China threaten Panama for port deal: पनामा नहर इंसानों की बनाई हुई सबसे फायदेमंद चीजों में से एक मानी जाती है. इस नहर के बनने से न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को के बीच की दूरी लगभग 8,000 मील कम हो गई थी. इस इलाके से हजारों जहाजें आर-पार होती हैं. उसी नहर पर 2 पोर्ट हैं जिसे हांगकांग की कंपनी सीके हचिसन चलाने का काम करती है. हाल ही के रिपोर्ट में सामने आया है कि कंपनी के साथ पोर्ट के संचालन करने की डील को पनामा देश ने कैंसल कर दिया है. 

  1. चीन के लिए क्यों हैं ये पोर्ट्स जरूरी? 
  2. फैसले से क्यों खुश है अमेरिका?

जिसके बाद चाइना भड़क गया है. इतना ही नहीं चीन ने पनामा देश को धमकी भी दे डाली है. ड्रैगन ने कहा कि अगर पनामा ने डील रद्द की तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. इस पोर्ट को सीके हचिसन कंपनी 1990 से चला रही है. चीन ने इस कंपनी में बढ़-चढ़ कर निवेश किया था. हांगकांग और मकाऊ मामलों की कार्यालय ने इस असंभव फैसला बताया है, कहा है कि वो चीनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेंगे.

चीन के लिए क्यों हैं ये पोर्ट्स जरूरी? 
अमेरिका और चीन के बढ़ते बवाल के बीच अमेरिका के लिए ये एक अच्छा फैसला साबित हो सकता है. माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद वहां के अधिकतर पोर्ट्स पर अमेरिका का कब्जा हो सकता है. पनामा कोर्ट का कहना है कि उन दोनों पोर्ट पर संवैधानिक उल्लंघनों और सार्वजनिक हित के कारण ये फैसला लिया जा रहा है. इसके कारण हचिसन की 23 अरब डॉलर की दुनिया भर में पोर्ट्स बेचने की योजना खतरे में पड़ गई है. इस योजना के तहत कंपनी 23 देशों में 43 पोर्ट्स बेचने वाली थी, जिनमें पनामा नहर के दो पोर्ट्स भी शामिल थे.

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चीन ने कहा कि ये निर्णय फैक्ट की अनदेखी करता है और हांगकांग के व्यवसायों के अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है. हांगकांग और मकाऊ कार्यालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि चीन के पास पर्याप्त साधन, शक्ति और क्षमता है कि वह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार व्यवस्था में न्याय और संतुलन बनाए रख सके. अगर पनामा अपने रास्ते पर अड़ा रहा, तो उसे राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

फैसले से क्यों खुश है अमेरिका?
अमेरिका ने इस निर्णय का स्वागत किया है. अमेरिकी हाउस सिलेक्ट कमेटी ऑन चाइना के अध्यक्ष जॉन मूलेनार ने कहा कि यह अमेरिका के लिए जीत है. जबकि चीन ने किसी देश का नाम नहीं लिया, उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने बल प्रयोग और धमकी देकर अन्य देशों को अपनी मर्जी मानने पर मजबूर किया है. पनामा ने उनके दबाव में आकर ये कदम उठाया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पहले इस 23 अरब डॉलर की पोर्ट बिक्री का स्वागत किया था और कहा था कि अमेरिका को पनामा नहर पर कंट्रोल फिर से लेना चाहिए.

सीके हचिसन की सहायक कंपनी ने कहा कि अदालत का यह निर्णय वैध कानूनी ढांचे के खिलाफ है, जिसके तहत उन्हें पोर्ट्स का संचालन करने की अनुमति थी. पनामा का यह कदम न केवल कंपनी की व्यापार योजनाओं पर असर डाल रहा है बल्कि वैश्विक व्यापार और निवेश के भरोसे पर भी सवाल उठा रहा है. इस विवाद ने चीन-अमेरिका व्यापारिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अस्थिरता की चेतावनी भी दी है.

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