
विधि एवं न्याय मंत्रालय

केंद्र सरकार ने केंद्र प्रायोजित न्यायिक अवसंरचना योजना के तहत कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया
प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2026 8:50PM by PIB Delhi
केंद्र सरकार 1993-94 से जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना (सीसीएस) लागू कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पाँच प्रमुख घटक–कोर्ट हॉल, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के हॉल, शौचालय परिसर तथा डिजिटल कंप्यूटर कक्ष शामिल हैं। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 31 मई 2026 तकइन राज्यों में जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले उपलब्ध कोर्ट हॉल और न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयों का विवरण इस प्रकार है:
राज्य | स्वीकृत संख्या | उपलब्ध न्यायालय कक्षों की संख्या | उपलब्ध आवासीय इकाइयों की संख्या |
कर्नाटक | 1398 | 1278 | 1199 |
हिमाचल प्रदेश | 192 | 180 | 161 |
स्रोत: एमआईएस पोर्टल
कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश राज्यों के संबंध में केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु पिछले पांच वर्षों के दौरान पूर्ण किए गए और वर्तमान में निर्माणाधीन न्यायालय भवन और आवासीय इकाइयों का विवरण (31.05.2026 तक) निम्नलिखित है:
राज्य | पूर्ण किए गए न्यायालय कक्षों की संख्या | पूर्ण किए गए आवासीय इकाइयों की संख्या | निर्माणाधीन न्यायालय कक्षों की संख्या | निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों की संख्या |
कर्नाटक | 586 | 129 | 218 | 46 |
हिमाचल प्रदेश | 04 | 00 | 36 | 05 |
स्रोत: एमआईएस और न्याय विकास पोर्टल
पिछले 5 वर्षों के दौरान कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश राज्यों को वर्षवार जारी की गई धनराशि का विवरण इस प्रकार है:
(करोड़ रुपये में)
वित्तीय वर्ष | कर्नाटक राज्य को जारी की गई केंद्रीय धनराशि | हिमाचल प्रदेश राज्य को जारी की गई केंद्रीय निधि |
2021-22 | 27.00 | 0.00 |
2022-23 | 82.01 | 0.00 |
2023-24 | 133.16 | 6.00 |
2024-25 | 73.92 | 13.62 |
2025-26 | 34.09 | 12.25 |
केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत परियोजनाओं की पहचान संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से पात्र प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद उन्हें निधि का अस्थायी आवंटन किया जाता है तथा मुख्य स्वीकृति (मदर सेंक्शन) जारी किया की जाती है। इसके बाद राज्य/केंद्रशासित प्रदेश योजना के दिशा–निर्देशों का पालन करते हुए मुख्य स्वीकृति की सीमा के तहत चिन्हित परियोजनाओं पर व्यय कर सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कर्नाटक को 5.33 करोड़ रुपये तथा हिमाचल प्रदेश को 5.195 करोड़ रुपये कीमुख्य स्वीकृति जारी की गई है।
न्यायालयों के लिए डिजिटल अवसंरचना के संबंध में, ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाया गया है, जो मुकदमे की फाइलिंग से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करता है। न्यायालयों के डिजिटलीकरण के लिए, ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के तहत कर्नाटक उच्च न्यायालय और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को क्रमशः 151.73 करोड़ रुपये और 20.66 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।
अदालतों के डिजिटल बुनियादी ढांचे के संबंध में ई–कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तहत एक व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है, जो किसी मामले के दाखिल होने से लेकर अंतिम निर्णय तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से समर्थन प्रदान करता है। ई–कोर्ट्स परियोजना के तृतीय चरण के अंतर्गत न्यायालयों के डिजिटलीकरण के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय को 151.73 करोड़ रुपये तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को 20.66 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
यह जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
***
पीके / केसी / केजे
(रिलीज़ आईडी: 2289525) आगंतुक पटल : 4

