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केन-बेतवा लिंक परियोजना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रविष्टि तिथि: 21 AUG 2026 4:25PM by PIB Delhi
परियोजना के बारे में
1. केन–बेतवा लिंक परियोजना क्या है?
केन–बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी और सिंचाई की समस्या को कम करने के लिए बनाई जा रही एक बड़ी जल परियोजना है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए है। इस परियोजना में केन नदी का पानी बेतवा नदी के क्षेत्र में पहुंचाने की योजना है। इसके लिए दौधन बांध, लिंक नहर और अन्य जरूरी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
KBLP, राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत नदियों को जोड़ने वाली पहली प्राथमिकता वाली परियोजना है, जो निर्माण के चरण में पहुंची है।
2. परियोजना में क्या–क्या बनाया जाएगा?
परियोजना में मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा दौधन बांध बनाया जा रहा है। यह बांध खजुराहो से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। दौधन बांध से 216.465 किलोमीटर लंबी केन–बेतवा लिंक नहर निकलेगी, जो झांसी के पास बरुआ सागर में मिलेगी। परियोजना में लोअर ऑर्र परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना भी शामिल हैं।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मौजूदा नहरों को बेहतर बनाने, तालाबों और वियर्स की मरम्मत, नए बैराज बनाने तथा सिंचाई और पेयजल से जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित करने का भी प्रावधान है।
3. परियोजना की कुल लागत कितनी है?
परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ है।
4. परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
परियोजना का शिलान्यास माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 दिसंबर 2024 को किया गया था। दौधन बांध का निर्माण कार्य चल रहा है। लिंक नहर का काम अभी शुरू होना बाकी है। लोअर ऑर्र परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना भी निर्माणाधीन हैं।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की अन्य संबंधित परियोजनाओं की DPR तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। परियोजना को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
5. इस परियोजना की जरूरत क्यों है?
बुंदेलखंड में लंबे समय से पानी की कमी, कम और अनियमित वर्षा, सिंचाई की सीमित सुविधा और कई क्षेत्रों में भूजल की कमी जैसी समस्याएं रही हैं। इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई और पेयजल के लिए अधिक भरोसेमंद जल उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही परियोजना से बिजली का उत्पादन और क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसलिए KBLP केवल सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड की जल सुरक्षा और विकास से जुड़ी बड़ी परियोजना है।
6. परियोजना से क्या–क्या लाभ होंगे?
परियोजना से:
- 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी;
- लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा;
- 103 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन होगा; और
- 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।
इससे बुंदेलखंड में सिंचाई, पेयजल और बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी।

7. किन क्षेत्रों को परियोजना का लाभ मिलेगा?
परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को लाभ मिलेगा। मध्य प्रदेश में पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तर प्रदेश में बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जैसे जिले लाभान्वित होंगे।
8. क्या परियोजना से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा?
हां। निर्माण के दौरान सिविल निर्माण, इंजीनियरिंग, परिवहन, सामग्री की आपूर्ति, मशीनों के संचालन, सुरक्षा और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों, वाहन मालिकों, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा देने वाले लोगों को भी परियोजना से बढ़ी आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिल रहा है। भविष्य में सिंचाई और पानी की बेहतर उपलब्धता से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
9. परियोजना से बुंदेलखंड की खेती को कैसे फायदा होगा?
सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता से किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम होगी। इससे किसान समय पर फसल बो सकेंगे, एक से अधिक फसल लेने की संभावना बढ़ेगी, फसल की उत्पादकता में सुधार हो सकता है और किसान अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर जा सकते हैं। इससे किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
10. क्या KBLP से बुंदेलखंड में सूखा पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
यह कहना सही नहीं होगा कि परियोजना से बुंदेलखंड में सूखा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। हालांकि, परियोजना अपने लाभ वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की बेहतर व्यवस्था करके पानी की कमी और सूखे के प्रभाव को कम करने में मदद करेगी।
11. क्या भूजल स्तर में सुधार होगा?
