
अगर मधुमक्खी आपको डंक मार दे तो आप को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है और कभी-कभी ज्यादा मधुमक्खियों के हमले से इंसान की जान भी जा सकती है. अब अगर हम आपको बताएं कि मधुमक्खी के जहर से कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज भी किया जाता है तो आप हैरत में पड़ जाएंगे. आप बिलकुल मत चौंकिए ये बिलकुल सही है. ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने इस पर शोध शुरू कर दिया है. वैज्ञानिकों ने पाया कि मधुमक्खियों का जहर आक्रामक स्तन कैंसर सेल्स को खत्म करने में काफी कारगर है. इस खोज को रोमांचक बताते हुए दावा किया जा रहा है कि हम जल्दी ही और रिसर्च के साथ दुनियाभर की महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर के मेडिकल इलाज में इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.
मधुमक्खी के ज़हर का इस्तेमाल, इसमें मौजूद मेलिटिन नाम के कंपाउंड के साथ दो तरह के कैंसर ट्रिपल-नेगेटिव और HER2-एनरिच्ड के खिलाफ किया गया है जिनका इलाज करना सबसे मुश्किल है. यह कॉम्बिनेशन इन सेल्स की वायबिलिटी को कम करने में असरदार पाया गया. 25 साल की PhD रिसर्चर सिएरा डफी ने इस स्टडी को लीड किया उन्होंने बताया, ‘हमने पाया कि मधुमक्खी का ज़हर और मेलिटिन दोनों ने ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर और HER2-एनरिच्ड ब्रेस्ट कैंसर सेल्स की वायबिलिटी को काफी हद तक, चुनिंदा तरीके से और तेज़ी से कम किया.’
ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और इंग्लैंड की 312 मधुमक्खियों पर रिसर्च
यह स्टडी, जो वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में हैरी पर्किन्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा की गई थी, नेचर प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी, एक पीयर-रिव्यूड जर्नल में पब्लिश हुई थी. डॉ. सिएरा डफी ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और इंग्लैंड में 312 मधुमक्खियों और भौंरों से लिए गए ज़हर के असर का अध्ययन अलग-अलग तरह के ब्रेस्ट कैंसर पर किया, जिसमें ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर भी शामिल है, जिसके इलाज के बहुत कम ऑप्शन हैं. स्टडी में पाया गया कि ज़हर की एक खास कंसंट्रेशन एक घंटे के अंदर कैंसर सेल्स को मारने में सक्षम थी, जबकि हेल्दी सेल्स को कम से कम नुकसान पहुंचा रही थी. हालांकि, ज़्यादा डोज़ ज़्यादा ज़हरीली पाई गईं.
सिंथेटिक रूप से भी बनाया जा सकता है मेलिटिन
रिसर्चर्स ने यह भी पाया कि मधुमक्खी के जहर में पाया जाने वाला मेलिटिन एक कंपाउंड है जो कैंसर सेल्स की ग्रोथ को रोकने या बाधित करने में अपने आप में असरदार था. हालांकि मेलिटिन स्वाभाविक रूप से मधुमक्खी के जहर में पाया जाता है. इसे सिंथेटिक रूप से भी बनाया जा सकता है. डॉ. सिएरा ने बताया, ‘हमने मधुमक्खी के ज़हर में मेलिटिन नाम के एक बहुत छोटे पॉजिटिव चार्ज वाले पेप्टाइड का टेस्ट किया जिसे हम सिंथेटिक रूप से बना सकते थे और पाया कि सिंथेटिक प्रोडक्ट ने मधुमक्खी के जहर के ज़्यादातर एंटी-कैंसर असर को समझाया.’ ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर इस बीमारी के सबसे आक्रामक रूपों में से एक है और आमतौर पर इसका इलाज सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी से किया जाता है. यह सभी ब्रेस्ट कैंसर के मामलों का लगभग 10-15% होता है.
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