

लंदन: दुनिया के कई देशों में कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के खिलाफ जारी जंग में वैक्सीनेशन का काम युद्ध स्तर पर हो रहा है. ऐसे में एक शब्द की व्यापक और वैश्विक चर्चा हो रही है जिसे वैक्सीन पासपोर्ट (Vaccine Passports) कहा जा रहा है. तो ऐसे में जब ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवा रहे हैं तो कुछ सरकारें अपने अपने समाज को लॉकडाउन (Lockdown) से बाहर लाने के लिए इसी ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ पर भरोसा कर रही हैं.
ये ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ वो आवश्यक प्रमाणपत्र है जो ये दिखाता है कि पासपोर्ट धारक कोविड-19 के खिलाफ एक सुरक्षा कवच हासिल कर चुका है. वहीं इस पासपोर्ट का इस्तेमाल कई जगहों पर हो सकता है. उदाहरण के लिए इसके धारक को रेस्रां, पब, बार, खेल परिसर और अन्य कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक जगहों पर एंट्री दी जा सकती है.
कहीं समर्थन तो कहीं विरोध
इजरायल (Israel) में इस समय ‘ग्रीन पास’ व्यवस्था लागू की गई है जो टीकाकरण करवा चुके लोगों को थियेटरों, कंसर्ट हॉल्स, इंडोर रेस्त्रां और बार में प्रवेश की अनुमति देती है. वहीं ब्रिटिश (UK) सरकार ने भी वैक्सीन पासपोर्ट योजना लागू करने का प्रयास किया था लेकिन कुछ जगहों पर इन प्रस्तावों के खिलाफ भारी विरोध का सामना करने के बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा.
विवादास्पद है वैक्सीन पासपोर्ट योजना!
हांलाकि इसमें कोई चौंकाने वाली बात नहीं है कि वैक्सीन पासपोर्ट योजनाएं विवादास्पद हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इससे असमानता पैदा होगी. लेकिन कोविड की स्थिति के किसी भी प्रकार के प्रमाणन का इस्तेमाल करने के लिए, जब तक इसे उचित तरीके से डिजाइन नहीं कर लिया जाता और जब तक किसी देश की पूरी आबादी को टीका नहीं लग जाता तब तक इसे नैतिकता से जोड़ते हुए भेदभाव के दायरे में रखा जाएगा.
नैतिक दायित्व का न्यूनतम सिद्धांत
वैश्विक बहस का मुद्दा बन चुके इस विषय यानी टीकाकरण और उसकी प्रमाणिकता से जुड़े नैतिकता के पहलुओं की चर्चा करें तो आसानी से बचाव का कर्तव्य एक ऐसी बात है जिसे नैतिक दायित्व का न्यूनतम सिद्धांत कहा जाता है. इस सिद्धांत को समझाने के लिए, दार्शनिक पीटर सिंगर ने इसे इस तरह परिभाषित करते हुए समझाया है.
उदाहरण के लिए अगर आप एक तालाब के पास से गुजर रहे हैं और देख रहे हैं कि एक बच्चा उसमें डूब रहा है, तो आपको अंदर जाकर बच्चे को तालाब में से बाहर निकालना चाहिए. इसका मतलब यह है कि आपके कपड़े गंदे हो जाएंगे, लेकिन यह बहुत मामूली सी बात है, क्योंकि अगर आपने ऐसा नहीं किया तो बच्चे की मौत एक त्रासदी होगी.
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‘कम होगी लोगों की बेचैनी’
इसलिए टीकाकरण न केवल अपने लिए सुरक्षा और दूसरों के प्रति मेहरबानी है बल्कि टीका लगवाना एक नैतिक दायित्व भी है. इतना ही नहीं, टीकाकरण पासपोर्ट एक सामान्य दैनिक जीवन की ओर लौटने की बहुत मामूली कीमत है. इससे विमान, या थियेटर, रेस्त्रां या स्टेडियम में आपके संपर्क में आने वाले लोगों की भी बैचेनी कम होगी.
सरकार ने उठाए ये कदम
बेहतर जन स्वास्थ्य सुनिश्चित करना सरकारों की भी जिम्मेदारी है. उदाहरण के लिए, ब्रिटेन, अमेरिका या किसी अन्य देशों में सरकारों ने बंद जगहों पर धूम्रपान को गैर कानूनी घोषित किया है क्योंकि अनिवारक धूम्रपान के कारण लोगों की सेहत को खतरा है.
अपवाद के मामलों में देनी होगी छूट
लोगों के एक ऐसे छोटे समूह को, जो स्वास्थ्य कारणों से टीकाकरण करवाने में सक्षम नहीं हैं, टीकाकरण से छूट दी जा सकती है, लेकिन उन्हें भी एक पासपोर्ट दिया जाना चाहिए जिसमें बताया गया हो कि छूट दिए जाने का यह कारण है और इस कारण के आधार पर उन्हें किसी समारोह या परिसर में प्रवेश से इंकार नहीं किया जाना चाहिए.
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टीकाकरण पासपोर्ट से केवल अर्थव्यवस्था को पुन: खोलने में ही मदद नहीं मिलेगी बल्कि उन लोगों को भी एक नई जिंदगी मिलेगी जो महामारी के दौरान सामाजिक रूप से एंकातवास यानी आइसोलेशन में रहे, और अकेलेपन से संघर्ष किया.
‘अच्छे दिन लौटने की उम्मीद’
टीकाकरण से ये लोग फिर से समाज के अन्य लोगों के साथ बिना किसी डर के संपर्क बना सकेंगे, घुल मिल सकेंगे. उन परिवारों को भी इससे बहुत फायदा होगा जो एक लंबे समय से अपने परिजनों से मुलाकात नहीं कर सके हैं. समाज के सदस्य होने के नाते, यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम अपने समुदाय में हर किसी की सुरक्षा के लिए अपना टीकाकरण कराएं.
(इनपुट भाषा से)
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