Stanford University: कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़ी एक ऐसी खबर आई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. विश्वविद्यालय के एक छात्रा ने बड़ा आरोप लगाया है. छात्रा का कहना है कि कुछ ग्रेजुएशन के छात्र अनिवार्य कैंपस भोजन योजनाओं से बचने के लिए और बेहतर भोजन विकल्प प्राप्त करने के लिए जैन धर्म का पालन करने का झूठा दावा किया है. 

दरअसल, स्टैनफोर्ड की एक 21 साल की छात्रा एल्सा जॉनसन ने द टाइम्स में छपे अपने निबंध में दावा किया है कि छात्र वास्तविक जरूरतों की रक्षा के लिए बनाई गई सुविधाओं का किस प्रकार दुरुपयोग कर रहे हैं. वहीं, उनका तर्क है कि इन सुविधाओं का लगातार शोषण हो रहा है. हालांकि, इस लेख में विकलांगता संबंधी सुविधाओं पर भी चर्चा की गई है. लेकिन अपने लेख में छात्रा ने भोजन संबंधी छूट को सबसे स्पष्ट और विवादास्पद उदाहरणों में से एक बताया है.

क्या कहता है नियम? 

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बताया जाता है कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में परिसर में रहने वाले अधिकांश छात्रों के लिए अनिवार्य रूप से भोजन खरीदना आवश्यक है. इसकी लागत साल 2025-26 में करीब $7,944 (7,16,425 रुपये) बताई जा रही है. हालांकि, नियमों के अनुसार, कोई छात्र दावा करता है कि वह किसी विशेष धर्म का पालन करता है, जिसको विश्वविद्यालय की रसोई में उपलब्ध करना संभव नहीं, तो उनको छूट भी दी जाती है. अपने इस लेख में जॉनसन ने दावा किया है कि कुछ छात्र इन छूटों को पाने के लिए झूठा दावा भी करते हैं कि वह जैन धर्म के अनुयायी हैं. 

क्या कहते हैं जैन आहार नियम?

दरअसल, जैन आहार नियमों के अनुसार, जड़ वाली सब्जियों और कीड़े-मकोड़ों सहित किसी भी जीवीत प्राणी को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी भोजन खाना मना है. 21 वर्षीय छात्र जॉनसन का दावा है कि जो छात्र जैन नहीं भी है, वे इस दावे का इस्तेमाल कर भोजन योजना से छूट पाते और बेहतर विकल्प की तलाश करते हैं. 

इस संबंध में वह लिखती हैं कि छूट पाने वाले छात्र भोजन भत्ते का उपयोग होल फूड्स जैसे सुपरमार्केट में ताज़ा सलाद और मनपसंद भोजन खरीदने में करते हैं. वहीं, अन्य छात्रों को विश्वविद्यालय के सामान्य भोजन पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसे जॉनसन सीमित और अक्सर अरुचिकर बताती हैं.

छात्रा ने दिए ये सुझाव 

इस निबंध में यह सुझाव दिया गया है कि विश्वविद्यालय के प्रशासक ऐसे दावों को चुनौती देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं. छात्रा का कहना है कि किसी छात्र के धार्मिक विश्वास पर सवाल उठाने से कानूनी कार्रवाई या भेदभाव के आरोप लगने का खतरा रहता है, जिससे प्रवर्तन अत्यंत कठिन हो जाता है. माना जा रहा है कि जॉनसन इस मुद्दे को एक व्यापक कैंपस संस्कृति के संदर्भ में रखती हैं, जहां पर छात्र खुले तौर पर इस बात पर चर्चा करते हैं कि व्यवस्था को कैसे बेहतर बनाया जाए. 

असंतुलन निष्पक्षता और निगरानी पर सवाल

अपने निबंध में उन्होंने आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया है कि प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में समुदायिक कॉलेजों की तुलना में कहीं अधिक संख्या में छात्रों को विशेष सुविधाएं प्राप्त होती है. जॉनसन का तर्क है कि यह असंतुलन निष्पक्षता और निगरानी पर सवाल उठाता है. हालांकि, छात्रा ने यह भी स्वीकार किया है कि वास्तविक धार्मिक चिकित्सा संबंधी जरूरतें मौजूद हैं, लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि दुरुपयोग विश्वास को कमजोर करता है. 

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छात्रा के दावे ने छेड़ी नई बहस

जॉनसन के इस निबंध ने एक नई बहस छेड़ दी है. निबंध के सामने आने के बाद कई जानकारों का मानना है कि क्या स्टैनफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों को धार्मिक आहार संबंधी छूट देने के तरीके की समीक्षा करनी चाहिए. खासकर तब जब इससे छात्रों को महंगी आवश्यकताओं को दरकिनार करने और बेहतर गुणवत्ता वाले भोजन तक पहुंच प्राप्त करने की अनुमति मिलती है.

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