
US invites Egypt and Turkey in Gaza Peace Plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू मिलकर अब मुस्लिम देशों को मोहरा बनाकर गाजा से हमास नाम का कांटा हटाने जा रहे हैं. ट्रंप ने सधी रणनीति का इस्तेमाल करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. इसकी जानकारी दोनों ही देशों ने दी है. यह बोर्ड गाजा के अस्थायी शासन की देखरेख करेगा.
तुर्की-इजिप्ट को भेजा न्योता
शनिवार को तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि उसे ट्रंप से एक पत्र मिला है. इसमें एर्दोगन को पैनल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. वहीं मिस्र के विदेश मंत्री ने इसी तरह का निमंत्रण उनके देश को मिलने की सूचना दी. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ट्रंप के निमंत्रण की समीक्षा की जा रही है.
इससे पहले व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को कहा कि उसने ट्रंप की गाजा शांति योजना को लागू करने के लिए एक कार्यकारी पैनल बनाया है. इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान शामिल हैं. यह पैनल शासन और क्षेत्रीय कूटनीति से लेकर पुनर्निर्माण वित्तपोषण और निवेश जुटाने तक के पोर्टफोलियो की देखरेख करेगा.
निमंत्रण मिलने से ब्लेयर गदगद
अपना नाम बोर्ड में शामिल किए जाने पर टोनी ब्लेयर गदगद हैं. ब्लेयर ने कहा कि गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए ट्रंप द्वारा चुने जाने पर वो सम्मानित महसूस कर रहे हैं.
अमेरिका ने कहा कि यह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा में रणनीतिक देखरेख कर अंतरराष्ट्रीय संसाधनों का समन्वय करेगा. साथ ही गाजा में संघर्ष से विकास की ओर ट्रांजिशन के दौरान जवाबदेही सुनिश्चित करेगा.
गाजा में बनी हुई है अनिश्चितता
बताते चलें कि अमेरिका ने एक ‘अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल’ (ISF) तैनात करने की भी योजना बनाई है. इस बदलाव के तहत गाजा में शासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण प्रयासों के समन्वय के लिए एक उच्च प्रतिनिधि नियुक् किया जाना है.
अमेरिका की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, हमास हथियार डालने से इनकार कर रहा है. हालांकि अक्टूबर में हुए संघर्ष विराम के बाद अब इजरायल और हमास में संघर्ष रुक गया है. इसके बावजूद छिटपुट झड़पें और हवाई हमले बीच-बीच में चल रहे हैं. जिससे स्थायी शांति की संभावना अनिश्चित बनी हुई है.
मुस्लिम देशों को मोहरा बना रहा यूएस
बताते चलें कि दोनों बोर्ड बनाए जाने के पीछे अमेरिका का घोषित मकसद गाजा में शांति स्थापना को बढ़ावा देना है. हालांकि रणनीतिकारों का कहना है कि इसके पीछे असल वजह हमास से हथियार डलवाकर हमेशा के लिए इस खतरे को कम करना है. इसके लिए वह मुस्लिम देशों को ISF में शामिल होने के न्योते भेज रहा है. पाकिस्तान इस न्योते को कबूल कर चुका है. अब इजिप्ट और तुर्किये को मिले न्योते भी इसी की अगली कड़ी हैं. देखना होगा कि ट्रंप की यह रणनीति कितनी कामयाब हो पाती है.
(एजेंसी आईएएनएस)
