
उप राष्ट्रपति सचिवालय

उपराष्ट्रपति ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान -एम्स नई दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
उपराष्ट्रपति ने कहा एम्स सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि अब उन्हें स्थापित कर रहा हैउपराष्ट्रपति ने कहा कोई भी कृत्रिम बुद्धिमता तकनीक मरीज के बिस्तर के समीप डॉक्टर की मौजूदगी का विकल्प नहीं हो सकती
उपराष्ट्रपति ने वहन करने योग्य शुल्क के साथ उत्कृष्ट चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए एम्स की सराहना की
उपराष्ट्रपति ने एम्स से उत्तीर्ण डॉक्टरों से सहानुभूति और सत्यनिष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का आह्वान किया
प्रविष्टि तिथि: 12 MAY 2026 6:18PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान -एम्स, नई दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan graced the 51st Convocation of All India Institute of Medical Sciences, New Delhi at Bharat Mandapam, New Delhi today.
The Vice President observed that from pandemic resilience to rural healthcare outreach, the “AIIMS brand” has become… pic.twitter.com/7HKTBXjroR
— Vice-President of India (@VPIndia) May 12, 2026
स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में एम्स के योगदान का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता में देश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जो रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित करते हुए आम लोगों के लिए काफी सस्ते दर पर इलाज प्रदान करने वाला बना हुआ है। उन्होंने कहा कि महामारी से निपटने की क्षमता से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच तक, “एम्स ब्रांड” समूचे भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में भरोसे और सत्यनिष्ठा का पर्याय बन गया है।
उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक मानकों से समझौता किए बिना बड़ी संख्या में रोगियों के कुशल चिकित्सा प्रबंधन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और एम्स के अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा, संस्थान के निदेशक और संकाय सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स दशकों से ऐसे विशेषज्ञ तैयार करता आ रहा है जिनमें चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ ही नैतिकता और सहानुभूति की भावना प्रबल है। इसी भावना के साथ संस्थान के पूर्व छात्र विश्व भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में अग्रणी पदों पर आसीन हैं।
इस वर्ष के आरंभ में अंटार्कटिका में दूरस्थ रोबोटिक अल्ट्रासाउंड आयोजित करने में एम्स की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसने सिद्ध कर दिया है कि भौगोलिक स्थिति अब भारतीय चिकित्सा उत्कृष्टता में बाधक नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग के लिए भारत-फ्रांस केंद्र सहित संस्थान के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोगों का भी उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम्स अब स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग का उल्लेख करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि एम्स ने केवल दो वर्षों में 40 पायदान ऊपर चढ़कर वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल कर लिया है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान शीघ्र ही इस रैंकिंग में शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल हो जाएगा और एक दिन दुनिया का अग्रणी संस्थान बनेगा। उन्होंने कहा कि एम्स ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क के तहत मेडिकल कॉलेजों को दी जाने वाली वार्षिक श्रेणी में 2018 से 2025 तक लगातार शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
उपराष्ट्रपति ने संस्थान के संकाय सदस्यों और अनुसंधानकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि एम्स की उत्कृष्टता वर्षों से इसके संकाय सदस्यों को मिले असंख्य पद्म पुरस्कारों में परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि इस विशिष्ट सूची में 2 पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्म श्री पुरस्कार विजेता शामिल हैं, जबकि 57 संकाय सदस्य विश्व स्तर पर स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में एम्स संस्थानों के विस्तार का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे अल्प सुविधा वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा काफी सुदृढ़ हुई है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच में सुधार के लिए देशभर में और अधिक मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना हेतु स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयासों की भी सराहना की।
उत्तीर्ण विद्यार्थियों का संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे इस पेशे में भारतीय स्वास्थ्य सेवा के एक निर्णायक मोड़ पर प्रवेश कर रहे हैं, जब एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य की परिकल्पना अधिक एकीकृत, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को आकार दे रही है। उन्होंने युवा डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों से करुणा, नवाचार और स्वास्थ्य सेवा में लोगों का भरोसा बढ़ाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित तकनीकें चिकित्सा और कई अन्य क्षेत्रों में व्यापक बदलाव ला रही हैं, लेकिन कोई भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मरीज के पास डॉक्टर की उपस्थिति के नैतिक महत्व का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने उत्तीर्ण डॉक्टरों से कहा कि वे अपने पेशे में हमेशा सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और मानवता की भावना बनाए रखें।
उत्तीर्ण डॉक्टरों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके द्वारा धारण किया गया सफेद कोट व्यक्तिगत सफलता से कहीं अधिक अपेक्षाएं वहन करता है। उन्होंने छात्रों से विनम्रता, उत्कृष्टता और सहानुभूति के साथ समाज की सेवा करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि उनका कार्य पेशेवर कौशल और व्यापक कल्याण की प्रतिबद्धता दोनों को प्रतिबिंबित करे।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और एम्स नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा; एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन; संस्थान की डीन प्रोफेसर राधिका टंडन; संस्थान के रजिस्ट्रार प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद रथ; संकाय सदस्य, स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ, मेडिकल छात्र-छात्राएं और विशिष्ट जन उपस्थित थे।
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