें कुल 6,561 लोग शामिल थे. वापस लौटे इन लोगों को सिम कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे वे अपने परिजनों से संपर्क कर सकें. फितरत ने कहा कि ईरान और पाकिस्तान से गुरुवार को 4,591 अफगान शरणार्थियों को जबरदस्ती निकाला गया.
पाकिस्तान में चल रहा गिरफ्तारी अभियान
यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (UNHRC) की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानियों को सबक सिखाने के लिए लगातार अफगानी प्रवासियों को हिरासत में ले रहा है. इनमें सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों में हुई हैं.
एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने 1 जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 1 लाख 971 अफगानों को गिरफ्तार किया. इससे पहले 2024 में लगभग 9 हजार और 2023 में 26 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई थीं.
अफगान प्रवासियों को हटाने का फरमान
UNHRC ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों में से 76 फीसदी अफगान की नागरिकता वाले या बिना दस्तावेज वाले प्रवासी थे. वहीं बाकी 24 फीसदी के पास प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन कार्ड थे. सूत्रों का कहना है कि अफगान प्रवासियों को हिरासत में रखने की यह बढ़ोतरी 2025 में दो सरकारी ऑर्डर के बाद हुई है.
इन दो आदेशों के जरिए पाकिस्तानी सरकार ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी से अफगान प्रवासियों को हटाने का फरमान दिया. साथ ही पुलिस को पीओआर-कार्ड होल्डर्स को गिरफ्तार करने की इजाजत दी गई थी.
मानवाधिकार संस्थाओं ने जताई चिंता
पाकिस्तान सरकार की इस मनमानी पर मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता जताई है. उन्होंने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि कोई भी वापसी अपनी मर्जी से और अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के हिसाब से हो. उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर निकाले जाने से अफगानिस्तान की सीमा पर अस्थिरता पैदा होती है. साथ ही वापस लौटे परिवारों को अक्सर रहने की जगह, नौकरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है.
(एजेंसी आईएएनएस)
