
The Hindi meaning of First Alo: बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक दंगों की दौर से गुजर रहा है. राजधानी ढाका में हाल ही में हुई हिंसा ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा, जब गुस्साई भीड़ ने देश के दो सबसे बड़े और प्रतिष्ठित अखबारों के दफ्तरों पर हमला किया, इन अखबारों में अंग्रेजी दैनिक द डेली स्टार और बंगाली दैनिक प्रथम आलो शामिल हैं.
इस हमले का दायरा इमारतों के नुकसान से कहीं बड़ा है, इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की, जिससे कई पत्रकार घंटों तक फंसे रहे. यह पूरी घटना इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई. उनके निधन से नाराज प्रदर्शनकारियों ने राजधानी में देर रात उत्पात मचाया. भीड़ ने कई सरकारी और निजी इमारतों को आग के हवाले कर दिया और मीडिया संस्थानों को खासतौर पर निशाना बनाया गया था.
द डेली स्टार के दफ्तर में आग और फंसे पत्रकार
ढाका के प्रमुख इलाके करवान बाजार में मौजूद द डेली स्टार के दफ्तर को आधी रात के बाद उपद्रवियों ने निशाना बनाया. प्रदर्शनकारियों ने पहले ग्राउंड और पहली मंजिल में तोड़फोड़ की और करीब रात 12:30 बजे आग लगा दी. आग इतनी तेज थी कि धुआं पूरे बिल्डिंग में फैल गया. न्यूजरूम में काम कर रहे पत्रकार ऊपर की मंजिलों पर फंस गए। लगभग 28 से 30 पत्रकार नौवीं मंजिल और छत पर फंसे रहे. बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था, दम घुटने लगा और डर का माहौल बन गया. फायर फाइटर्स के पहुंचने के बाद निचली मंजिल की आग पर काबू पाया गया और छत पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया.
प्रथम आलो के दफ्तर पर हमला
प्रथम आलो का दफ्तर भी इस हिंसा से बच नहीं सका. उपद्रवियों ने वहां भी तोड़फोड़ की और आगजनी की. प्रथम आलो बांग्लादेश का बेहद प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला बंगाली अखबार है. इसका प्रकाशन ढाका से होता है और इसके ऑनलाइन पाठकों की संख्या भी करोड़ों में है.
क्या है प्रथम आलो का अर्थ
हिंदी में प्रथम आलो का मतलब पहला और सबसे पहले होता है. यहां आलो शब्द सबसे पहले या शुरुआत में का भाव देता है. इसे अंग्रेजी में First of All कहा जा सकता है. इसके अलावा इसका एक और मतलब पहली रोशनी भी होता है. इस नाम से ही अखबार की प्रतिष्ठा और महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में मीडिया और पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसे हमलों को रोकने की सख्त जरूरत है.
