
Virat Kohli Test: भारत के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने मई 2024 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया था. उनके इस फैसले ने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया था. कोहली का यह सबसे फेवरेट फॉर्मेट था और उन्होंने निरंतरता में कमी के कारण इससे दूरी बना ली. अब उनके इस फैसले के करीब 8 महीने होने वाले हैं और इस पर अभी भी चर्चा हो रही है. पूर्व भारतीय बल्लेबाज से कमेंटेटर बने संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के फैसले पर निराशा और दुख जताया है. मांजरेकर ने सुझाव दिया कि पूर्व भारतीय कप्तान अपने रेड-बॉल करियर को जल्दी खत्म करने के बजाय अपनी फॉर्म वापस पाने के लिए और कड़ी मेहनत कर सकते थे.
मांजरेकर का छलका दर्द
जो रूट के टेस्ट क्रिकेट में लगातार बढ़ते प्रदर्शन के बीच मांजरेकर ने कहा कि कोहली का सबसे लंबे फॉर्मेट से दूर रहना ऐसे समय में और भी दुखद लगता है जब रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियम्सन जैसे उनके समकालीन खिलाड़ी अपनी विरासत को मजबूत कर रहे हैं. उनके अनुसार अपने करियर के आखिरी दौर में टेस्ट क्रिकेट में बल्ले से कोहली का लंबा संघर्ष उनके रिटायरमेंट को और भी दुर्भाग्यपूर्ण बनाता है. मांजरेकर ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में कहा, ”खैर, जैसे-जैसे जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं, मेरा ध्यान विराट कोहली पर जाता है. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट छोड़ दिया है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रिटायर होने से पहले जिन पांच सालों में उन्होंने संघर्ष किया. उन्होंने इस बात का पता लगाने के लिए पूरी जान नहीं लगाई कि टेस्ट क्रिकेट में पांच सालों तक उनका औसत 31 क्यों था, लेकिन मुझे बस दुख होता है कि जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियम्सन जैसे लोग टेस्ट क्रिकेट में सच में अपना नाम बना रहे हैं.”
टीम से बाहर होकर वापसी कर सकते थे विराट
मांजरेकर ने सुझाव दिया कि कोहली तकनीकी और मानसिक बदलाव कर सकते थे या घरेलू और विदेशी फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के जरिए वापसी करने के लिए कुछ समय के लिए टीम से बाहर रहने का फैसला भी स्वीकार कर सकते थे. मांजरेकर ने यह भी माना कि टेस्ट से रिटायर होने के बाद वनडे इंटरनेशनल खेलते रहने के कोहली के फैसले से उन्हें ज्यादा निराशा हुई है. उन्होंने वनडे को टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज के लिए सबसे आसान फॉर्मेट बताया और तर्क दिया कि टेस्ट क्रिकेट कौशल, स्वभाव और दृढ़ता की असली परीक्षा है.
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वनडे में विराट के खेलने से मांजरेकर दुखी
मांजरेकर ने कहा, ”अगर विराट कोहली ने क्रिकेट से ही संन्यास ले लिया होता, सभी फॉर्मेट से रिटायर हो गए होते तो ठीक था. लेकिन उन्होंने वनडे क्रिकेट खेलने का फैसला किया है. यह मुझे और भी निराश करता है क्योंकि यह एक ऐसा फॉर्मेट है, जो टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज के लिए सबसे आसान फॉर्मेट है. जो फॉर्मेट सच में आपकी परीक्षा लेता है, वह सबसे पहले टेस्ट क्रिकेट है. टी20 क्रिकेट की अपनी अलग चुनौतियां हैं. ”
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेल सकते थे विराट: मांजरेकर
मांजरेकर ने कहा, “दूसरी बात यह है कि क्योंकि वह बहुत फिट है. बहुत ज्यादा फिट हैं, तो आपको और भी ज्यादा लगता है कि वह शायद फॉर्म में वापस आने के लिए अपनी लड़ाई जारी रख सकते थे. भले ही उन्हें किसी सीरीज से बाहर कर दिया जाता. वह शायद फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में जा सकते थे. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड में खेल सकते थे. भारत में और मैच खेल सकता थे और वापसी करने की कोशिश कर सकते थे.”
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कोहली का टेस्ट करियर
कोहली ने पिछले पांच सालों में टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक खराब प्रदर्शन किया. 2021 से 39 मैचों (69 पारियों) में 30.72 की औसत से 2028 रन बनाए. उसमें तीन शतक और नौ अर्धशतक शामिल हैं. गेंदबाज कोहली की ऑफ स्टंप के बाहर की कमजोरी का फायदा उठाते रहे और वह बार-बार विकेट के पीछे आउट होते रहे. अपने करियर के आखिरी पांच सालों में कोहली को सबसे ज्यादा बार स्कॉट बोलैंड ने आउट किया. उन्होंने भारतीय बल्लेबाज का विकेट पांच बार लिया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी आखिरी सीरीज में कोहली नौ पारियों में सिर्फ 190 रन बना पाए, जिसमें पर्थ में पहले टेस्ट में एक शतक शामिल था. कोहली ने 123 मैचों (210 पारियों) में 9230 रन बनाकर संन्यास लिया, जिसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं.