जहां सतही पानी उपलब्ध होगा, वहां भूजल पर निर्भरता कम हो सकती है। लिंक नहर से जुड़े कुछ तालाबों को पानी देने और उन्हें पुनर्जीवित करने की भी योजना है। इससे कुछ क्षेत्रों में भूजल रिचार्ज में मदद मिल सकती है। हालांकि, भूजल स्तर में वास्तविक सुधार उस क्षेत्र की जमीन, पानी की स्थिति और भूजल के उपयोग पर भी निर्भर करेगा।
12. इस परियोजना से पूरे क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
बेहतर सिंचाई से फसल उत्पादन और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। इससे रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। बेहतर पानी और सड़क जैसी सुविधाओं से बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ने से मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
13. क्या परियोजना से डाउनस्ट्रीम गांवों में पानी की कमी होगी?
नहीं। डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के लिए पूरे वर्ष न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य डाउनस्ट्रीम क्षेत्र की कृषि, पेयजल जरूरतों और नदी के पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।
14. भारी बारिश के समय बाढ़ से कैसे बचाव होगा?
बांध में पानी के स्तर और प्रवाह की लगातार निगरानी की जाएगी। स्पिलवे गेट और नियंत्रण व्यवस्था के माध्यम से बांध का सुरक्षित संचालन किया जाएगा। इससे भारी बारिश के समय अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से निकालने और बाढ़ के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
15. क्या परियोजना के फायदे उसके नुकसान से ज्यादा हैं?
KBLP का तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अध्ययन किया गया है। परियोजना से सिंचाई, पेयजल और बिजली जैसे बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
उद्देश्य यह है कि परियोजना के प्रभावों को कम किया जाए, जहां जरूरी हो वहां उसकी भरपाई की जाए और प्रभावित लोगों तथा पर्यावरण की सुरक्षा के साथ परियोजना को आगे बढ़ाया जाए।
16. क्या KBLP केवल किसानों के लिए है?
नहीं। परियोजना से किसानों के अलावा ग्रामीण और शहरी लोगों को पेयजल, ऊर्जा क्षेत्र को बिजली और स्थानीय लोगों को रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलेंगे। इससे पूरे क्षेत्र की जल सुरक्षा, कृषि और सामाजिक–आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
17. क्या KBLP से सड़क और परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी?
बड़ी जल परियोजनाओं के निर्माण के लिए कई जगह पहुंच मार्ग, पुल, सड़क और अन्य सुविधाएं बनानी पड़ती हैं। जहां परियोजना के तहत ऐसी सुविधाएं बनाई या बेहतर की जाती हैं, वहां आसपास के लोगों को भी बेहतर संपर्क सुविधा का लाभ मिल सकता है।
18. क्या परियोजना की सड़कें स्थानीय लोगों के काम आएंगी?
हां। परियोजना से जुड़ी सड़क और संपर्क सुविधाओं से स्थानीय लोगों को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं, जैसे:
- खेत से कृषि उपज बाजार तक ले जाने में सुविधा;
- बाजार तक पहुंच आसान होना;
- स्कूल और अस्पताल तक पहुंच में सुधार;
- निर्माण और व्यापारिक गतिविधियों में सुविधा;
- लोगों और सामान के आने–जाने में आसानी; तथा
- परियोजना से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच।
19. क्या KBLP कोई नया परिवहन कॉरिडोर बनाएगी?
KBLP मुख्य रूप से जल और ऊर्जा से जुड़ी परियोजना है। इसे एक अलग परिवहन परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। परियोजना से जुड़ी सड़क, पुल और अन्य संपर्क सुविधाओं से जहां लाभ होगा, उसे परियोजना से होने वाले सहायक लाभ के रूप में देखा जाना चाहिए।
20. परियोजना में पेयजल को इतना महत्व क्यों दिया गया है?
पानी केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी जरूरी है। पेयजल की बेहतर उपलब्धता से स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार होगा। परिवारों, खासकर महिलाओं, को पानी लाने में कम समय लगेगा। इससे बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भूमि, गांव और प्रभावित लोग
21. KBLP के लिए भूमि की जरूरत क्यों है?
दौधन बांध, जलाशय, लिंक नहर, पावर हाउस, सड़क, परियोजना कार्यालय, कॉलोनी, निर्माण सुविधाओं और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता है।
22. मध्य प्रदेश में कितने गांव प्रभावित हैं?
