Iran Currency Collapse: आज के समय में अगर आपके पास 735 डॉलर यानी 66,961 रुपये हैं तो आप ईरान में अरबपति हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान की नेशनल करेंसी ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. यहां अमेरिकी डॉलर अब फ्री मार्केट में 1.63 मिलियन रियाल से ऊपर का बिजनेस कर रहा है. करेंसी ट्रैकिंग कंपनियां अलंचंद और बोनबास्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2026 को तेहरान में डॉलर की वैल्यू 1,637,000 और 1,646,500 रियाल के बीच थी, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है. इस रेट में 735 डॉलर 1.2 अरब रियाल से ज्यादा है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह अरबपति का दर्जा धन-दौलत को नहीं दर्शाता. यह इस बात को दर्शाता है कि रियाल की वैल्यू कितनी तेजी से गिरी है और आर्थिक संकट दैनिक जीवन को कितनी गहराई से प्रभावित कर रहा है.
ईरान में बढ़ती महंगाई
‘नोमुसिका’ की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की ओर से निर्धारित किए ऑफीशियल रेट और वास्तविकता में अब ज्यादा अंतर है. ईरान का सेंट्रल बैंक ऑफीशियल रेट तकरीबन 1.28-1.29 मिलियन रियाल प्रति डॉलर निर्धारित करता है, जो ओपन मार्केट के रेट से कई ज्यादा है. यह बदलाव पॉलिसी और आम नागरिकों पर पड़ रहे दबावों के बीच बढ़ते अलगाव को दर्शाता है. ईरान में इंफ्लेशन का अनुमान हर साल 50-60 फीसदी है. फूड प्रोडक्ट्स, फ्यूल, दवाओं और एक्सपोर्ट वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं. ईरान में कई परिवार अपनी बेसिक चीजों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं साथ ही पर्चेजिंग पावर में भी भारी गिरावट आई है.
ये भी पढ़ें- अरे ये क्या हुआ? सबसे अजीज दोस्त इजरायल में भारतीयों पर नस्लीय हमला, जमकर की पिटाई
फॉरेन करेंसी तक पहुंच हुई कम
ईरान में साल 2025 में अमेरिका की ओर से लगाए कड़े प्रतिबंधों के बाद से दबाव और अधिक बढ़ गया है. इन प्रतिबंधों ने ऑयल इंपोर्ट को लिमिटेड कर दिया है और फॉरेन करेंसी तक पहुंच को कम कर दिया है, जिससे इकोनॉमी को स्थिर करना मुश्किल हो गया है. ईरान के सेंट्रल बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि ऑयल एक्सपोर्ट से होने वाली इनकम में गिरावट आ रही है, जबकि कैपिटल माइग्रेशन तेज हो रहा है.
ये भी पढ़ें- ईरान में बरसने वाले हैं मिसाइल-बम? इजरायल ने खोला पावरबैंक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में भेजे ’53 दानव’
लोन में हुई बढ़ोत्तरी
‘ईरानइंटल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार 21 मार्च 2025 से शुरू हुए चालू ईरानी फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ऑयल अक्सपोर्ट का नॉमिनल वैल्यू लगभग 10 प्रतिशत गिरकर 30.7 अरब डॉलर हो गया. कुल इंपोर्ट लगभग 59 अरब डॉलर रहा, जबकि एक्सपोर्ट लगभग 48 अरब डॉलर था, जिससे 11 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस बचा हुआ है. रेवेन्यू की कमी और फंड लिमिटेड होने के कारण सरकार घरेलू उधार पर ज्यादा निर्भर हो गई है. नवंबर 2025 तक बैंकिंग सिस्टम पर सरकार का लोन पिछले साल की तुलना में 41 प्रतिशत बढ़ गया था, जबकि सेंट्रल बैंक पर उसका लोन 68 प्रतिशत बढ़ गया. कमर्शियल बैंकों की ओर से सेंट्रल बैंक से लिया गया उधार 63 प्रतिशत बढ़ गया. लिक्विडिटी में पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई, जो इंफ्लेशन और करेंसी डीवैल्यूएशन का एक मुख्य कारण है.
