Mohammad Yunus: बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान होंगे, तारिक रहमान आज शपथ लेंगे, इससे पहले अपने विदाई भाषण के दौरान अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस ने कुछ ऐसा कहा जिसकी चर्चा हो रही है. विदाई स्पीच में उन्होंने ‘7 सिस्टर’ का राग अलापा. उन्होंने बिना नाम लिए बिना कहा बांग्लादेश ने विदेश नीति में अपनी सॉवरेनिटी, सम्मान और आजादी वापस पा ली है और अब वह दूसरों के निर्देशों से गाइड नहीं होता. उनका ये बयान ऐसे समय पर आया है जब तारिक रहमान ने कहा है कि हम भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाएंगे. 

सेवन सिस्टर्स का किया जिक्र
अपने विदाई भाषण में यूनुस ने नेपाल, भूटान और बिना नाम लिए सेवन सिस्टर्स का राग अलापते हुए भविष्य के आर्थिक एकीकरण की बात की. उन्होंने कहा कि हमारे खुले समुद्र सिर्फ बॉर्डर नहीं हैं, वे ग्लोबल इकॉनमी के गेटवे हैं. नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ, इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा आर्थिक क्षमता है. इकॉनमिक जोन, ट्रेड एग्रीमेंट और ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस हमें एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित कर सकते हैं. उनके मुताबिक यह देश के विकास के अगले चरण में बेहतर कनेक्टिविटी केंद्रीय भूमिका निभाएगी.

अमेरिका-जापान के रिश्तों पर दिया जोर
उनकी बातों से बांग्लादेश के पोर्ट और समुद्री पहुंच पर केंद्रित एक रीजनल इकोनॉमिक स्पेस का सुझाव मिला, जिससे ढाका न सिर्फ पड़ोसी देशों के लिए बल्कि भारत के जमीन से घिरे नॉर्थ-ईस्ट के लिए भी एक गेटवे के तौर पर सामने आया. उनकी इस सोच से सवाल भी खड़ा होता है. अगर हम भारत की बात करें तो भारत ने अपने नॉर्थ-ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों के साथ जोड़ने के लिए बांग्लादेश के जरिए कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में भारी इन्वेस्ट किया है. ऐसे में यूनुस के भाषण ने उस बात को पलटने की कोशिश की, जिसका मतलब था कि इस इलाके के लिए पहुंच और मौके सिर्फ भारतीय प्लानिंग के बजाय बांग्लादेश के स्ट्रेटेजिक फैसलों पर ज्यादा निर्भर करेंगे. उन्होंने अपने बयान में चीन, जापान, अमेरिका और यूरोप के साथ गहरे होते रिश्तों पर जोर दिया.

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चीन के प्रोजेक्टस का किया जिक्र
यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश ने “किसी भी हमले का मुकाबला करने” के लिए अपनी सेना को मजबूत करना शुरू कर दिया है, यह बात भले ही साफ न हो, लेकिन जब उनकी सॉवरेनिटी की बड़ी कहानी के साथ रखी जाती है तो यह साफ तौर पर सख्त लगती है. उन्होंने अपनी स्पीच में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर एक बार भी बात नहीं की. उनकी स्पीच में ये साफ तौर पर दिखा कि उनका रवैया भारत विरोधी है. उन्होंने चीन के सपोर्ट वाले प्रोजेक्ट्स में हुई प्रोग्रेस का जिक्र किया, जिसमें तीस्ता नदी पहल भी शामिल है, जो भारत के स्ट्रेटेजिक रूप से सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है, ऐसे प्रोजेक्ट्स को भारत ने पहले भी सावधानी से देखा है.

क्या है सेवन सिस्टर्स
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को सेवन सिस्टर्स कहा जाता है. इसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्य ‘सात बहनें’ के रूप में शामिल. सात बहनों का जिक्र पहली बार 1972 में एक रेडियो टॉक शो के दौरान किया था. यह नामकरण भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को भारतीय संघ के भीतर अलग-अलग संस्थाओं के रूप में औपचारिक मान्यता दिए जाने के साथ हुआ था. से राज्य भारत के लिए भी बेहद खास हैं. सेवन सिस्टर्स की सीमाएं चार अंतरराष्ट्रीय देशों से लगती हैं, जिसमें चीन (उत्तर), भूटान (पश्चिम), बांग्लादेश (दक्षिण-पश्चिम) और म्यांमार (पूर्व) है.