अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हाल ही में फ्लोरिडा में मुलाकात की. इसी बीच ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि नेतन्याहू की भ्रष्टाचार के मामलों में माफी ‘रास्ते में है’. ट्रंप का यह बयान अपने आप में बड़ा है लेकिन दिलचस्प मोड़ तब आया जब ट्रंप के इस दावे को इजरायल के राष्ट्रपति कार्यालय ने तुरंत खारिज कर दिया. 

ट्रंप के दावे पर उठे सवाल

ट्रंप ने नेतन्याहू को ‘युद्धकालीन प्रधानमंत्री’ और ‘हीरो’ बताते हुए माफी को नैतिक रूप से जायज ठहराने की कोशिश की. यह तर्क भावनात्मक है लेकिन कानूनी नहीं. ट्रंप का दावा सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि राजनीति, कूटनीति और न्यायिक स्वतंत्रता के टकराव की बड़ी मिसाल है. इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के दफ्तर ने तुरंत ट्रंप के दावे को खारिज करने से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या ट्रंप ने जानबूझकर दबाव बनाने की कोशिश की या फिर उन्होंने अधूरी जानकारी के आधार पर सार्वजनिक बयान दे दिया.

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नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोप

इजरायल में राष्ट्रपति को माफी देने का हक जरूर है, लेकिन चल रहे ट्रायल के दौरान माफी देने की कोई मिसाल पहले देखने को नहीं मिलती है. नेतन्याहू पर 2019 से रिश्वत, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप हैं. ऐसे मामलों में माफी का मतलब होगा कि न्यायिक प्रक्रिया को बीच में रोक देना, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सीधा प्रभाव डाल सकता है.

विदेशी नेता न्यायिक व्यवस्था को आदेश नहीं दे सकता

इजरायली राष्ट्रपति कार्यालय का खंडन इजरायल के संवैधानिक संतुलन को जिंदा करता है. यह पैगाम साफ है कि किसी भी विदेशी नेता का समर्थन इजरायल की न्यायिक व्यवस्था को कोई आदेश नहीं दे सकता, भले वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ही क्यों न हों. राष्ट्रपति दफ्तर ने यह भी साफ किया कि माफी पर कोई भी फैसला मानक कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा.

ट्रंप के बयान क्या है मतलब?

दूसरी तरफ नेतन्याहू का तर्क है कि अदालत में बार-बार पेशी से उनके प्रशासनिक कर्तव्यों पर असर पड़ता है और माफी राष्ट्रीय हित में होगी. यह दलील सियासी तौर पर समझी जा सकती है, लेकिन इससे यह खतरा भी पैदा होता है कि भविष्य में सत्ता में बैठे नेता कानून से ऊपर दिखने लगें. ट्रंप का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े करता है. क्या यह अमेरिका-इजरायल रिश्तों में निजी नजदीकी का प्रदर्शन है या फिर घरेलू और वैश्विक राजनीति में एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश? हकीकत यह है कि इस बयान ने नेतन्याहू को कानूनी राहत से ज्यादा राजनीतिक बहस दी है.