
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं तथा व्यावसायिक सेवाओं के नेतृत्व में वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सेवा निर्यात बढ़कर 421.3 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुँचा
सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों और व्यापार संवर्धन पहलों के माध्यम से भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए वैश्विक बाजार पहुंच का विस्तार किया है
प्रविष्टि तिथि: 24 JUL 2026 3:55PM by PIB Delhi
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पिछले पाँच वर्षों के दौरान भारत के सेवा निर्यात की प्रवृत्ति तथा इस वृद्धि को गति देने वाले प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:
क्षेत्र | 2021- 22 | 2022- 23 | 2023- 24 | 2024- 25 | 2025- 26 | कुल सेवा निर्यात में हिस्सेदारी |
(1) | (2) | (3) | (4) | (5) | (वित्त वर्ष 26) | |
कुल सेवाएँ | 254.5 | 325.3 | 341.1 | 387.5 | 421.3 | 100.0% |
सेवा निर्यात में प्रमुख योगदान देने वाले उप-क्षेत्र | ||||||
दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाएं | 125.6 | 152.3 | 163.6 | 183.3 | 206.6 | 49.03% |
व्यापार सेवाएं | 58.9 | 80.3 | 88.6 | 107.2 | 124.2 | 29.5% |
स्रोत: आरबीआई
सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार एक बहुआयामी रणनीति का पालन करती है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- निर्यात बढ़ाने के लिए विशिष्ट बाजारों और क्षेत्रों को लक्षित करके रणनीतियां अपनाई जाती हैं।
- सेवा निर्यात में बाधा उत्पन्न करने वाली घरेलू क्षेत्रीय चुनौतियों की पहचान हितधारकों के परामर्श से की जाती है और संबंधित विभागों/मंत्रालयों के माध्यम से उनका समाधान किया जाता है।
- मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से
- सरकार ने विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से सेवा क्षेत्र में व्यापक बाजार पहुँच और राष्ट्रीय उपचार सुनिश्चित किया है, ताकि भारतीय सेवा प्रदाता सीमा-पार (डिजिटल माध्यम सहित), एफटीए भागीदार देश में वाणिज्यिक उपस्थिति तथा पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही जैसे विभिन्न माध्यमों से प्रमुख क्षेत्रों में कम अनुकूल नहीं बल्कि समान शर्तों पर सेवाएँ प्रदान कर सकें। भारत के हालिया एफटीए में घरेलू विनियमन पर नियम शामिल किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रमुख सेवाओं के लिए प्राधिकरण प्रक्रियाएं समयबद्ध, पूर्वानुमानित, वस्तुनिष्ठ, निष्पक्ष और पारदर्शी हों। इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारतीय सेवा आपूर्तिकर्ताओं को भागीदार देशों में अपारदर्शी, अप्रत्याशित या बोझिल नियामक प्रक्रियाओं के कारण चुनौतियों का सामना न करना पड़े। एफटीए के माध्यम से, भारत संरचित, त्वरित मार्ग प्राप्त करने में सक्षम रहा है जो कुशल भारतीय पेशेवरों की विदेशी बाजारों में सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्थायी आवाजाही को सुगम बनाएगा।
- संबंधित पेशेवर निकायों के बीच पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) पर समयबद्ध वार्ता के लिए सुविधाजनक प्रावधान किए गए हैं, ताकि पेशेवर योग्यताओं की मान्यता तथा उनसे संबंधित लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को सुगम बनाया जा सके। ऐसे पारस्परिक मान्यता समझौतों (एमआरए) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भागीदार देश एक-दूसरे के प्रमाणपत्रों को मान्यता दें, जिससे पेशेवरों को कार्य करने से पहले दोबारा स्थानीय परीक्षा, अतिरिक्त प्रशिक्षण या लंबी पुनः-प्रमाणीकरण प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़े।
• कुछ अन्य लाभकारी प्रावधान नीचे दिए गए हैं:-
- भारत ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में छात्रों के लिए सहायक ढांचा हासिल कर लिया है।
