Possibility of Sheikh Hasina’s return to Bangladesh: अराजकता की स्थिति का लाभ उठाकर मोहम्मद यूनुस चुनाव टालने की साज़िश में लगे हैं. लेकिन बांग्लादेश के हालात पर अमेरिका ने यूनुस प्रशासन को झटका दिया है. अमेरिका ने साफ किया है कि चुनाव की निष्पक्षता के लिए शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए.

अमेरिकी सांसदों ने चिट्ठी में क्या लिखा

यानी जिस अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूनुस ने दिन-रात एक कर दिया, उससे पाबंदी हटाने को कहा जा रहा है. अमेरिका को ये दखल क्यों देना पड़ा, क्या इससे अवामी लीग के चुनाव में भाग लेने का रास्ता खुलेगा. आज हम इन सवालों को डिकोड करेंगे. लेकिन पहले जानते हैं कि अमेरिकी सांसदों की चिट्ठी में क्या है.

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अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के 5 सदस्यों ने मोहम्मद यूनुस को चिट्ठी लिखी है. ये सांसद विदेश मामलों की समिति के अहम सदस्य हैं. उन्होंने बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर नाराज़गी जताई है. साथ ही अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध पर सवाल उठाए हैं.

अवामी लीग पर लगे बैन पर हो विचार

चिट्ठी में कहा गया है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार देश की राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाए, जिससे देश में निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्वक चुनाव हो सकें. लेकिन अगर अंतरिम सरकार राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियों को बर्खास्त करेगी तो ऐसा नहीं हो सकता.

अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में उम्मीद जताई है कि अवामी लीग पर लगे बैन के फ़ैसले पर बांग्लादेश की सरकार फिर से विचार करेगी. बांग्लादेश सरकार ने अभी तक अमेरिकी सांसदों के इस सुझाव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन अमेरिकी चिट्ठी से उसके लिए आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति ज़रूर बन गई होगी. अमेरिका की बात नहीं मानी तो यूनुस सरकार की मुसीबत बढ़ेगी. अगर मान ली तो उसका एजेंडा ही ख़त्म हो जाएगा.

शेख हसीना के खिलाफ बदले की भावना

सत्ता में आने के बाद से ही यूनुस सरकार अवामी लीग के ख़िलाफ़ बदले की भावना से काम कर रही है. इसको लेकर मानवाधिकार संगठन चिंता भी जता चुके हैं. सबसे पहले अक्टूबर 2024 में अवामी लीग के छात्र विंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया

बताते चलें कि 10 मई 2025 को यूनुस सरकार ने आतंकवाद विरोधी क़ानून के तहत अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद 12 मई 2025 को चुनाव आयोग ने अवामी लीग का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया. 17 नवंबर 2025 को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने शेख़ हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में फांसी की सजा सुनाई.

यूनुस के लिए बढ़ती जा रही मुसीबत

इस तरह अवामी लीग और शेख़ हसीना की गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बाद बांग्लादेश में चुनाव की घोषणा की गई. मोहम्मद यूनुस का पूरा एजेंडा अवामी लीग और शेख हसीना का विरोध रहा है. ऐसे में लगता नहीं कि वो अवामी लीग को चुनाव में शामिल होने का मौक़ा देंगे. लेकिन अमेरिकी सांसदों की ये चिट्ठी उनके लिए या बांग्लादेश की अगली सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है.

अवामी लीग की भागीदारी के बिना कोई भी चुनाव विश्वसनीय नहीं माना जाएगा. इससे नई सरकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता कमज़ोर हो सकती है. अगर चुनाव को निष्पक्ष नहीं माना गया तो अमेरिकी मदद और अमेरिका से संबंधों पर असर पड़ सकता है. दूसरे देश भी अमेरिका की तरह बांग्लादेश में लोकतंत्र के हालात पर चिंता जता सकते हैं. अवामी लीग पर प्रतिबंध बरकरार रहने से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है.

बांग्लादेश ने फिर फैलाया भीख का कटोरा

एक तरफ़ बांग्लादेश की यूनुस सरकार भारत के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी में जुटी है. वहीं दूसरी तरफ़ बांग्लादेश भारत से चावल ख़रीदने के लिए कटोरा फैला रहा है. बांग्लादेश ने भारत से 50 हजार टन चावल खरीदने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है. जिस समय दोनों देशों के संबंध सबसे ख़राब दौर से गुजर रहे हैं, उस वक़्त भी बांग्लादेश को अपने नागरिकों का पेट भरने के लिए भारत की याद ही आती है.