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ईटानगर में सीसीआरएएस की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की बैठक हुई


समिति ने आयुर्वेद अनुसंधान को मजबूत करने के लिए अनुसंधान कार्यक्रमों, संस्थागत विकास और भविष्य की पहलों की समीक्षा की

प्रविष्टि तिथि: 04 SEP 2026 7:08PM by PIB Delhi

आयुर्वेदिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (सीसीआरएएस) की आंतरिक वित्त समिति (आईएफसी) की 106वीं बैठक आज ईटानगर स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में आयोजित की गई। बैठक में सीसीआरएएस के विभिन्न चल रहे अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों, संस्थागत पहलों, बुनियादी ढांचे के विकास और भविष्य की प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई, जिनका उद्देश्य आयुर्वेद और संबंधित विज्ञानों में वैज्ञानिक अनुसंधान को और मजबूत करना है।

बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ सांख्यिकीय सलाहकार श्री सत्यजीत पॉल ने की। सीसीआरएएस के महानिदेशक और समिति के सदस्य सचिव प्रो. (वैद्य) रबी नारायण आचार्य ने एजेंडा के विषयों को प्रस्तुत किया और समिति को परिषद की प्रमुख उपलब्धियों, मुख्य पहलों और महत्वपूर्ण सफलताओं के बारे में जानकारी दी।

बैठक में शोध एवं विकास गतिविधियों, संस्थागत क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और अलग-अलग कार्यक्रमों को असरदार ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि आयुर्वेद शोध में हुई प्रगति का फायदा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और लोगों तक आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवाओँ की बेहतर पहुंच के रूप में मिलना चाहिए।

इस बैठक में सलाहकार, आयुष मंत्रालय डॉ. ए. रघु; अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार भट्टेड; इंडियन फार्माकोपिया आयोग में सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. विवेकानंदन कलाईसेल्वन; आईएफडी में निदेशक श्री अमरेंद्र सिंह; आयुष मंत्रालय में निदेशक श्रीमती विजयलक्ष्मी भारद्वाज; सीसीआरएएस में उप निदेशक (प्रशासन) श्री दीपक कोचर; और सीसीआरएएस में निदेशक (इंस्टीट्यूट) डॉ. प्रताप मखीजा के साथ-साथ आयुष मंत्रालय और सीसीआरएएस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने खासकर शोध और विकास के क्षेत्रों में सीसीआरएएस की प्रगति और पिछले वित्त वर्ष के दौरान कोष के 100 प्रतिशत इस्तेमाल के लिए सराहना की।

बैठक का समापन वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने, संस्थागत सहयोग को मजबूत करने, कार्यक्रमों को समय पर लागू करने और आयुष सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर देने के साथ हुआ। समिति ने शोध के नतीजों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज के लिए सार्थक फायदों में बदलने के महत्व को फिर से दोहराया।

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पीके / केसी/ एमपी 

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