मध्य पूर्व में तनाव अब आसमान छू रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लगातार दबाव बना रहे हैं, और अब उनके इजराइल में राजदूत माइक हकाबी ने तेहरान को सीधी लाइन खींच दी है. हकाबी ने इजराइली टीवी चैनल 12 से बातचीत में कहा कि ट्रंप जो बोलते हैं, वो करते हैं. ये कोई मजाक या खोखली धमकी नहीं है. ईरान के लोग जो रेगिम के खिलाफ सड़कों पर जान जोखिम में डालकर विरोध कर रहे हैं, ट्रंप उन्हें निराश नहीं करेंगे.

ट्रंप के वादों पर पूरा भरोसा
द टाइम्स ऑफ इजराइल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, हकाबी ने चैनल 12 को इंटरव्यू में हकाबी ने अपनी बात कही है.हकाबी ने साफ कहा, “ये ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने ढेर सारे वादे किए और मुश्किल से कोई ऐसा मिलेगा जो उन्होंने पूरा न किया हो.” उन्होंने आगे जोड़ा, “ट्रंप खाली धमकियां नहीं देते. ईरान के लोगों से कहूंगा कि राष्ट्रपति जो कहते हैं, उसे गंभीरता से लो, उनके शब्दों पर यकीन करो. वो अपना वादा निभाएंगे.”

ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ हफ्तों से जारी हैं. लोग रेगिम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, और ट्रंप ने खुले तौर पर उनका साथ देने की बात कही है. हकाबी का मानना है कि ट्रंप इन लोगों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, क्योंकि वो हमेशा वादों पर खरे उतरे हैं.

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2025 का हमला याद दिलाया, इस बार बड़ा तांडव?
हकाबी ने सबसे बड़ा संकेत दिया कि अगर तेहरान ट्रंप के साथ कोई डील नहीं करता, तो हालात जून 2025 से भी बदतर हो सकते हैं. उस वक्त अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ चलाया था, जिसमें B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स और टॉमहॉक मिसाइलों से ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं – फोर्डो, नतांज और इस्फहान – पर हमला किया गया. GBU-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बॉम्ब्स से ये साइट्स बुरी तरह तबाह हुईं. हकाबी ने कहा, “ट्रंप हमेशा सबसे अच्छा नतीजा चाहते हैं. वो ‘द आर्ट ऑफ द डील’ के मास्टर हैं. अगर डील हो गई तो अच्छा, वरना वो वो करने से नहीं डरते जो उन्होंने पिछले साल साबित किया.” लेकिन उन्होंने ये भी क्लियर किया कि अभी अमेरिका ने हमले का कोई फाइनल फैसला नहीं लिया है. ट्रंप डिप्लोमेसी को तरजीह दे रहे हैं, ताकि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़े और इजराइल-अमेरिका को धमकाना बंद करे.

ईरान की तरफ से क्या?
ईरान अभी तक इन बयानों को ‘मीडिया वॉर’ बता रहा है. लेकिन USS अब्राहम लिंकन जैसे जहाज फारस की खाड़ी में तैनात हैं, और अमेरिकी ड्रोन सर्वे कर रहे हैं. अगर बात नहीं बनी तो बड़ा संघर्ष हो सकता है. हकाबी ने कहा कि ट्रंप डबल-क्रॉस बर्दाश्त नहीं करते. ईरान को अब समझना होगा कि ये खेल खतरे का है. दुनिया की नजरें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं. ईरान के विरोधी अगर सफल हुए तो मिडिल ईस्ट की सियासत पूरी बदल सकती है. लेकिन अगर नहीं, तो 2025 से कहीं ज्यादा बड़ा तांडव देखने को मिल सकता है.