मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव
प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 2:21PM by PIB Delhi
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्यपालन विभाग ने तटीय समुदायों के विकास के महत्व को पहचानते हुए सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तटरेखा के निकट स्थित 100 तटीय मछुआरा गांवों को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत एक परिवर्तनकारी पहल की है। जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव [क्लाईमेट रेसीलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस (CRCFV)] का उद्देश्य आर्थिक रूप से जीवंत और पारिस्थितिक रूप से सतत मछुआरा गांव बनाना है। CRCFV के अंतर्गत, PMMSY के तहत 100% केंद्रीय वित्त पोषण के साथ परियोजना कार्यान्वयन, आवश्यक मात्स्यिकी से संबंधित सुविधाओं के विकास के लिए प्रति गांव 2 करोड़ रुपए की इकाई लागत पर किया जाता है और CRCFV के लिए दिशानिर्देश 12 फरवरी, 2024 को जारी किए गए हैं।
क्लाईमेट रेसीलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस (CRCFV) कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य मात्स्यिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करके, जलवायु परिवर्तनों से जूझने की शक्ति को बढ़ावा देकर, सुरक्षा और संरक्षा बढ़ाकर, पर्यटन को बढ़ावा देकर, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाकर और तटीय गांवों में जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करके तटीय मछुआरों के लिए स्थायी आर्थिक एवं आजीविका के अवसर पैदा करना है। CRCFV पहल के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियाँ आवश्यक मात्स्यिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत आजीविका के अवसर पैदा करने पर केंद्रित हैं। इनमें फिश ड्राइंग यार्ड, प्रसंस्करण केंद्र, फिश मार्केट, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, फिशिंग जेट्टी और तट संरक्षण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम समुद्री शैवाल कृषि, आर्टिफ़िश्यल रीफ़्स और ग्रीन फ्युल के उपयोग जैसे जलवायु-अनुकूल मात्स्यिकी को बढ़ावा देता है। तटीय मछुआरा समुदायों की भलाई के लिए सुरक्षा उपायों, आर्थिक गतिविधियों, प्रशिक्षण और सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी प्राथमिकता दी जाती है।
समुद्र तट से गांवों की निकटता (0-5 किमी, 0-10 किमी और 0-20 किमी), मछुआरों की जनसंख्या घनत्व, मत्स्यन नौकाओं की संख्या, फिश लैंडिंग और मात्स्यिकी से संबंधित गतिविधियों के आधार पर गांवों की पहचान की गई है। उच्च मछुआरा आबादी वाले गांवों एवं क्लाईमेट रेसीलीएंस और आर्थिक जीवंतता के लिए NICRA योजना से ताल मेल रखने वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाती है। CRCFV के रूप में विकास के लिए पहचाने गए 100 गांवों की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार सूची, जिसमें कर्नाटक में 5 और आंध्र प्रदेश में 15 गांव शामिल हैं, अनुबंध में प्रदान की गई है।
(घ) से (ड़): जी, हाँ। मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने CRCFV के तहत कर्नाटक सरकार के परामर्श से कर्नाटक के पांच गांवों, अर्थात् उप्पुंडा मडिकल, कोटेश्वर, कडवूर, बैलूरु और मट्टादहितलू की पहचान की है। मात्स्यिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, सतत आजीविका के अवसरों और जलवायु अनुकूल उपायों के संदर्भ में पांच गांवों के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत DPR के आधार पर गतिविधियों को मंजूरी दी गई थी, जिसमें बहुउद्देशीय मात्स्यिकी केंद्र का निर्माण, तट संरक्षण कार्य, सौर आधारित प्रकाश व्यवस्था के प्रावधान के साथ फिश मार्केट का नवीनीकरण, फिश मार्केट के बाहर सौर आधारित हाई मास्ट लाइट, सामान्य मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र और नेट मेंडिंग यार्ड का निर्माण, समुद्री ग्रेड हाई मास्ट लाइट की स्थापना, आपातकालीन बचाव सुविधाएं-बीकन लाइट और लाइफ बॉइज, सौर आधारित फिश ड्रायर, फिश वेंडिंग कियोस्क, फेस चेंज मटेरियल (PCM) आधारित मत्स्य संरक्षण बॉक्स, इंसुलेटेड वाहन, बाइवाल्व कृषि को प्रोत्साहन और अन्य आवश्यकता आधारित मात्स्यिकी हस्तक्षेप शामिल हैं।
(च) से (छ): जी, हाँ। मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ परामर्श करके आंध्र प्रदेश के 15 गांवों की पहचान की है, जिसमें अनकापल्ली जिले के पयाकरोपेटा मंडल में पेंटाकोटा भी शामिल है। सहायता प्राप्त गतिविधियों में फिश ड्राइंग प्लेटफॉर्म, बहुउद्देशीय मात्स्यिकी केंद्र, सामान्य मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र, हाई-मास्ट सौर लाइट, कलर GPS हैंडसेट, प्राथमिक चिकित्सा किट, जीवन रक्षक उपकरण और 200 लीटर क्षमता वाले पोर्टेबल आइसबॉक्स शामिल हैं। वर्तमान में, CRCFV कवरेज हेतु पहले से ही पहचाने गए 100 गांवों के अतिरिक्त विस्तार करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
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अनुबंध
“जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव” के संबंध में उल्लिखित विवरण:.