कुल 22 गांव प्रभावित हैं:
- पन्ना जिले में — 8 गांव
- छतरपुर जिले में — 14 गांव
23. क्या KBLP के लिए जनसुनवाई हुई थी?
हां। पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया के तहत EIA Notification, 2006 के अनुसार जनसुनवाई की गई थी। जनसुनवाई में स्थानीय लोगों और अन्य लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों को पर्यावरणीय अध्ययन और परियोजना के लिए किए जाने वाले उपायों में ध्यान में रखा गया।
24. क्या लोगों की सहमति के बिना भूमि ली जा रही है?
नहीं। भूमि अधिग्रहण RFCTLARR Act, 2013 और मध्य प्रदेश में लागू अन्य कानूनों के अनुसार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रभावित परिवारों के लिए विशेष R&R पैकेज भी घोषित किया गया है। प्रभावित परिवारों को लागू कानून के अनुसार मिलने वाले मुआवजे या विशेष पैकेज में से उपलब्ध विकल्प के अनुसार लाभ दिया जा रहा है।
25. भूमि के मालिकाना हक को लेकर विवाद होने पर क्या होगा?
भूमि के मालिकाना हक और मुआवजे से जुड़े मामलों की जांच जिला प्रशासन और सक्षम राजस्व अधिकारियों द्वारा की जाती है।
यदि जमीन के मालिकाना हक, उत्तराधिकार या किसी अन्य अधिकार को लेकर विवाद है, तो उसका समाधान लागू कानून और निर्धारित प्रशासनिक या न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
मुआवजा और विशेष पुनर्वास पैकेज
26. क्या KBLP के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कोई विशेष R&R पैकेज दिया है?
हां। मध्य प्रदेश शासन ने वर्ष 2023 में विशेष R&R पैकेज घोषित किया था। इस पैकेज के अनुसार अधिग्रहित भूमि का मुआवजा कानून के अनुसार तय राशि या ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर, जो भी अधिक हो, उसके आधार पर दिया जाता है। मकान, पेड़, कुएं, ट्यूबवेल और अन्य स्थायी संपत्तियों का मुआवजा भी कानून के अनुसार दिया जाता है। पात्र परिवारों को ग्रामीण क्षेत्र में भूखंड के लिए ₹7 लाख और शहरी क्षेत्र में ₹6.50 लाख की सहायता का प्रावधान है। यदि परिवार भूखंड नहीं लेना चाहता है, तो ₹12.50 लाख की एकमुश्त राशि लेने का विकल्प है।
अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र SC/ST परिवारों को स्वीकृत पैकेज के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है।
27. KBLP में Project Affected Family (PAF) किसे माना जाता है?
Project Affected Family यानी परियोजना प्रभावित परिवार वह परिवार है जिसकी जमीन, मकान, संपत्ति, मान्यता प्राप्त वन अधिकार या मुख्य आजीविका परियोजना के कारण प्रभावित होती है।
इसमें पात्र:
- भू-स्वामी;
- जिन लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है;
- किरायेदार, कृषि मजदूर और बटाईदार;
- मान्यता प्राप्त वन अधिकार वाले अनुसूचित जनजाति और परंपरागत वन निवासी; तथा
- RFCTLARR Act, 2013 के अंतर्गत आने वाले अन्य पात्र परिवार शामिल हो सकते हैं।
28. R&R के लिए परिवार की इकाई कैसे गिनी जाती है?
RFCTLARR Act, 2013 की धारा 3(m) के अनुसार परिवार में व्यक्ति, उसका/उसकी पति/पत्नी, अवयस्क बच्चे और आश्रित अवयस्क भाई–बहन शामिल होते हैं।
- 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क पुत्र या पुत्री, चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित, अलग परिवार इकाई के रूप में माने जाते हैं।
- इसी तरह विधवा, तलाकशुदा या परिवार द्वारा छोड़ दी गई महिला को भी अलग परिवार माना जाता है।
KBLP में पात्र परिवारों की संख्या सर्वेक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर निर्धारित की जाती है।
29. जिन लोगों के पास जमीन नहीं है लेकिन उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें क्या सहायता मिलेगी?
