What is Madman Theory: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा जाता है कि वो अपना विचार बदलते हैं, खुद अपनी बातों का खंडन करते हैं यानी अपनी बात से पलट जाते हैं. ऐसा कभी कभार नहीं बल्कि लगातार करते हैं. उनके बारे में कुछ भी अनुमान लगाना कम से कम बीते  सालभर में असंभव सा हो गया है. यूं तो लोगों को धमकाना और बात-बात में नाराज हो जाना उनकी पुरानी आदत और फितरत है, लेकिन इस बार अपने ही दोस्तों को धमका देना, उन्हें सबके सामने टके सा जवाब दे देना, लोगों की समझ से परे है. इसके बाद दुनियाभर में चर्चा हो रही है कि ट्रंप क्या मैडमैन थ्योरी पर चल रहे हैं. 

क्या हैं सिम्टम्स? 

धमकाना और फिर पलट जाना. वेनेजुएला से क्यूबा, ईरान से तूरान, गाजा से अफगानिस्तान, UN से लेकर NATO और WHO तक सबको धमका चुके ट्रंप अपने इस कार्यकाल में तकरीबन अनप्रिडिक्टेबल हो गए है. जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसी अजीबोगरीब मिसालों को चरितार्थ करने के उनके क्रियाकलापों को मैडमैन पॉलिसी से जोड़कर देखा जा रहा है. मिसाल के लिए वेनेजुएला में तख्तापलट कराने के बाद ग्रीनलैंड के मुद्दे पर NATO को देख लेने यूरोप को टैरिफ की धमकी देने के बाद ट्रंप अचानक समझौते के मूड में दिखे. दावोस में ईरान पर हमले से इनकार करने के बाद उन्होंने अपनी सेना को पता नहीं किस तैयारी में लगा दिया.

क्या है मैडमैन पॉलिसी या ‘पागलपन’ का सिद्धात

ट्रंप की इस मैडमैन थ्योरी के साथ-साथ उसके फायदे और नुकसान के बार में भी आपको बताते हैं. मैडमैन थ्योरी का मकसद है अपने विरोधियों को ये यकीन दिलाना कि अगर ज़रा भी उकसाया गया तो वो कुछ भी करने के लिए तैयार है. यानी ऐसा डर पैदा करना, ताकि सामने वाला झुक जाए. ऐसी नीति अपनाने वाला नेता जान-बूझकर खुद को अस्थिर, नियम तोड़ने वाला और परमाणु युद्ध तक जाने को तैयार दिखाता है.

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ये अलग बात है कि ट्रंप के कई दांव उल्टे पड़ चुके हैं. अमेरिका के दोस्त ही उसके खिलाफ दिख रहे हैं. उन्होंने ट्रंप पर भरोसा करना छोड़ दिया है. ये रणनीति कुछ समय के लिए जीत तो दिलाती है लेकिन इससे स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाती. इससे दोस्त भी दुश्मन बन जाते हैं.

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कैसे हुई शुरुआत?

ट्रंप जिस मैडमैन थ्योरी का सहारा ले रहे हैं, उसकी शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने की थी. 1969 में वियनताम युद्ध के दौरान उन्होंने धमकाया कि अमेरिका परमाणु हमला कर सकता है, मकसद दुश्मन को झुकाना था ताकि वो अमेरिका की शर्तों पर समझौते के लिए राजी हो जाए.

ट्रंप और निक्सन में एक बड़ा अंतर ये है कि निक्सन पर्दे के पीछे मैडमैन थ्योरी का इस्तेमाल करते थे. वहीं ट्रंप खुलकर पूरी दुनिया के सामने ये जाहिर करते हैं. इसी वजह से दुनिया, ट्रंप को अब उतना सीरियस नहीं लेती है.

ट्रंप के अलावा और कौन से नेता इस पॉलिसी पर चले

उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग-उन के मिसाइल टेस्ट, इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का कुवैत पर हमला और लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी भी मैडमैन थ्योरी पर चलते थे. जिस तरह दुनिया के कई देश ट्रंप के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं, उससे उनके लिए संकट खड़ा होना तय है.

ईरान में क्या करने जा रहे ट्रंप?

ईरान चारों ओर से घिर चुका है. अब्राहम लिंकन युद्धपोत ईरान पहुंच गया है. यानी ट्रंप पल-पल बदलते रहते हैं. पूरी दुनिया में ट्रंप की इस राजनीति से हाहाकार मचा हुआ है. कूटनीति के जानकार इसे मैडमैन थ्योरी कहते हैं यानी पागलों वाला सिद्धांत