
Protests in Iran: ईरान में कुछ भी ठीक नहीं है. हम ऐसा यूं ही नहीं कह रहे, वहां लोग सड़कों पर हैं. खामेनेई सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है. चौथे दिन प्रदर्शन उग्र हो गया है. ईरान की सड़कों पर वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ खुलेआम नारेबाजी हो रही है. प्रदर्शनकारियों में युवा और महिलाएं दोनों शामिल हैं. अब सवाल ये है कि आखिर क्यों ईरान में लोग सड़कों पर उतरे हैं. तो जान लीजिए कि इसके पीछे कोई एक नहीं बल्कि कई वजहें हैं. यह विरोध प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए देशव्यापी आंदोलन के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं.
प्रदर्शन के चौथे दिन प्रदर्शनकारी उग्र दिखे. दक्षिणी फार्स प्रांत के फासा शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक स्थानीय सरकारी इमारत में घुसने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने फासा के गवर्नरेट कार्यालय के गेट को तोड़ने की कोशिश की. ईरानी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने खुजेस्तान गवर्नरशिप के रामहोर्मोज शहर पर कब्जा कर लिया है और अब सरकार के लोकल गवर्नमेंट हेडक्वार्टर को जलाने की कोशिश हो रही है. इतना ही नहीं, असदाबाद में सिक्योरिटी फोर्स के IRGC बासिज फोर्स बेस पर धावा भी बोला गया है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों ईरान की सड़कों पर एक बार फिर व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं.
आखिर क्यों ईरान में सड़कों पर उतरे लोग?
ईरान में बीते रविवार को सबसे पहले तेहरान में दुकानदार सड़कों पर उतरे थे. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से महंगाई और जीने की परिस्थितियां मुश्किल हो चुकी हैं, जिसके बाद ये विरोध प्रदर्शन तेज हुआ है, जो धीरे-धीरे पूरे ईरान में फैल चुका है. बीते मंगलवार को तेहरान में छात्रों ने प्रदर्शन किया था, जबकि इस्फहान, यज्द और जंजान जैसे शहरों की यूनिवर्सिटियों और संस्थानों में भी विरोध की खबरें सामने आईं.
महंगाई से परेशान है जनता
दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है. मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो वहां दिसंबर में महंगाई दर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई. हैरान करने वाली बात ये है कि खाने पीने की चीजें साल भर में 72 प्रतिशत महंगी हो चुकी हैं, जबकि दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इतने सब के बाद भी लोगों को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई. इन तमाम परेशानियों को झेल रहे लोग अब सरकार के विरोध में सड़कों पर हैं. तेहरान समेत कई शहरों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों ने दुकानें बंद कर रखी हैं.
जल संकट भी एक बड़ी वजह
ईरान के कई शहर इस वक्त पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान के 20 से ज्यादा प्रांत महीनों से एक एक बूंद पानी को तरस रहे हैं. ये हाल सिर्फ 2025 का नहीं बल्कि पिछले 6 साल से ईरान सूखे की मार झेल रहा है. तेहरान में तो भारी जल संकट है. पहले महंगाई और अब पानी जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने के चलते लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और लोग सड़कों पर हैं.
ईरानी सरकार का रुख क्या है?
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर ईरानी सरकार कह रही है कि वह विरोध प्रदर्शनों को मानती है और इसकी आवाजों को धैर्य से सुनेगी, चाहे उसमें कितने भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया हो. सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने अपने एक बयान में कहा है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को मान्यता देती है और हम शांति से इकट्ठा होने के अधिकार पर जोर देते हैं, जिसे हमारे संविधान में मान्यता मिली है. जब लोगों की आवाज सुनी जाती है, तो इसका मतलब है कि दबाव ज्यादा है और सरकार का काम आवाज सुनना है. ईरानी सरकार ने ये भी संकेत दिए हैं कि शांतिपूर्ण विरोध जायज है, लेकिन हिंसा या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
खामनेई का तख्ता पलट होगा?
देशभर में हो रहे इस विरोध के बाद एक सवाल खड़ा हो चुका है कि क्या सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की सत्ता को वाकई कोई बड़ा खतरा है? ये कहना फिलहाल मुश्किल है, क्योंकि ईरान में जिस तरह का तंत्र है और जिस तरह से सरकार चलती है, उससे फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि खामेनेई की सत्ता का तख्ता पलट तुरंत होने वाला है, लेकिन जिस तरह से विरोध प्रदर्शन फैल रहे हैं, बाजार बंद हैं, छात्र और व्यापारी एक साथ सड़कों पर हैं, उसने शासन के सामने एक गंभीर चुनौती जरूर खड़ी कर दी है. ईरान एक ऐसा देश है, जहां सत्ता सिर्फ सरकार के हाथ में नहीं है, वहां रिवोल्यूशनरी गार्ड, सुरक्षा एजेंसियों और धार्मिक तंत्र का भी मजबूत नियंत्रण है. अब देखना होगा कि खामनेई का तख्ता पलट होने के सवाल का क्या जवाब मिलता है.
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