केवल जमीन का मालिक होना ही R&R लाभ पाने का आधार नहीं है। यदि किसी पात्र भूमिहीन परिवार की मुख्य आजीविका परियोजना के कारण प्रभावित हुई है और वह कानून की निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, तो उसे Project Affected Family के रूप में R&R लाभ मिल सकता है।
30. पुनर्वास के बाद आजीविका चलाने में लोगों की कैसे मदद की जाएगी?
पात्र परिवारों को रोजगार और आजीविका से जुड़ी सहायता देने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वयं सहायता समूहों के लिए सहायता, छोटे व्यवसाय के लिए सहायता तथा अन्य आजीविका कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं।
31. जमीन का कितना मुआवजा मिलेगा?
भूमि का मुआवजा लागू कानून के अनुसार निर्धारित राशि या विशेष पैकेज के तहत ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर, जो भी अधिक हो, उसके आधार पर दिया जाता है।
32. मकान, पेड़ और कुओं का क्या होगा?
मकान, पेड़, कुएं, ट्यूबवेल और अन्य स्थायी संपत्तियों का भी लागू कानून के अनुसार अलग से मुआवजा दिया जाता है।
33. अगर परिवार नया भूखंड लेना चाहता है तो क्या मिलेगा?
पात्र परिवार को:
- ग्रामीण क्षेत्र में भूखंड के लिए ₹7 लाख; तथा
- शहरी क्षेत्र में भूखंड के लिए ₹6.50 लाख
की सहायता का प्रावधान है।
34. अगर परिवार भूखंड नहीं लेना चाहता तो?
परिवार भूखंड के स्थान पर ₹12.50 लाख की एकमुश्त राशि लेने का विकल्प चुन सकता है।
35. क्या SC/ST परिवारों के लिए अतिरिक्त सहायता है?
हां। अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले पात्र SC/ST परिवारों को स्वीकृत पैकेज के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाती है।
36. विशेष पैकेज को किसने मंजूरी दी?
मध्य प्रदेश शासन ने 13 सितंबर 2023 को विशेष पैकेज को मंजूरी दी थी। इससे पहले 9 सितंबर 2023 को राज्य मंत्रिमंडल ने इस संबंध में निर्णय लिया था।
37. अब तक कितना मुआवजा दिया गया है?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग ₹360.66 करोड़ के पुरस्कार पारित किए गए हैं, जिनमें से लगभग ₹321.97 करोड़ (लगभग 89%) प्रभावित परिवारों को दिए जा चुके हैं। गांव की आबादी वाले क्षेत्रों में स्वीकृत राशि का 94% से अधिक भुगतान किया जा चुका है।
38. पूरी परियोजना में मुआवजे की क्या स्थिति है?
पूरी परियोजना में लगभग 5,039 प्रभावित परिवारों के लिए ₹629.87 करोड़ के पुरस्कार पारित किए गए हैं। इनमें से लगभग ₹604.745 करोड़ (लगभग 96%) का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।

39. जमीन के मुआवजे की गणना और भुगतान कैसे होता है?
मुआवजे की गणना सरकारी रिकॉर्ड और लागू कानून के अनुसार की जाती है। भुगतान सीधे सत्यापित बैंक खातों में किया जाता है, ताकि बिचौलियों की भूमिका न रहे और भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।
40. क्या स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए भी काम किया जा रहा है?
हां। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच शिविर, मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूलों की सुविधाओं में सुधार और विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति जैसी पहल की जा रही हैं।
41. प्रभावित परिवारों के प्रति KBLPA का क्या दृष्टिकोण है?
KBLPA मानता है कि भूमि अधिग्रहण से केवल जमीन ही नहीं, बल्कि परिवारों की जिंदगी और आजीविका भी प्रभावित होती है। इसलिए KBLPA का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन, आजीविका सहायता, जरूरी नागरिक सुविधाएं और शिकायतों के समाधान की सुविधा मिले।
उद्देश्य है कि प्रभावित परिवारों के साथ निष्पक्षता, पारदर्शिता और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए।
42. क्या प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजा मिलेगा?
