
South Korean president seeks government funding: भारत हो या दुनिया का कोई भी देश, आम हो या खास, लोग बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या से परेशान है. पुरुषों में ये समस्या ज्यादा चिंताजनक है या महिलाओं में इस बहस से इतर साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ‘ली’ इस समस्या से इतना परेशान हुए कि उन्होंने सरकारी फंड से सबका हेयर लॉस ट्रीटमेंट कराने की मांग की है. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने गंजेपन की बीमारी को अस्तित्व के संकट से जोड़ते हुए इसे जीवित रहने के लिए सांसों जितना जरूरी बताया है.
राष्ट्रपति की मांग
ली ने अपनी बात जस्टिफाई करते हुए ये तर्क दिया कि बालों के झड़ने की बीमारी से जुड़े मेडिकल ट्रीटमेंट को नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के तहत कवर किया जाना चाहिए. राष्ट्रपति ली ने सीनियर अधिकारियों के साथ हुई बैठक में ऐसा सुझाव देते हुए कहा, ‘बालों के झड़ने के मेडिकल उपचार को कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए जैसा पहले देखा जाता था. आज इसके इलाज को ‘जिंदा’ रहने के लिए जरूरी मामला माना जाना चाहिए’.
‘पॉलिसी कवर’ के नियम
स्वास्थ्य मंत्री जियोंग यून-क्यॉन्ग के मुताबिक साउथ कोरिया की नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम अभी मेडिकल कंडीशन से जुड़े बालों के झड़ने के ट्रीटमेंट को कवर करती है. हालांकि ये फायदा उन्हें नहीं मिलता जिनके बाल आनुवंशिक कारणों से झड़ते हैं, क्योंकि ये स्थिति जीवन के लिए संकट यानी लाइफ थ्रेट नहीं है.
ली के लिए गंजापन एक गंभीर मुद्दा क्यों है?
दरअसल दक्षिण कोरिया अपने सख्त ब्यूटी स्टैंडर्ड के लिए जाना जाता है. वहां गंजापन एक कलंक बन चुका है. ये ऐसी स्थिति है जो युवाओं की ज़िंदगी को काफी हद तक खराब कर चुकी है. पिछले साल दक्षिण कोरिया में बालों के झड़ने के लिए अस्पतालों में जाने वाले करीब ढ़ाई लाख लोगों में 40 फीसदी लोग युवा वर्ग से थे. 20 से 30 साल के युवाओं का गंजापन की चपेट में आना राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है.
दक्षिण कोरिया, कॉस्मेटिक और हेयर-लॉस ट्रीटमेंट मार्केट दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है. राष्ट्रपति ली ने पहली बार ये प्रस्ताव तब दिया था जब वो 2022 में अपने चुनावी अभियान के दौरान दिया था. हालांकि लोकलुभावन वादों की आलोचना होने के बाद उन्होंने बयान वापस ले लिया था. वो कदम ली की टीम द्वारा कराए गए सर्वे के फीडबैक पर आधारित था. जिसमें पाया गया था कि बालों के झड़ने का मुद्दा युवाओं के लिए गंभीर चिंता और चर्चा का विषय है.
2024 में हुए सर्वे में 98 फीसदी लोगों ने कहा था कि हैंडसम लोगों को हर क्षेत्र में ज्यादा सामाजिक फायदे मिलते हैं.
