गुरु गोबिंद सिंह की जयंती मनाने के लिए सिख समुदाय द्वारा आयोजित नगर कीर्तन (धार्मिक जुलूस) को रविवार को न्यूज़ीलैंड में एक स्थानीय दक्षिणपंथी धार्मिक समूह ने कथित तौर पर परेशान किया. यह घटना ऑकलैंड से लगभग 225 किमी दूर स्थित शहर टौरंगा में हुई. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), अमृतसर सहित सिख संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिखों का ये जुलूस रविवार, 11 जनवरी को सुबह 11 बजे गुरुद्वारा सिख संगत मंदिर से शुरू हुआ और कैमरन रोड होते हुए टौरंगा बॉयज़ कॉलेज की ओर बढ़ रहा था. पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी क्योंकि एक इस जुलूस को लेकर एक स्थानीय ईसाई समूह के द्वारा संभावित हस्तक्षेप की आशंका थी.

हालांकि, इन सावधानियों के बावजूद पेंटेकोस्टल नेता ब्रायन तमाकी और उनके डेस्टिनी चर्च से जुड़े सदस्यों ने सिखों के इस जुलूस को रोकने की कोशिश की. उन्होंने एक पारंपरिक माओरी हाका, एक आदिवासी नृत्य करके सिखों के इस जुलूस के सामने विरोध प्रदर्शन किया और उन्हें बैनर दिखाएं. इन बैनरों पर लिखा था, ‘यह न्यूज़ीलैंड है, भारत नहीं.’ ‘किसकी सड़कें? कीवी सड़कें’ और ‘सच्चे देशभक्त पीछे नहीं हट रहे हैं’ शेयर किए गए वीडियोज में ये कैप्शन लिखे हुए थे. इस वीडियो में आगे कहा गया ‘आज टौरंगा में, हमारे सच्चे देशभक्तों ने सिख परेड का जवाब हाका से दिया… हिंसा नहीं, चुप्पी नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध. हमारी आवाज़ हमारी सड़कों पर गूंजी, ‘किसकी सड़कें? हमारी सड़कें. किसकी सड़कें? कीवी सड़कें.’

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ईसाइयों के प्रदर्शन पर क्या बोले SGPC अध्यक्ष?
सिखों के खिलाफ ईसाइयों के इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और स्वयंसेवकों के बीच प्रभावी समन्वय के कारण यह कार्यक्रम बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के समाप्त हो गया.
न्यूज़ीलैंड में कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा नगर कीर्तन के विरोध की कड़ी आलोचना करते हुए, SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिखों ने अपनी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शांतिपूर्वक जुलूस निकाला. उन्होंने बताया कि देश में ऐसी घटना दूसरी बार हुई है, जिससे सिख समुदाय में गहरी निराशा हुई है.

सिख समुदाय की धार्मिक परंपरा का विरोध अस्वीकार्य
धामी ने आगे कहा, ‘सिख समुदाय की धार्मिक परंपराओं को नफरत भरी मानसिकता से देखना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, यह देखते हुए कि सिखों ने वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देने में लगातार अनुकरणीय योगदान दिया है. उन्होंने न्यूज़ीलैंड और भारत सरकारों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की अपील की. SGPC चीफ ने कहा, ‘नगर कीर्तन सिख धर्म की एक पवित्र धार्मिक परंपरा है, और इसका विरोध करना न केवल सिख धर्म के मानवीय मूल्यों पर हमला है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और आपसी मेलजोल के लिए भी एक चुनौती है.’

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