रेल मंत्रालय
केरल का रेलवे बजट 2026-27 में ₹3,795 करोड़ के पार, जो 2009-14 के दौरान ₹372 करोड़ के सालाना खर्च से 10 गुना ज्यादा है
1 फरवरी, 2026 तक केरल में ₹4,835 करोड़ की लागत से 138 आरओबी/आरयूबी मंजूर किए गए
केरल के 35 अमृत भारत स्टेशनों में से 11 अब पुनर्विकसित किए गए हैं; प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आज शोरानूर, कुट्टीपुरम और चंगनास्सेरी स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे
प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 8:32PM by PIB Delhi
(ए) रेलवे का राजस्व/आमदनी जोन के हिसाब से तैयार किया जाता है, राज्य के हिसाब से नहीं। केरल दक्षिणी रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आता है। पिछले पांच सालों में दक्षिणी रेलवे से मिला राजस्व और कुल व्यय इस तरह है:
(करोड़ ₹ में)
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वित्त वर्ष |
आमदनी |
कुल व्यय |
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2020-21 (कोविड वर्ष) |
4,043 |
14,821 |
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2021-22 (कोविड वर्ष) |
7,094 |
21,423 |
|
2022-23 |
9,967 |
22,873 |
|
2023-24 |
11,286 |
26,505 |
|
2024-25 |
11,628 |
29,225 |
बजट आवंटन:
हाल के सालों में केरल में बजट आवंटन में काफी बढ़ोतरी हुई है। केरल राज्य में पूरी तरह/कुछ हिस्से में आने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए बजट आवंटन इस तरह है:-
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अवधि |
परिव्यय |
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2009-14 |
₹ 372 करोड़/वर्ष |
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2025-26 |
₹ 3,042 करोड़ (8 गुने से ज्यादा) |
|
2026-27 |
₹ 3,795 करोड़ (10 गुने से ज्यादा) |
जारी परियोजनाएं:
01.04.2025 तक, केरल में पूरी तरह/आंशिक हिस्से में आने वाले 266 किमी लंबी 06 परियोजनाएं (02 नई लाइन और 04 दोहरीकरण) जिनकी लागत ₹9,415 करोड़ है, उन्हें मंजूरी दी गई है। सारांश इस तरह है:-
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श्रेणी |
नई परियोजनाएं |
कुल लंबाई |
लंबाई, जितना काम पूरा हुआ |
पूरा होना बाकी है |
मार्च 2025 तक व्यय (करोड़ ₹ में) |
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नई लाइन |
02 |
146 किमी |
0 किमी |
146 किमी |
309 |
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दोहरीकरण / मल्टीट्रैकिंग |
04 |
120 किमी |
26 किमी |
94 किमी |
2,941 |
|
कुल |
06 |
266 किमी |
26 किमी |
240 किमी |
3,250 |
हाल में पूर्ण हुई परियोजनाएं:
केरल में हाल ही में पूरी हुई कुछ परियोजनाओं का विवरण नीचे दिया गया है:
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क्र. सं. |
परियोजना |
लागत (करोड़ ₹ में) |
|
1 |
डिंडीगुल-पोलाची-पालघाट और पोलाची-कोयंबटूर गेज रूपांतरण (217 किमी) |
1,360 |
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2 |
क्विलोन-तिरुनेलवेली-तिरुचेंदूर गेज रूपांतरण (357 किमी) |
1,122 |
|
3 |
मुलंतुरुट्टी-कुरुप्पंतारा दोहरीकरण (24 किमी) |
303 |
|
4 |
चेंगनूर-चिंगवनम दोहरीकरण (27 किमी) |
436 |