- हाल के एफटीए में सामाजिक सुरक्षा समझौतों (एसएसए) से संबंधित सहायक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि सामाजिक सुरक्षा अंशदान का दोहरा भुगतान न करना पड़े तथा सामाजिक सुरक्षा संरक्षण की निरंतरता बनी रहे। ऐसे प्रावधान भारत–ओमान सीईपीए, भारत–न्यूज़ीलैंड एफटीए में एसएसए संबंधी साइड लेटर, भारत–यूके सीईटीए में डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन तथा भारत–ईयू एफटीए में शामिल किए गए हैं। भारत–ब्रिटेन सीईटीए के तहत हुए समझौते के आधार पर, सामाजिक सुरक्षा अंशदान पर एक समझौता 10 फरवरी, 2026 को हस्ताक्षरित किया गया था। यह समझौता सुनिश्चित करेगा कि श्रमिकों को एक–दूसरे के क्षेत्र में अस्थायी रूप से काम करने पर अपनी सामाजिक सुरक्षा के लिए दोहरा अंशदान नहीं देना होगा।
- परंपरागत चिकित्सा: ओमान और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों में इसके लिए विशेष प्रावधान/अनुलग्नक निर्धारित किए गए हैं।
- भारत–ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए में दोहरे कराधान से संबंधित प्रावधानों पर बातचीत हुई, जिससे भारत की आईटी सेवाओं पर दोहरे कराधान को समाप्त करने की प्रतिबद्धताएं हासिल हुईं।
- योजनाओं के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा देना, और अंतर्राष्ट्रीय मेलों/प्रदर्शनियों में भाग लेना और उनका आयोजन करना।
वाणिज्य विभाग द्वारा स्थापित एसईपीसी, सेवा व्यापार संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और प्रमुख सेवा क्षेत्रों में बाजार विकास, व्यापार सुगमता, नीतिगत वकालत, क्षमता निर्माण, क्रेता–विक्रेता सहभागिता, अंतर्राष्ट्रीय संपर्क और निर्यात संवर्धन गतिविधियों का संचालन करता है। भारत सरकार के निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत वित्तीय सहायता के माध्यम से उन्हें इसमें सहयोग प्राप्त होता है। एसईपीसी द्वारा हाल ही में की गई कुछ गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
- 4–5 अप्रैल 2025 को तमिलनाडु सरकार के सहयोग से मेडिकल वैल्यू टूरिज्म (एमवीटी) शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया, जिसमें तमिलनाडु के अस्पतालों, वेलनेस केंद्रों, आयुष केंद्रों तथा चिकित्सा संस्थानों ने भाग लिया।
- संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के सहयोग से भारतीय मंडप (इंडियन पवेलियन) स्थापित किए गए, जिनमें शामिल हैं— 28 अप्रैल से 1 मई 2025 तक दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, दुबई में आयोजित अरेबियन ट्रैवल मार्केट (एटीएम) 2025; 30 अप्रैल से 2 मई 2025 तक दुबई इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एग्जीबिशन सेंटर, यूएई में आयोजित ग्लोबल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग एग्जीबिशन (गेटेक्स); 13 से 16 अक्टूबर 2025 तक पेरिस, फ्रांस में “वेव्स बाज़ार” विषय पर आयोजित एमआईपीकॉम 2025; 7 से 9 अक्टूबर 2025 तक कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित मलेशिया हेल्थ एंड फार्मा एक्सपो; 24 से 26 सितंबर 2025 तक टोक्यो, जापान में आयोजित टोक्यो गेम्स शो; तथा 20 से 24 अगस्त 2025 तक कोलोन, जर्मनी में आयोजित गेम्सकॉम 2025, जहाँ गेमिंग एवं मनोरंजन क्षेत्र में भारतीय कंपनियों की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
- 29 अगस्त 2025 को ‘फ्यूचर-रेडी लॉजिस्टिक्स इन इंडिया’; 19 सितंबर 2025 को ‘विकसित भारत@2047 के लिए उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास में परिवर्तन’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन तथा ‘एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2025’; 5 दिसंबर 2025 को ‘रेगुलेशन, इनोवेशन, ग्लोबलाइजेशन– बिल्डिंग इंडियाज़ लीगल–फिनटेक एज’ विषय पर ‘फिनोलीगल कन्वर्जेंस समिट 2025’; तथा 13 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में ‘स्किल्ड इंडिया के लिए भविष्य-तैयार शिक्षार्थियों के निर्माण’ विषय पर ‘स्कूल शिक्षा पर राष्ट्रीय संवाद’ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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