Khaleda Zia rival Sheikh Hasina: भारत में शरण लिए पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को अपनी लंबे समय की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. हसीना ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति के लिए “अपूरणीय क्षति” करार देते हुए उनकी लोकतंत्र स्थापना में भूमिका की सराहना की है. अवामी लीग के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा संदेश में हसीना ने कहा, “बीएनपी चेयरपर्सन और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन पर मैं अपनी गहन संवेदना व्यक्त करती हूं.

उनका जाना अपूरणीय क्षति है
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में तथा लोकतंत्र की स्थापना के संघर्ष में उनकी भूमिका के लिए उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण था और इसे हमेशा याद रखा जाएगा. उनका जाना बांग्लादेश की राजनीतिक जीवन तथा बीएनपी की नेतृत्व व्यवस्था के लिए अपूरणीय क्षति है.”

‘मैं बेगम खालिदा जिया की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करती हूं’
हसीना ने आगे कहा, “मैं बेगम खालिदा जिया की आत्मा की शांति और क्षमा के लिए प्रार्थना करती हूं. मैं उनके पुत्र तारिक रहमान तथा शोकसंतप्त परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं. बीएनपी परिवार के सभी सदस्यों के प्रति भी मैं अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं. मुझे उम्मीद है कि अल्लाह उन्हें इस कठिन समय में धैर्य, शक्ति और सांत्वना प्रदान करेंगे.”

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सालों तक चली दोनों में दुश्मनी
खालिदा जिया और शेख हसीना दशकों तक एक-दूसरी की मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहीं. दोनों ने बारी-बारी से बांग्लादेश की सत्ता संभाली और पिछले तीन दशकों में देश की राजनीति पर उनकी यह दुश्मनी हावी रही. इस संदेश का समय भी खास है, क्योंकि हसीना पिछले साल अगस्त में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन और अशांति के बीच सत्ता से बेदखल होकर भारत में शरण ले चुकी हैं.

दुनिया भर में चर्चा का कारण बना यह संदेश
खालिदा जिया और शेख हसीना की दुश्मनी को “बेगमों की जंग” कहा जाता था. हसीना के शासन में जिया को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल हुई, जबकि हसीना की सत्ता गिरने के बाद जिया रिहा हुईं. ऐसे में हसीना का यह उदार संदेश सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में सुर्खियां बना हुआ है. कई विश्लेषक इसे राजनीतिक परिपक्वता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे मौजूदा संकट में रणनीति कदम मान रहे हैं.

खालिदा जिया का निधन
80 वर्षीय खालिदा जिया, जो बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में शुमार थीं, लंबी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह करीब 6 बजे निधन हो गया. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि फज्र की नमाज के तुरंत बाद उनका इंतकाल हो गया. वे उन्नत लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह, हृदय और फेफड़ों संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं.

खालिदा जिया कौन थीं?
बेगम खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को जलपाईगुड़ी (तत्कालीन अविभाजित बंगाल, अब पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था. 1991 में संसदीय लोकतंत्र की बहाली के बाद वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और 2001-2006 तक दूसरा कार्यकाल पूरा किया. उनके पति पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की 1981 में हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया.उनके परिवार में बड़े बेटे रहमान तारिक (वर्तमान में बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन), पुत्रवधू जुबैदा रहमान और पुत्री जैमा रहमान हैं. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे थे.

खालिदा जिया जो बीमार थीं
छोटे पुत्र अराफत रहमान कोको की कई वर्ष पहले मलेशिया में मृत्यु हो गई थी. खालिदा जिया वर्षों से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं. वे इलाज के लिए विदेश जाती रही थीं और इस साल की शुरुआत में लंदन में चार महीने इलाज कराने के बाद मई में ढाका लौटी थीं. इस निधन पर अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई विश्व नेताओं ने शोक व्यक्त किया है. बांग्लादेश में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है.