सूचना और प्रसारण मंत्रालय
उपराष्ट्रपति जी ने तमिल विद्वानों, विरासत और संस्कृति को समर्पित 16 प्रकाशनों का विमोचन किया
“भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, परन्तु इसकी आत्मा एक है”: उपराष्ट्रपति जी
श्री अश्विनी वैष्णव ने तमिल की समृद्ध और शाश्वत सभ्यता पर प्रकाश डाला
प्रविष्टि तिथि: 02 MAR 2026 8:48PM by PIB Delhi
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग की ओर से प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें तमिल के विख्यात विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित हैं। विमोचित पुस्तकों में से 13 तमिल भाषा पर आधारित हैं।

तमिल शीर्षकों में रामेश्वरम्, रामानुजार, नादुकल, अरिकाइमेडु, बक्थी इलक्कियाम, इयारकई वेलनमई, पजंथामिजान इसई करुविगल, तमिझागा नत्तार देवंगल, पुधिया अरिवियाल थोझिलनुतपंगल, बंकिम चंद्र चटर्जी, मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तंजावुर पेरुवुदयार कोइल, मणिमेगलाई और महाविद्वान मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई शामिल हैं।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विमोचित पुस्तकें मंदिर परंपराओं, दर्शन, साहित्य, संगीत और विज्ञान के साथ तमिल धरोहर की गहराई, विविधता और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं। तमिल को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, लेकिन साथ ही साथ उसकी आत्मा एक है। उन्होंने वैश्विक मंच पर तमिल को हमेशा सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की और युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पढ़ने का आग्रह करते हुए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक शक्ति पर भी बल दिया।

पुस्तकों के विमोचन के मौके पर अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त समृद्ध और प्राचीन संस्कृति वाली शास्त्रीय भाषा के तौर पर तमिल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग की पुस्तकें इस गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाती हैं।

At the release of books published by the Ministry of I&B’s Publications Division by Vice President C. P. Radhakrishnan in New Delhi, Union Minister @AshwiniVaishnaw said that Tamil culture is so rich and ancient that it is recognised across the world as one of the most important… pic.twitter.com/7XvdfwNzPC
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) March 2, 2026
इस कार्यक्रम में डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित रहे। उन्होंने तमिल संगम साहित्य के महत्त्व के बारे में बात की और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को उजागर किया।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्री एस. के. बोस की ओर से लिखित बंकिम चंद्र चटर्जी की पुस्तक का अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में विमोचन था। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित इस समृद्ध संस्करण में इस प्रख्यात साहित्यकार के जीवन और काल तथा भारतीय साहित्यिक आंदोलन में उनके योगदान का गहन विश्लेषण किया गया है। अंग्रेजी संस्करण में एक नया आवरण, अतिरिक्त अभिलेखीय तस्वीरें और चित्र शामिल हैं। इस आवरण को विशेष रूप से आईआईटी दिल्ली के सहयोग से एक स्टार्टअप की मदद से डिजाइन किया गया है, जिसमें समकालीन सौंदर्यशास्त्र और शास्त्रीय भावना का अद्भुत मिश्रण है। हिंदी और तमिल अनुवादों के एक साथ विमोचन से वंदे मातरम के पूजनीय रचयिता की विरासत व्यापक पाठकों तक पहुंच गई है।
रामेश्वरम् पर आधारित यह पुस्तक पुराणों और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजी संदर्भों को प्रस्तुत करती है, जिसमें रामेश्वरम मंदिर परिसर के पवित्र स्थलों, स्थापत्य कला की भव्यता, मूर्तियों और देवी-देवताओं का विशेष वर्णन किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मंदिर के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व की व्यापक समझ प्रदान करना है।

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