युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
बेंगलुरू में माई भारत-एनएसएस चिंतन शिविर के पहले दिन केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे की गरिमामयी उपस्थिति
विकसित भारत के प्रति अपना दृष्टिकोण बनाने के लिए युवाओं को बनाया जाए सशक्त: डॉ. मनसुख मांडविया
प्रविष्टि तिथि: 06 MAR 2026 7:14PM by PIB Delhi
Inaugurated the Chintan Shivir of the Department of Youth Affairs in Bengaluru today.
Through engaging discussions and sharing best practices, we are empowering our Yuva Shakti to realize PM Shri @narendramodi ji’s vision of a Viksit Bharat by 2047. pic.twitter.com/tl1zVrcTaK
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) March 6, 2026
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग ने बेंगलुरु स्थित स्टेम सेल विज्ञान और पुनर्योजी औषधि संस्थान (इनस्टेम) में दो दिवसीय ‘माई भारत–एनएसएस चिंतन शिविर‘ के पहले दिन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस चिंतन शिविर का उद्देश्य सहयोग को मजबूत करना, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और भारत की ‘अमृत पीढ़ी‘ को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में सशक्त बनाने तथा ‘विकसित भारत @2047′ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करना है।

चिंतन शिविर का उद्घाटन केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे द्वारा युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल, अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा, संयुक्त सचिव श्री शिव रतन, माई भारत की सीईओ डॉ. प्रियंका शुक्ला और मंत्रालय, माई भारत व राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया।
इस विचार-विमर्श में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों ने भाग लिया।
चर्चा का एजेंडा निर्धारित करते हुए, युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने चिंतन शिविर के मुख्य उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों को रेखांकित किया और माई भारत तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्लेटफार्मों के माध्यम से एकीकृत योजना, संस्थागत समन्वय और मजबूत युवा जुड़ाव के महत्व पर बल दिया।

मुख्य भाषण देते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के युवाओं को न केवल विकास में भाग लेना चाहिए, बल्कि उन्हें राष्ट्र के भविष्य का निर्माता बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा नागरिक को विकसित भारत के प्रति अपना दृष्टिकोण विकसित करने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए युवा विकास के लिए काम करने वाले संस्थानों के बीच मजबूत तालमेल, समन्वय, नेटवर्किंग और अनुभवों के निरंतर आदान-प्रदान की आवश्यकता है।
मंत्री ने देश भर में युवाओं की भागीदारी को और मजबूत करने के लिए कई उपायों का सुझाव भी दिया। उन्होंने माई भारत प्लेटफार्मों के माध्यम से सोशल मीडिया समन्वय को मजबूत करते हुए जिला और ब्लॉक स्तर पर युवा क्लबों, एनएसएस स्वयंसेवकों और डिजिटल आउटरीच समूहों सहित संरचित युवा नेटवर्क बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं की भागीदारी को पहचानने और प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तरीय युवा प्लेटफार्मों को माई भारत इकोसिस्टम के साथ एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. मांडविया ने माई भारत, एनएसएस, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान किया, साथ ही नियमित समन्वय, राज्य स्तर पर नवीन युवा गतिविधियों और खेल एवं सामुदायिक जुड़ाव सहित मासिक युवा क्लब कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि इस तरह का सहयोगी इकोसिस्टम भारत के युवाओं को विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में सक्रिय रूप से योगदान करने में सक्षम बनाएगा।

चिंतन शिविर के लिए मार्गदर्शक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने राष्ट्र निर्माण में युवा भागीदारी और स्वयंसेवा की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा क्लबों, एनएसएस इकाइयों और माई भारत पहलों के माध्यम से जमीनी स्तर पर जुड़ाव को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे युवा समुदाय के विकास और राष्ट्रीय प्रगति में सार्थक योगदान दे सकें।
इन दृष्टिकोणों को आगे बढ़ाते हुए ‘संवाद से समाधान’ विषय के तहत विचार-विमर्श में प्रतिभागी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच क्रॉस-लर्निंग, नीतिगत तालमेल और अनुभवों को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। डिजिटल यूथ एंगेजमेंट फ्रेमवर्क पर एक प्रस्तुति ने माई भारत पोर्टल के माध्यम से युवाओं को जोड़ने और उनकी भागीदारी के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को प्रदर्शित किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि तकनीक किस प्रकार देश भर में युवा भागीदारी को सशक्त बना सकती है।
चर्चा को और आगे बढ़ाते हुए दोपहर के सत्र में वार्षिक कार्य योजना (एएपी) 2026-27 और माई भारत एवं एनएसएस पहलों के विलय पर रणनीतिक विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान युवा क्लबों की निरंतरता, एएपी 2025-26 के कार्यान्वयन से मिली सीख और युवा लामबंदी के अभिनव तरीकों पर चर्चा की गई, जिसमें छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सफल मॉडल साझा किए।
दिन के विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए, चिंतन शिविर के पहले दिन का समापन मुख्य निष्कर्षों के संकलन और दूसरे दिन के एजेंडे के निर्धारण के साथ हुआ। इसके बाद माई भारत के स्वयंसेवकों द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें युवा भागीदारी के उत्साह और विविधता का जश्न मनाया गया।

माई भारत–एनएसएस चिंतन शिविर देश भर में युवा विकास में लगे हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नीतिगत तालमेल के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है। इन चर्चाओं के परिणाम युवा जुड़ाव तंत्र को और अधिक मजबूत करेंगे और विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने में भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ की सक्रिय भागीदारी का समर्थन करेंगे।
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पीके/केसी/एसके/एसएस
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