Why Price of Scorpion Venom So Expensive: बिच्छू- एक छोटा सा जीव है. फिर भी आप और हम जैसे तमाम लोग इस जीव से डरते हैं. इसके जहरीले डंक की वजह से से दूर भागते हैं. इसे देखते ही मन में एक घिन सी आती है. लेकिन अगर हम कहें कि यही बिच्छू आपको करोड़पति बना सकता है तो आप हंस पड़ेंगे. लेकिन ये सच है. मन में सवाल आएगा कि जहरीला बिच्छू कैसे बना सकता है किसी को करोड़पति. लेकिन आपको शायद आपको शायद पता नहीं है कि आज की तारीख में बिच्छू सोने से भी महंगा चल रहा है. 

सोने से भी महंगा बिच्छू का जहर

असल में चीन में बिच्छू के जहर से करोड़पति बनाने वाली कई सारी नर्सरी खुल चुकी हैं. एक नर्सरी में करोड़ों बिच्छू और इनसे निकलने वाला हजारों लीटर जहर मौजूद होता है. मजे की बात ये है कि बिच्छू का जहर सोने से भी 50 गुणा ज्यादा है. जहां एक किलो सोने का दाम डेढ़ करोड़ रुपये चल रहा है. वहीं बिच्छू के एक लीटर जहर का दाम मार्केट में 80 करोड़ रुपये तक है. 

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यही वजह है कि इसीलिए बिच्छू के जहर को चीन में लिक्विड गोल्ड कहा जा रहा है. वह एक सेकेंड में 10 बार डंक मार सकता है. इसके बावजूद आर्थिक फायदों के लिए चीन में उसे पालने का चलन बढ़ता जा रहा है. चीन के शेडोंग प्रांत के एक गांव में इसका पूरा फार्म बना हुआ है. यह पूरा इलाका इन बिच्छुओं की वजह से समृद्ध है, धनी है और यहां तक स्वरोजगार संपन्न है. 

रोजगार भी कोई हजार लाख का नहीं, बल्कि बिच्छुओं के जहर से अरबों की पूरी अर्थव्यवस्था बन गई है. सिर्फ शेंडोंग प्रांत की नर्सरी से 13 हजार लीटर जहर निकलता है. एक लीटर जहर की कीमत इंटरनेशल मार्केट में 80 से 85 करोड़ रू. है. इस तरह 13 हजार लीटर कीमत हुई 11 हजार करोड़ रूपये. 

ये तो सिर्फ एक प्रांत की नर्सरी हुई, जहां लाखों बॉक्से में करोड़ों बिच्छू एक साथ रखे जाते हैं. चीन में ऐसी नर्सरी सैकड़ों हैं. बल्कि यूं कहिए, चीन के गांव गांव में बिच्छुओं के जहर का कारोबार फल फूल रहा है. चीन के ये सबसे जहरीले बिच्छुओं के नाम ओलिविएरस मार्टेन्सी यानी चीनी बिच्छू हैं. इनकी खूबी ये है कि ये दुनिया के किसी भी बिच्छू से एक डंक में ज्यादा जहर निकालते हैं. 

18 लाख के एक डंक वाले चीनी बिच्छू

ओलिविएरस मार्टेन्सी के एक डंक से 2 मिलिलीटर जहर निकलता है. एक मिलीलीटर जहर की कीमत करीब 9 लाख रुपये है. इस तरह एक डंक में 2 मिली लीटर जहर की कीमत हुई 18 लाख रु. है. आपको बता दें, कि चीन के ओलिविएरस मार्टेन्सी बिच्छुओं से ज्यादा जहरीला भारत का रेड स्कॉर्पियन यानी लाल बिच्छू होता है.

लाल बिच्छू के ही टक्कर का होता है, ऑस्ट्रेलिया का डेथ स्टॉकर. जिसका जहर इतना ताकतवर होता है, कि इनके एक डंक से इंसान की जान चली जाए. लेकिन गौर कीजिए, बिच्छुओं के जहर का कारोबार सबसे जहरीले बिच्छू वाले भारत और ऑस्ट्रेलिया की बजाय चीन में फल फुल रहा है. कैसे…?

चीन के एक प्रांत में अगर बिच्छुओं के जहर का कारोबार अगर फल फूल रहा है, तो इसके पीछे 2 वजहें हैं. एक तो पारंपरिक, जिसमें मुख्य है चीन के लोगों की फूड हैबिट. ये बिच्छू, सांप, छिपकिली और दूसरे जहरीले कीट मकोड़ों को भी खाते हैं. इस वजह से इन जानवरों से बाकियों की तुलना में डरते कम है. दूसरी वजह है तकनीक. चीन में बायोटेक्नोनलॉजी पर जितनी एडवांस रिसर्च हुई है, उतनी शायद ही कहीं और हुआ हो. 