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क्र. सं. |
तटीय गांवों का नाम |
क्र. सं. |
तटीय गांवों का नाम |
क्र. सं. |
तटीय गांवों का नाम |
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|
गुजरात |
महाराष्ट्र |
तमिलनाडु |
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|
1 |
सचाना |
1 |
केलवा |
1 |
पसियावरम |
|||
|
2 |
नवी बंदर |
2 |
अर्नाला |
2 |
सेनजियाम्मन नगर |
|||
|
3 |
माधवाड़ |
3 |
रणगांव |
3 |
थारुवैकुलम |
|||
|
4 |
मुल्द्वारका |
4 |
गोराई ताल |
4 |
परमणकेनी |
|||
|
5 |
भट्ट (मेंढर) |
5 |
नंदगांव |
5 |
मांडवई पुधुकुप्पम |
|||
|
6 |
जोडिया |
6 |
कोरलाई |
6 |
सी. पुथुपेट्टई |
|||
|
7 |
नाना लेजा |
7 |
भरदखोल |
7 |
पुथुपेट्टई |
|||
|
8 |
चोरवाड़ |
8 |
श्रीवर्धन |
8 |
अर्कोट्टुदुरई |
|||
|
गोवा |
9 |
वरवडे |
9 |
पुथुपट्टियम |
||||
|
1 |
काक्रा, तिस्वाड़ी |
10 |
कालबादेवी |
10 |
कुमारपनवयाल |
|||
|
2 |
अरम्बोल |
11 |
जयगढ़ |
11 |
सोलियाकुडी |
|||
|
पुदुच्चेरी |
12 |
निवती |
12 |
कुमारपनवयाल |
||||
|
1 |
नरमबाई |
13 |
रेडी |
13 |
वीरपांडियन पट्टिनम |
|||
|
2 |
पट्टिनाचेरी |
14 |
टोंडावल्ली |
14 |
इदिन्थाकारई |
|||
|
दमन और दीव |
15 |
सरजेकोट |
15 |
अरोकियापुरम |
||||
|
1 |
बुचारवाड़ा |
16 |
एरयुमंथुराई |
|||||
|
उड़ीसा |
कर्नाटक |
आंध्र प्रदेश |
||||||
|
1 |
पखराबाद |
1 |
उप्पुंडा मेडिकल |
1 |
पेदागंगल्लवनिपेटा |
|||
|
2 |
सनाधनाडी |
2 |
कोटेश्वर |
2 |
देवुनलताडा |
|||
|
3 |
मझिसाही |
3 |
कोडावूर |
3 |
इड्डीवानीपालेम |
|||
|
4 |
कीर्तनी |
4 |
बैलूर |
4 |
पथिवाड़ा बार्रिपेटा |
|||
|
5 |
जंभीराय |
5 |
मटाडाहित्लु |
5 |
पेड्डा उप्पाडा |
|||
|
6 |
अमरनगर |
केरल |
6 |
पेंटाकोटा |
||||
|
7 |
चूड़ामणि |
1 |
एराविपुरम |
7 |
कोनापापापेटा |
|||
|
8 |
जंबू |
2 |
थोट्टापल्ली |
8 |
सोरलगोंधी |
|||
|
9 |
खरनासी |
3 |
पल्लम |
9 |
गुल्लालामोडा |
|||
|
10 |
तलाचुआ |
4 |
अझीकल |
10 |
अडवी पंचायत |
|||
|
11 |
नोलियासाही |
5 |
नजरक्कल |
11 |
गोंदीसमुद्रम |
|||
|
6 |
एडवनक्कडू |
12 |
पालीपालेम |
|||||
|
12 |
सना नलियानुगांव |
लक्षद्वीप |
13 |
ताडिचेतलापालेम |
||||
|
13 |
न्यू बॉक्सिपल्ली |
1 |
चेतलाथ द्वीप |
14 |
एदुरूपालेम |
|||
|
14 |
पटिसनपुर |
2 |
मिनिकॉय द्वीप |
15 |
थुपिलीपालेम |
|||
|
15 |
सहान |
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह |
पश्चिम बंगाल |
|||||
|
16 |
नोलियासाही |
1 |
दुर्गापुर |
1 |
अक्षयनगर |
|||
|
17 |
पेंथकाटा |
2 |
चिड़िया टापू |
2 |
मदनगंज |
|||
|
18 |
अरखाकुडा |
3 |
जंगलीघाट |
3 |
डेरा |
|||
|
4 |
होपटाउन |
4 |
दक्षिण कडुआ |
|||||
|
5 |
शोल बे |
5 |
तामलीपोरिया – पुरबा मुकुंदपुर (माँ नायकाली मत्स्य खोती) |
|||||
यह जानकारी आज लोकसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ,भारत सरकार श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रश्न के उत्तर में दी।
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J P
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