हां। पात्र जमीन मालिकों और जमीन पर मान्यता प्राप्त अधिकार रखने वाले अन्य लोगों को कानून के अनुसार मुआवजा और अन्य लाभ दिए जाएंगे।
यह सुनिश्चित करना कि कोई भी पात्र व्यक्ति छूट न जाए
43. अगर किसी व्यक्ति का नाम मुआवजा सूची में छूट गया है तो क्या होगा?
प्रभावित परिवारों की मांग पर छतरपुर और पन्ना के प्रभावित गांवों में पुनः सर्वेक्षण/जांच की गई है। जांच में पात्र पाए गए लोगों या परिवारों को संबंधित मुआवजा प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
44. प्रक्रिया सही और निष्पक्ष रहे, इसकी निगरानी कौन करता है?
जिला प्रशासन भूमि रिकॉर्ड और पात्रता की लगातार जांच करता है। इसके अलावा, पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी के लिए गठित राष्ट्रीय निगरानी समिति भी इसकी समीक्षा करती है।
45. दस्तावेज और कागजी कार्रवाई में परिवारों की मदद कौन करता है?
फील्ड स्तर के अधिकारी गांवों में जाकर परिवारों को पात्रता की जांच, बैंक खाते से जुड़ी प्रक्रिया और आवेदन आदि में निःशुल्क सहायता प्रदान करते हैं।
46. क्या प्रभावित परिवार अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं?
हां। प्रभावित परिवार अपनी समस्याएं और शिकायतें संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने के लिए प्रभावित गांवों में विशेष शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।
47. प्रभावित परिवारों के लिए KBLPA का क्या संदेश है?
KBLPA का स्पष्ट संदेश है:
“बुंदेलखंड का विकास प्रभावित परिवारों के अधिकार, सम्मान और कल्याण के साथ होना चाहिए।” KBLPA संबंधित राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण, R&R और पर्यावरण से जुड़े कार्य कानून, स्वीकृत योजनाओं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर रहा है।
विस्थापित परिवारों के लिए सहायता
48. क्या विस्थापित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का ध्यान रखा जाता है?
हां। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ने के प्रयास किए जाते हैं।
49. क्या विस्थापित परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा मिलती है?
हां। स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, जहां लोगों की जांच की जाती है और जरूरत के अनुसार दवाइयां दी जाती हैं।
पेयजल सुविधा के लिए हैंडपंपों की मरम्मत जैसे कार्य भी किए जाते हैं।
50. क्या विस्थापित परिवारों को दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है?
हां। विशेष शिविरों के माध्यम से परिवारों को पशुपालन, सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी योजनाओं तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाती है।
51. क्या पुनर्वास के बाद भी सरकार परिवारों के संपर्क में रहती है?
हां। पुनर्वास के बाद भी परिवारों के साथ संपर्क बनाए रखने का प्रयास किया जाता है, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर पता चले और उनका समाधान किया जा सके।
जनजातीय और वन–निर्भर समुदायों के अधिकार
52. क्या परियोजना में जनजातीय समुदायों के अधिकार सुरक्षित हैं?
हां। अनुसूचित जनजातियों और अन्य वन–निर्भर समुदायों के अधिकार वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के तहत सुरक्षित हैं। वन अधिकारों की पहचान और उनके निपटारे की प्रक्रिया कानून के अनुसार की जाती है।
53. क्या वन स्वीकृति से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति ली गई थी?
संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा संबंधित ग्राम सभाओं से आवश्यक सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी प्रक्रिया और लागू कानूनी प्रावधानों के पालन के आधार पर परियोजना के लिए वन स्वीकृति MoEF&CC द्वारा 03.10.2023 को दी गई।
पर्यावरण और कानूनी स्वीकृतियां
54. क्या परियोजना को सभी जरूरी सरकारी स्वीकृतियां मिल गई हैं?
हां। परियोजना को आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त हैं, जिनमें:
- पर्यावरणीय स्वीकृति — 2017
- वन्यजीव स्वीकृति — 2016
- जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्वीकृति — 2017
- वन स्वीकृति — 2023
शामिल हैं।
55. क्या KBLP का पर्यावरण पर असर पड़ेगा?
