
नई दिल्ली: चीन (China) की कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) भी उसके वादों की तरह खोखली साबित हो रही है. जिन देशों ने चीनी वैक्सीन पर विश्वास किया था, अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है. खासतौर पर बहरीन और सेशेल्स (Bahrain & Seychelles) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. दोनों देशों ने अपने अधिकतर नागरिकों को चीनी वैक्सीन सिनोवैक और सिनोफार्म लगवाई है, लेकिन इसके बावजूद भी जब कोरोना संक्रमण की रफ्तार नहीं थमी, तो अब दोनों ने फाइजर की वैक्सीन लगवानी शुरू कर दी है.
60% को लगी Sinovac
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन (vaccination) के बावजूद कोरोना के मामलों में कमी नहीं आ रही थी. इसके बाद रिस्क ग्रुप में आने वाले नागरिकों को फाइजर और BioNTech SE की वैक्सीन की खुराक देने का काम शुरू किया गया. बहरीन स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव वलीद खलीफा अल मानिया ने बताया कि अब तक सिनोफार्म (Sinovac) वैक्सीन बहरीन के 60 फीसदी से अधिक लोगों को लगाई जा चुकी है.
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अब दूसरी Vaccine की सलाह
मानिया ने बताया कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित, मोटापे के शिकार और 50 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को छह महीने बाद फिर से Pfizer-BioNTech की वैक्सीन लगवाने का अनुरोध किया गया है. इसके अलावा, जिन नागरिकों ने अभी तक टीका नहीं लगवाया है, उनके लिए अब Pfizer-BioNTech की वैक्सीन मुहैया कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि चीन की वैक्सीन का विकल्प अब भी उपलब्ध है, लेकिन जो संवेदनशील और उम्रदराज हैं, उन्हें फाइजर की वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जा रही है.
ऐसे बनती है Chinese Vaccine
सिनोफार्म (Sinopharm) और सिनोवैक बायोटेक लिमिटेड की वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से मंजूरी मिल चुकी है. चीन के दोनों टीके निष्क्रिय वायरस से तैयार किए जाते हैं. यह टीका बनाने की पुरानी तकनीक है. वहीं फाइजर-बायोएनटेक ने RNA को नियोजित करने वाली एक नई तकनीक से वैक्सीन तैयार की है. गौर करने वाली बातये है कि गंभीर बीमारी की चपेट में आने वाले जनसंख्या समूहों के बीच सिनोफार्म की एफिकेसी पर प्रकाशित क्लीनिकल डेटा बहुत कम है. चीनी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में ज्यादातर मध्य पूर्व में 40,382 प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें से अधिकांश संयुक्त अरब अमीरात के थे.
गंभीर मामलों पर नहीं है Data
जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में 26 मई को एक अध्ययन प्रकाशित किया गया था. जिसमें बताया गया कि सिनोफार्म सिम्पटोमेटिक मरीजों पर 78 फीसदी प्रभावी है. जबकि गंभीर मामलों में यह वैक्सीन कितनी उपयोगी है, इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. साथ ही, इसका भी कोई डेटा नहीं दिया गया है कि सिनोफार्मा 60 से अधिक के लोगों के लिए कारगर है या नहीं.
दोनों Dose के बाद भी नहीं बनी एंटीबॉडी
वहीं, सर्बिया में सिनोफार्म को लेकर एक अन्य रिचर्स बताता है कि चीनी वैक्सीन की दो खुराक लेने के बावजूद 150 प्रतिभागियों में से 29% में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी नहीं पाई गई. बेलग्रेड यूनिवर्सिटी में अध्ययन करने वाली डॉक्टर ओल्गिका जोकोविच ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि सिनोफार्मा वैक्सीन इम्युनिटी बनाने में पर्याप्त रूप से कारगर नहीं है, और ऐसा लगता है कि इसका प्रभाव विशेष रूप से बुजुर्गों पर कम हो रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि सिनोफार्म के ट्रायल में शामिल 150 लोगों में से 10 COVID-19 की चपेट में आने से बच नहीं सके.