शेनडांग की नर्सरी में जो बिच्छुओं की व्यापक ब्रीडिंग आज से 2 दशक पहले किसी सपने की तरह थी. चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में बिच्छुओं को पालने और जहर निकालने का तरीका पारंपरिक था. चीनी वैज्ञानिकों ने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो प्रगति की है, उसी का कमाल है, ये बिच्छू फार्म जो अब चीन में एक उद्योग बन गया है.

चीन में उद्योग बन गया है बिच्छू पालन

बिच्छुओं के लिए ब्रीडिंग बॉक्स, प्रजनन बॉक्स और मैच्योर और जहर के लिए तैयार बिच्छुओं के लिए अलग अंधेरे कॉर्नर, डिटेल्ड रिसर्च का बाद तैयार किए गए हैं. चूंकि हर बिच्छू यहां जहरीले हैं, लिहाजा ब्रीडिंग से लेकर जहर निकालने की प्रोसेस तक हर स्टेज में बेहद सावधानी बरती जाती है. चीन के लोग इसमें पारंपरिक तरीके से ही माहिर है, लेकिन इस नर्सरी में तकनीकी कौशल ने पूरे कारोबार को हजारों करोड़ का उद्यम बना दिया है.

आप आपके जेहन में सवाल होगा, कि बिच्छुओं के जहर का होता क्या है. इनका जहर बिकता कहां है और खरीदता कौन है? ये किसी भी कारोबार का बुनियादी पहलू है. अगर डिमांड नहीं होगी, तो उत्पादन या सप्लाई चेन सब कुछ ठप पड़ जाएगा. तो फिर चीन में अगर हजारों करोड़ के जहर का कारोबार चल रहा है, तो इसकी डिमांड और सप्लाई चेन जरूर होगी.

कोबरा से भी खतरनाक बिच्छू का जहर

किंग कोबरा एक डंक में 1000mg जहर छोड़ता है लेकिन एक बिच्छू एक डंक में 2mg ही जहर छोड़ता है. लेकिन डेथ स्टॉकर जैसे बिच्छू के एक ही डंक से इंसान मर जाता है. यानी बिच्छू का जहर कोबरा से 500 गुना कम होने के बावजूद खतरनाक है. कोबरा का जहर 7 से 10 करोड़ प्रति लीटर बिकता है. लेकिन डेथ स्टॉकर बिच्छू के एक लीटर जहर की कीमत 80-85 करोड़ रू. तक है.

ये तथ्य बताते हैं, कि कोबरा का जहर इंसान की मौत का कारण इसलिए बनता है, क्योंकि एक डंक में उसकी मात्रा ज्यादा होती है. जबकि बिच्छू के डंक में जहर कम. बिच्छुओं में जहर की यही कम मात्रा इसे दुर्लभ भी बनाती है और बेशकीमती भी. 

अब सवाल है, कि बिच्छुओं के दुर्लभ और बेशकीमती जहर से होता क्या है. अगर ये कच्चा माल इतना महंगा बिकता है, तो इससे बनने वाले प्रोडक्ट कितने महंगे होंगे. जहर से बनने वाले वो प्रोडक्ट आखिर हैं क्या…? ये जानना भी आपके लिए कम दिलचस्प नहीं होगा.

बिच्छुओं के डंक से जब ज़हर इंसान के शरीर में प्रवेश करता है, तो ये हमारे लिए खतरनाक हो जाता है. कुछ मामलों में कंप्लिकेशन इतनी ज्यादा होती है, कि इंसान की मौत हो जाए. लेकिन अगर इसकी जगह जब कंट्रोल्ड यूनिट यानी निश्चित मात्रा में इस्तेमाल की जाए, तो ये जीवन रक्षक बन जाता है. 

बिच्छू के जहर की केमिकल स्टडी

इसमें मुख्य केमिकल होता है न्यूरोटॉक्सिन जो मूल रूप में जानलेवा होता है. इसके साथ प्रोटीन और पेप्टाइड्स का मिश्रण होता है
न्यूरोटॉक्सिक पेप्टासाइड हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है. कुछ एंजाइम्स भी होते हैं, जहर को तेजी से फैलाने का काम करते हैं
जहर के प्रोटीन, एन्जाइम्स से कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों की दवा बनती है. लकवा, अस्थमा और हदृय रोग की दवाइयों में भी ये इस्तेमाल होता है. इसके साथ कई सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी इसी जहर से बनते हैं. 

चीन में तो बिच्छुओं के ज़हर का इस्तेमाल सदियों से इलाज में होता रहा है. अब ये विज्ञान और तकनीक की वजह से और अधिक प्रयोग होने लगा है. अगली बार आप बिच्छू को देखिए, तो देखते ही दुश्मन न मान बैठें, बल्कि ये समझिए कि आपने बिच्छू की असली ताकत और खासियत पहचान ली है. इसलिए बिच्छु देखें तो ये न समझें कि इसका डंक जान ले लेगा. इसके ज़हर की तासीर जान बचाने वाली भी है .