किसी भी बड़ी जल परियोजना की तरह KBLP का भी पर्यावरण पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। इन प्रभावों को कम करने के लिए Environmental Management Plan (EMP) और अन्य पर्यावरणीय उपाय किए जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है।
56. क्या परियोजना शुरू करने से पहले पर्यावरण का अध्ययन किया गया था?
हां। परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया गया था। इन अध्ययनों के आधार पर परियोजना को 25.08.2017 को पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई थी। परियोजना के दौरान पर्यावरण, वन, वन्यजीव और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए भी कई उपाय किए जा रहे हैं।
57. पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में वन और जैव विविधता की क्षति की भरपाई कैसे की जा रही है?
परियोजना से होने वाली वन और जैव विविधता की संभावित क्षति को कम करने और उसकी भरपाई के लिए:
- प्रतिपूरक वनीकरण;
- वन्यजीव संरक्षण;
- आवास विकास;
- कैचमेंट क्षेत्र में सुधार; तथा
- Greater Panna Landscape के लिए Integrated Landscape Management Plan (ILMP)
जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के पास समतुल्य गैर–वन भूमि भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आसपास के संरक्षण क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
58. पन्ना टाइगर रिजर्व को लेकर मुख्य चिंता क्या है?
परियोजना का पन्ना क्षेत्र और पन्ना टाइगर रिजर्व से सीधा संबंध है। इसलिए वन और वन्यजीव संरक्षण परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसी कारण परियोजना में वन्यजीव और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं।
59. पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए क्या किया जा रहा है?
परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड में पानी की सुविधा बढ़ाने के साथ–साथ क्षेत्र के वन्यजीव और जैव विविधता की सुरक्षा करना भी है। बाघ, गिद्ध और घड़ियाल जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने पन्ना टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक व्यापक Integrated Landscape Management Plan (ILMP) तैयार किया है।

60. Greater Panna Landscape Council (GPLC) क्या है?
Greater Panna Landscape में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए तैयार ILMP को लागू करने के लिए Greater Panna Landscape Council (GPLC) बनाया गया है। इसकी अध्यक्षता मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव करते हैं और इसमें संबंधित विभागों एवं हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हैं। परियोजना में पर्यावरण प्रबंधन और ILMP के लिए आवश्यक धनराशि का भी प्रावधान किया गया है।
61. प्रतिपूरक वनीकरण क्या है?
जब किसी स्वीकृत परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाता है, तो कानून के अनुसार दूसरी जगह पेड़ लगाने और अन्य पर्यावरणीय उपाय करने का प्रावधान होता है। इसे प्रतिपूरक वनीकरण कहा जाता है। इसका उद्देश्य वन भूमि के उपयोग से हुई क्षति की भरपाई करने और पर्यावरण को मजबूत करने में मदद करना है।
62. क्या KBLP से जैव विविधता प्रभावित होगी?
परियोजना की योजना बनाते समय जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया गया है। जो प्रभाव पूरी तरह रोकना संभव नहीं हैं, उन्हें कम करने और उनके लिए उचित संरक्षण उपाय करने का प्रावधान किया गया है। निर्माण और संचालन के दौरान पर्यावरण की निगरानी भी की जाएगी।
आगे की दिशा
63. परियोजना समय पर पूरी हो, इसके लिए क्या किया जा रहा है?
मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े कार्य लगातार किए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारी प्रभावित परिवारों के संपर्क में रहते हैं, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके और परियोजना के कार्य निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ सकें।
64. आगे परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड के विकास के साथ–साथ प्रभावित परिवारों के अधिकार और कल्याण का ध्यान रखना है। परियोजना के माध्यम से प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास करते हुए क्षेत्र को लंबे समय के लिए सिंचाई, पेयजल और बिजली की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
65. परियोजना के बारे में अधिक जानकारी कहां से मिल सकती है?
परियोजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए KBLPA की आधिकारिक वेबसाइट www.kblpa.gov.in, जल शक्ति मंत्रालय, छतरपुर जिला प्रशासन तथा पन्ना जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी देखी जा सकती है।
संदर्भ
जल शक्ति मंत्रालय
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(रिलीज़ आईडी: 2301979) आगंतुक पटल : 18

