
European Anti corrosion instrument: डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ग्रीनलैंड के सहयोगी देशों पर टैरिफ की धमकी से यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है. जिसके चलते फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बड़ा कदम उठा सकते हैं और यूरोपीय यूनियन से एंटी कोर्शियन इंस्ट्रूमेंट को एक्टिवेट करने की अपील कर सकते हैं. हालांकि, इस इस्तेमाल बनने के बाद कभी भी किया नहीं गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये कदम मौजूदा हालात में यूरोप के 8 देशों पर ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले को देखते हुए उठाया गया है. दरअसल, यूरोपीय यूनियन की तरफ से अपने व्यापार और निवेश हितों की सुरक्षा के लिए एंटी-कोर्शियन इंस्ट्रूमेंट नाम का एक खास कानून बनाया है, जिसको एसीआई कहते हैं. इसका असल मकसद उन हालात से निपटना होता है, जब कोई गैर-यूरोपीय देश दबाव या जबरदस्ती पर उतारू होकर यूरोपीय संघ या इसके सदस्य देशों की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करता है.
क्या है ACI?
आम भाषा में ACI को ट्रेड बाजूका भी कहा जाता है. एसीआई के तहत यूरोपीय यूनियन के पास गैर यूरोपीय देश को कड़ा जवाब देने की ताकत होती है. खासकर तब, जब कोई देश उन पर आर्थिक दबाव बनाता है, तो इसके बदले यूरोपीय यूनियन भी उसके खिलाफ कड़े प्रतिबंध के साथ आयात पर टैरिफ भी बढ़ा सकता है. इतना ही नहीं यूरोपीय यूनियन विरोधी देश से व्यापारिक रियायतें वापस लेने जैसे कदम भी उठा सकता है.
ट्रंप का टैरिफ
ट्रंप ने ग्रीनलैंड के समर्थन में खड़े यूरोप के 8 महत्वपूर्ण देशों पर 1 फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने को कहा है. इसमें फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, डेनमार्क, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड शामिल हैं. जिनपर जून के महीने में टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की बात ट्रंप ने कही है. ट्रंप ने ऐसा ग्रीनलैंड को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने वाले इरादे के चलते किया है. फ्रांस की तरफ से ट्रंप के इस फैसले को अस्वीकार्य बताते हुए इस मुद्दे को यूरोपीय यूनियन के समक्ष उठाने का फैसला किया है.
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