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5 |
अंबालापुझा-हरिपद दोहरीकरण (18 किमी) |
346 |
|
6 |
कुरुपपंथारा-चिंगवनम दोहरीकरण (27 किमी) |
749 |
परियोजनाएं:
केरल में पूरी तरह/कुछ हिस्से में आने वाली कुछ परियोजनाएं जो शुरू की गई हैं, वे इस तरह हैं:
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क्र. सं. |
परियोजना |
लागत |
|
1 |
तिरुन्नावाया – गुरुवायुर नई लाइन (35 किमी) |
138 |
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2 |
अंगामाली-सबरीमाला नई लाइन (111 किमी) |
3,801 |
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3 |
एर्नाकुलम-कुंबलम दोहरीकरण (8 किमी) |
595 |
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4 |
कुंबलम-थुरावुर पैच दोहरीकरण (16 किमी) |
803 |
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5 |
त्रिवेंद्रम- कन्याकुमारी दोहरीकरण (87 किमी) |
3,786 |
|
6 |
शोरानूर – वल्लथोल दोहरीकरण (10 किमी) |
367 |
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7 |
पलक्कड़ टाउन – परली बाईपास लाइन (2 किमी) |
164 |
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8 |
अलपुझा- अंबालापुझा दोहरीकरण (13 किमी) |
324 |
|
9 |
तुरावुर – मारारीकुलम दोहरीकरण (21 किमी) |
451 |
भूमि अधिग्रहण की स्थिति:
केरल राज्य में पूरी तरह/आंशिक हिस्से में आने वाली जरूरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का काम जमीन अधिग्रहण में देरी की वजह से रुका हुआ है। केरल राज्य में जमीन अधिग्रहण की स्थिति इस तरह है:
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केरल में परियोजनाओं के लिए जरूरी कुल जमीन |
476 हेक्टेयर |
|
अधिग्रहित जमीन |
65 हेक्टेयर (14%) |
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बाकी जमीन जो अधिग्रहित की जानी है |
411 हेक्टेयर (86%) |
रेलवे ने जमीन अधिग्रहण के लिए केरल सरकार को ₹1,975 करोड़ जमा किए थे। जमीन अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए केरल सरकार की मदद की जरूरत है। उदाहरण के लिए, जमीन अधिग्रहण की वजह से देरी से चल रहे कुछ बड़ी परियोजनाओं का विवरण इस तरह हैं:-
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क्र. सं. |
परियोजना का नाम |
कुल अधिग्रहित भूमि (हेक्टेयर में) |
अधिग्रहित भूमि (हेक्टेयर में) |
शेष भूमि जो अधिग्रहित की जानी है (हेक्टेयर में) |
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1. |
अंगमाली – सबरीमाला नई लाइन (111 किमी) |
416 |
24 |
392 |
|
2. |
एर्नाकुलम – कुंबलम पैच दोहरीकरण (8 किमी) |
4 |
3 |
1 |
|
3. |
कुंबलम – तुरावुर पैच दोहरीकरण (16 किमी) |
10 |
9 |
1 |
|
4. |
शोरानूर – वल्लथोल दोहरीकरण (10 किमी) |
5 |
0 |
5 |
भारत सरकार परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन सफलता केरल सरकार के समर्थन पर निर्भर करती है।
रोड ओवर ब्रिज (आरओबी)/रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी):
01.02.2026 तक, केरल राज्य में रेलवे ट्रैक पर ₹4,835 करोड़ की लागत से 138 रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी) मंजूर किए गए हैं, जो योजना और काम करने के अलग-अलग चरण में हैं।
