EU Tariffs On US: पूरा मामला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों और ग्रीनलैंड को लेकर बढ़े तनाव से जुड़ा है. यह फैसला ऐसे वक्त में चर्चा में है जब अगले हफ्ते दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान यूरोपीय नेताओं और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अहम बैठकें होने वाली हैं. 

ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ा अमेरिका-यूरोप तनाव
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय यूनियन अमेरिका के खिलाफ करीब 93 अरब यूरो यानी लगभग 107.6 अरब डॉलर के टैरिफ लगाने के बारे में सोच रहा है. इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय बाजार में काम करने से रोकने या लिमिटेड करने के विकल्प भी टेबल पर है. यह सब अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते विवाद के बाद सामने आया है.

बता दें कि रिपोर्ट में कहा गया है, EU ने यह टैरिफ लिस्ट पिछले साल ही तैयार कर ली थी. ट्रेड वॉर से बचने के लिए इसे 6 फरवरी तक रोक कर रखा गया था. अब हालात बदलने के बाद रविवार को EU के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने इस लिस्ट को फिर से लागू करने पर चर्चा की है.

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अमेरिकी कंपनियों पर भी लग सकती रोक
सिर्फ टैरिफ ही नहीं EU एक खास कानून ‘एंटी-कोएरशन इंस्ट्रूमेंट’ का इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रहा है. इसके तहत अमेरिकी कंपनियों की यूरोप के बाजार में पहुंच को लिमिटेड किया जा सकता है. इससे अमेरिका पर सीधा आर्थिक दबाव पड़ेगा.

8 देशों ने दिखाया डेनमार्क के साथ समर्थन
अमेरिका जिन 8 देशों पर टैरिफ लगाने की बात कर रहा है उनमें डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं. इन सभी देशों ने रविवार को एक साझा बयान जारी किया है. उस बयान में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ पूरी एकजुटता दिखाने की बात कही है.

ट्रंप की टैरिफ चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका 1 फरवरी से इन 8 देशों से आने वाले सामान पर 10 फीसदी टैरिफ लगाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले 1 जून से इस टैरिफ को बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि जब तक ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता, तब तक यह टैरिफ ऐसे ही रहेगा.

दावोस में हो सकती बातचीत
राष्ट्रपति ट्रंप इस हफ्ते बुधवार और गुरुवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने वाले हैं. इस दौरान उनकी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समेत कई यूरोपीय नेताओं से निजी मुलाकात होने के कयास लगाए जा रहे हैं. इसके साथ ही वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों की बैठक में भी हिस्सा ले सकते हैं. अब ध्यान देने वाली बात ये हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और यूरोप के रिश्तों पर पूरी दुनिया की नजर टिकी रहेगी.

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