Iran-US Conflict: दुनिया की नजरें फिर से मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं. ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा है कि तेहरान किसी भी कीमत पर अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा. चाहे इसके बदले युद्ध ही क्यों न थोप दिया जाए. अराघची ने कहा, “कोई भी ताकत हमें यह नहीं बता सकती कि हमें क्या करना चाहिए .हमारी आज़ादी और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होगा.”

ओमान में बातचीत, लेकिन भरोसे की कमी
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका कई वर्षों बाद ओमान में बातचीत की मेज पर लौटे हैं. इन वार्ताओं से ईरान को उम्मीद है कि उस पर लगे कठोर आर्थिक प्रतिबंधों में कुछ राहत मिल सकती है, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी पाबंदियां चाहता है. हालांकि अराघची ने अमेरिका की मंशा पर गंभीर संदेह जताया. उन्होंने कहा कि एक तरफ बातचीत की बात होती है और दूसरी तरफ नए प्रतिबंध और सैन्य दबाव बनाए जाते हैं, जिससे भरोसा कमजोर होता है. उन्होंने साफ कहा. ईरान को अमेरिका पर भरोसा कम है. वो पूछ रहे हैं कि क्या वॉशिंगटन सच में डिप्लोमेसी चाहता है या सिर्फ दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है?

अमेरिकी सैन्य ताकत से नहीं डरता ईरान
ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln की मौजूदगी को लेकर भी तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा, “उनका सैन्य जमावड़ा हमें डराने के लिए है, लेकिन ईरान इससे डरने वाला नहीं है.” उनका साफ कहना था कि ईरान कोई ऐसा समझौता स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए. 

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परमाणु बम पर ईरान का जवाब
पश्चिमी देश और इज़रायल लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते रहे हैं. इस पर अराघची ने कहा, “वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम किसी बम की तलाश में नहीं हैं. हमारी असली ताकत बड़ी शक्तियों को ‘ना’ कहने की हिम्मत है.”

ट्रंप का दबाव और नए प्रतिबंध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को “काफी अच्छी” बताया, लेकिन इसके तुरंत बाद ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर नए टैरिफ लगाने का आदेश भी जारी कर दिया. साथ ही ईरानी तेल निर्यात से जुड़ी कई शिपिंग कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए. ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिका के हर कदम पर नजर रख रहा है और आगे की बातचीत का फैसला वॉशिंगटन के व्यवहार को देखकर करेगा.

ईरान में हालात और गंभीर
इन वार्ताओं के बीच ईरान के अंदर हालात भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के चलते हुए प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं. इसने पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है. दिसंबर के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में आर्थिक मुश्किलों और राजनीतिक गुस्से के चलते हिंसा हुई. ईरानी सरकार के मुताबिक 3,117 लोग मारे गए, ज्यादातर सिक्योरिटी फोर्सेस और बायस्टैंडर्स. लेकिन अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) का दावा है कि मौतें 7,000 के करीब हैं, ज्यादातर प्रदर्शनकारी. हजारों गिरफ्तारियां भी हुईं.