राज्य सरकार की वजह से कुल 106 आरओबी/आरयूबी में देरी हो रही है। विवरण नीचे दिया गया है:
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क्र. सं. |
कारण |
आरओबी/आरयूबी (संख्या में) |
|
1. |
राज्य सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण में देरी। |
38 |
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2. |
राज्य सरकार द्वारा अलाइनमेंट को फ़ाइनल करना। |
63 |
|
3. |
कानून व्यवस्था/सार्वजनिक विरोध/अदालती मामले वगैरह। |
2 |
|
4. |
एजेंसी अभी तय नहीं हुई है। |
3 |
आरओबी/आरयूबी के कामों का पूरा होना और चालू होना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे एलसी बंद करने के लिए राज्य सरकारों का सहयोग, अप्रोच अलाइनमेंट तय करना, जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) की मंजूरी, जमीन का अधिग्रहण, कब्जा हटाना, नियम तोड़ने वाली यूटिलिटीज को दूसरी जगह शिफ्ट करना, अलग-अलग अथॉरिटीज से कानूनी मंजूरी, परियोजना/काम की जगहों पर कानून और व्यवस्था की स्थिति, मौसम की वजह से किसी खास परियोजना/इलाके के लिए साल में काम करने का मौसम कितना लंबा होगा आदि। ये सभी बातें परियोजना/कामों के पूरा होने के समय पर असर डालती हैं।
आरओबी/आरयूबी के कामों की रफ्तार तेज करने के लिए रेलवे ने ये कदम उठाए हैं:
- जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) को फ़ाइनल करने से पहले संबंधित राज्य सरकार/रोड ओनिंग अथॉरिटी के साथ संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है ताकि काम आसानी से हो सके।
- आरओबी/आरयूबी के कामों से जुड़े अलग-अलग मामलों को सुलझाने के लिए रेलवे और राज्य सरकार के अधिकारियों की समय-समय पर बैठक होती हैं।
- रेलवे के हिस्से पर सड़क के स्पैन, तिरछापन और चौड़ाई के अलग-अलग संयोजन के लिए सुपरस्ट्रक्चर ड्राइंग का मानकीकरण किया गया है ताकि डिजाइन मंजूरी के दौरान देरी से बचा जा सके। इसे एक कम्पेंडियम (संक्षेप) के रूप में जारी किया गया है, जिसे तेजी से योजना के लिए रेलवे लाइनों पर रोड ओवर ब्रिज के लिए सीधे अपनाया जा सकता है।
आरओबी/आरयूबी की राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति:
2004-14 के दौरान भारतीय रेलवे पर बने आरओबी/आरयूबी की संख्या 2014-25 (जनवरी’26) की तुलना में इस तरह है:
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अवधि |
आरओबी/ आरयूबी का निर्माण हुआ |
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2004-14 |
4,148 |
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2014-25 (जनवरी’26) |
14,024 (केरल में बने 121 सहित) |
अमृत भारत स्टेशन:
इस योजना में मास्टर प्लान बनाना और स्टेशनों को बेहतर बनाने के लिए उन्हें अलग-अलग चरण में लागू करना शामिल है। मास्टर प्लानिंग में ये शामिल हैं:
· स्टेशन और सर्कुलेटिंग एरिया तक पहुंच को बेहतर बनाना
· स्टेशन को शहर के दोनों तरफ से जोड़ना
· स्टेशन की इमारत को बेहतर बनाना
· प्रतीक्षा कक्ष, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पानी के बूथ को बेहतर बनाना
· यात्रयों की आवाजाही के हिसाब से चौड़े फुट ओवर ब्रिज/एयर कॉन्कोर्स का इंतजाम
· लिफ्ट/एस्केलेटर/रैंप का इंतज़ाम
· प्लेटफॉर्म की सतह को बेहतर बनाना/इंतजाम करना और प्लेटफॉर्म पर कवर लगाना
· ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ जैसी योजना के जरिए स्थानीय उत्पाद के लिए कियोस्क का इंतजाम
· पार्किंग एरिया, मल्टीमॉडल एकीकरण
· दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं
· बेहतर यात्री सूचना प्रणाली
· हर स्टेशन पर ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए एग्जीक्यूटिव लाउंज, बिज़नेस मीटिंग के लिए तय जगह, लैंडस्केपिंग वगैरह का इंतजाम।
इस योजना में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल समाधान, जरूरत के हिसाब से बिना बैलास्ट वाले ट्रैक वगैरह का इंतजाम, फेजिंग और व्यवहार्यता और लंबे समय में स्टेशन पर सिटी सेंटर बनाना भी शामिल है।
अब तक, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास के लिए 1337 स्टेशनों की पहचान की गई है, जिनमें से 35 स्टेशन केरल में हैं। केरल में अमृत भारत स्टेशन स्कीम के तहत विकास के लिए पहचाने गए स्टेशनों के नाम इस तरह हैं:
|
राज्य |
स्टेशनों की संख्या |
स्टेशनों के नाम |
|
केरल |
35 |
अलपुझा, अंगादिप्पुरम, कलाडी के लिए अंगमाली, चालकुडी, चंगनास्सेरी, चेंगन्नूर, चिरायिंकीझ, एर्नाकुलम, एर्नाकुलम टाउन, एट्टूमनूर, फेरोक, गुरुवयूर, कन्नूर, कासरगोड, कायांकुलम जंक्शन, कोल्लम जंक्शन, कोझीकोड, कुट्टिपुरम, मवेलीकारा, नेय्याट्टिनकारा, नीलांबुर रोड, ओट्टापलम, परप्पनंगडी, पय्यानूर, पुनालुर, शोरानूर जंक्शन, थालास्सेरी, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, त्रिशूर, तिरूर, तिरुवल्ला, त्रिपुनिथुरा, वडकारा, वर्कला शिवगिरी, वडकांचेरी |
पूर्ण हुए स्टेशन:
केरल में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर विकास का काम अच्छी रफ्तार से शुरू किया गया है। अब तक, इस योजना के तहत नीचे दिए गए 11 स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है:
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राज्य |
स्टेशनों की संख्या |
स्टेशनों के नाम |
|
केरल |
11 |
कलाडी के लिए अंगमाली, चालकुडी, चंगनास्सेरी, चिरायिनकीझु, फेरोके, कुट्टिपुरम, नीलांबुर रोड, शोरानूर जंक्शन, त्रिपुनिथुरा, वडकारा, वडक्कनचेरी |
अन्य स्टेशनों पर विकास की गतिविधियां भी अच्छी गति से शुरू की गई हैं और कुछ स्टेशनों की प्रगति निम्नानुसार है:
- अंगदिप्पुरम स्टेशन: प्रथम प्रवेश में पोर्च, प्लेटफार्म शेल्टर, प्लेटफार्म सं. 1 और 2 के प्लेटफार्म सरफेसिंग, कॉनकोर्स, बुकिंग कार्यालय, प्रतीक्षालय, शौचालय, सर्कुलेटिंग एरिया में सुधार, पार्किंग और प्रथम प्रवेश की पहुंच सड़क, कोच इंडिकेशन बोर्ड, ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड और साइनेज का काम पूरा हो गया है। दिव्यांगजन सुविधाओं, लिफ्ट और 6 मीटर फुट ओवर ब्रिज का काम शुरू किया गया है।
- गुरुवायूर स्टेशन: प्लेटफार्म शेल्टर, कॉनकोर्स में सुधार, सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग का काम पूरा हो गया है। स्टेशन भवन, प्रवेश द्वार मेहराब, बुकिंग कार्यालय, प्रतीक्षालय, नए रिटायरिंग रूम, दिव्यांगजन सुविधाओं और फुट ओवर ब्रिज के सुधार का काम शुरू किया गया है।
