Spanish PM’s reaction to Trump’s Greenland plan: ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की अमेरिकी योजना को लेकर यूरोप में घमासान मचा हुआ है. अब तक यूरोप के 8 देश खुलकर इसके खिलाफ सामने आ चुके हैं. जबकि पूरे यूरोपीय संघ में इसे लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है. अब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने भी ट्रंप की योजना पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की, तो इससे नाटो की एकता को भारी नुकसान पहुंचेगा. इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा रूस को होगा और वह इसे यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने में इस्तेमाल करेगा.

पुतिन बन जाएंगे दुनिया के सबसे खुश इंसान’

सांचेज ने यह वार्निंग स्पेनिश अखबार ला वैनगार्डिया को दिए इंटरव्यू में दी है. स्पेनिश पीएम ग्रीनलैंड पर यूएस का हमला केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं होगा. यह वैश्विक सुरक्षा संतुलन को हिला देने वाला कदम साबित होगा. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इससे यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों की नैतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी. साथ ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधा फायदा मिलेगा.

Add Zee News as a Preferred Source

सांचेज ने कहा, ‘अगर कोई देश ताकत के बल पर किसी इलाके पर कब्जा करता है, तो वह वही कर रहा होगा जिसकी वजह से रूस की आलोचना की जा रही है. ऐसा करने से पुतिन दुनिया के सबसे खुश इंसान बन जाएंगे.’ उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम नाटो की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करेगा. इससे गठबंधन के भीतर दरार पैदा हो जाएगी. 

ब्रिटेन ने भी जताया कड़ा ऐतराज

स्पेन के साथ ही ब्रिटेन भी ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना पर आपत्ति जताई है. ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है. उसका भविष्य तय करने का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क को है. नाटो सहयोगियों पर टैरिफ लगाना गलत है और हम इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाएंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पूरे नाटो की जिम्मेदारी है. इसे लेकर सभी देशों में सहयोग जरूरी है. इसके लिए किसी भी पक्ष की ओर से दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए. 

8 यूरोपीय देश खुलकर विरोध में

बताते चलें कि ट्रंप की ग्रीनलैंड हासिल करने की सनक के खिलाफ अब तक यूरोपीय यूनियन के 27 में से 8 देश खुलकर अमेरिका के खिलाफ आ चुके हैं. इन देशों ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है. उसके भविष्य का फैसला केवल वहां की जनता और डेनमार्क सरकार ही कर सकती है.

हालात तब और बिगड़ गए जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड के समर्थन में खड़े देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दे दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूरोप को अब ‘अमेरिका की मदद का बदला चुकाना होगा’. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बेहद अहम है और वे इसे पाकर रहेंगे. 

हमने यूरोपीय देशों के वर्षों तक सब्सिडी दी- ट्रंप

ट्रंप ने टूथ सोशल पर लिखा, ‘हमने डेनमार्क और यूरोपियन यूनियन के सभी देशों और दूसरों को कई वर्षों तक सब्सिडी दी है, उनसे टैरिफ या किसी और तरह का मेहनताना नहीं लिया. अब सदियों बाद डेनमार्क के लिए वापस देने का समय आ गया है. दुनिया की शांति दांव पर है. चीन और रूस ग्रीनलैंड चाहते हैं और डेनमार्क इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता. उनके पास अभी सुरक्षा के लिए दो डॉगस्लेज हैं. जिनमें से एक हाल ही में जोड़ा गया है.’

VIDEO: OMG! ‘सफेद मौत’ का झपट्टा, 10 फीट तक गहरी बर्फ में दब गया ये शहर, रास्ते बंद, इंसान अपने घरों में बना ‘कैदी’

तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए यूरोपीय संघ ने अपने सभी 27 देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई है. इस बैठक में अमेरिका के रुख और आगे की रणनीति पर चर्चा कर साझा रणनीति बनाई जाएगी. कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बन चुकी है. जहां एक ओर अमेरिका ग्रीनलैंड को रणनीतिक जरूरत बता रहा है. वहीं यूरोप इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और नाटो की एकता पर सीधा हमला मान रहा है.

क्या बिखरने जा रहा है नाटो?

ऐसे में अगर अमेरिका ने कदम पीछे नहीं खींचा, तो यह विवाद नाटो के इतिहास का सबसे बड़ा संकट बन सकता है. इसके साथ ही पश्चिमी देशों की एकता भी बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो इस बिखराव का सबसे बड़ा फायदा निश्चित रूप से रूस और चीन को होना तय है. 

(एजेंसी आईएएनएस)