- परप्पनंगडी स्टेशन: पोर्च, प्लेटफार्म शेल्टर, प्लेटफार्म सरफेसिंग, कॉनकोर्स में सुधार, बुकिंग कार्यालय, प्लेटफार्म संख्या 1 पर प्रतीक्षालय, शौचालय, पहली एंट्री पर सर्कुलेटिंग एरिया, दूसरी एंट्री पर पार्किंग, लिफ्ट, कोच इंडिकेशन बोर्ड और ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड का काम पूरा हो गया है। दिव्यांगजन सुविधाओं का काम शुरू कर दिया गया है।
- पय्यानूर स्टेशन: पोर्च, प्लेटफार्म शेल्टर, प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 को ऊंचा करने, कॉनकोर्स में सुधार, बुकिंग कार्यालय, प्रतीक्षालय, दूसरी एंट्री पर सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग, कोच इंडिकेशन बोर्ड और ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड का काम शुरू कर दिया गया है। स्टेशन भवन के सुधार, पहली एंट्री पर सर्कुलेटिंग एरिया, दिव्यांगजन सुविधाएं, लिफ्ट और 6 मीटर फुट ओवर ब्रिज का काम शुरू कर दिया गया है।
- तिरुर स्टेशन: स्टेशन की इमारत में सुधार, पहली एंट्री पर पोर्च, कॉनकोर्स, प्लेटफॉर्म नंबर 1 को ऊपर उठाना और प्लेटफॉर्म सरफेसिंग, प्लेटफॉर्म शेल्टर, बुकिंग कार्यालय, शौचालय, रिटायरिंग रूम में सुधार, पहली एंट्री पर सर्कुलेटिंग एरिया में सुधार, दूसरी एंट्री पर पार्किंग, लिफ्ट, साइनेज, फुट ओवर ब्रिज में सुधार, कोच इंडिकेशन बोर्ड, ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड, दूसरी एंट्री पर लिफ्ट और एस्केलेटर का काम पूरा हो गया है। दूसरी एंट्री पर सर्कुलेटिंग एरिया, पहली एंट्री पर पार्किंग और दिव्यांगजन सुविधाओं का काम शुरू कर दिया गया है।
इसके अलावा, भारतीय रेलवे में स्टेशनों का विकास/ पुनर्विकास/ अपग्रेडेशन / आधुनिकीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इस बारे में काम जरूरत के हिसाब से किए जाते हैं, जो आपसी प्राथमिकता और फंड की उपलब्धता पर निर्भर करता है। किसी स्टेशन का विकास / पुनर्विकास/ अपग्रेडेशन / आधुनिकारण स्टेशन की श्रेणी / स्थिति/ हैंडल किए जाने वाले ट्रैफिक वगैरह के आधार पर किया जाता है।
इसके अलावा, किसी भी रेलवे परियोजना की मंजूरी कई पैरामीटर / फैक्टर पर निर्भर करती है, जिनमें ये शामिल हैं:
i. संभावित ट्रैफिक अनुमान और प्रस्तावित रूट का फायदा
ii. परियोजना से मिलने वाली पहली और आखिरी मील कनेक्टिविटी
iii. मिसिंग लिंक को जोड़ना और अतिरिक्त रूट देना
iv. भीड़भाड़ वाली/सैचुरेटेड लाइनों को बढ़ाना
v. राज्य सरकारों/केंद्रीय मंत्रालयों/जन प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगें
vi. रेलवे की अपनी परिचालन जरूरतें
vii. सामाजिक-आर्थिक निहितार्थ
viii. धनराशि की कुल उपलब्धता
रेलवे परियोजना/परियोजनाओं का पूरा होना कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें ये शामिल हैं:
i. राज्य सरकार द्वारा जमीन का अधिग्रहण
ii. वन्य मंजूरियां
iii. नियम तोड़ने वाली यूटिलिटीज को हटाना
iv. अलग-अलग अथॉरिटीज से कानूनी मंजूरी
v. क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक स्थितियां
vi. परियोजना स्थल के इलाके में कानून और व्यवस्था की स्थिति
vii. किसी खास परियोजना स्थल के लिए साल में काम करने के महीनों की संख्या आदि।
ये सभी कारक परियोजना के पूरा होने के समय और लागत पर असर डालते हैं।
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में सवालों के जवाब में दी।
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