Sheikh Hasina: बांग्लादेशी पत्रकार मुक्तदिर राशिद ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ‘बांग्लादेश अवामी लीग’ पर चुनाव से पहले लगाए गए बैन के बावजूद पार्टी के सदस्य स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. राशिद ने अवामी लीग पर बैन को जमात-ए-इस्लामी की बदले की कोशिश करार दिया और कहा कि यह कदम 1971 की स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े घटनाक्रमों का प्रतिशोध हो सकता है.

 बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव की जरूरत: मुक्तदिर राशिद

राशिद ने कहा कि यह जमात-ए-इस्लामी की तरफ से बदला लेने की कोशिश है क्योंकि 1971 की लड़ाई के बाद जमात पर बांग्लादेश में करीब 15 साल तक बैन लगा रहा. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव की जरूरत है और इसे केवल चुनावों के जरिए ही हासिल किया जा सकता है. अवामी लीग को अपने किए पर पछतावा होना चाहिए और जब तक वे खुद यह नहीं कहते कि उन्होंने गलतियां की हैं तब तक वे लोगों के गुस्से के लिए तैयार रहें. वे वही कर सकते हैं जो जमात ने किया था उनके पास ऐसे लोग हैं जो स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ सकते हैं.

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बता दें, बांग्लादेश में 2009 से 2024 तक शेख हसीना के शासन के दौरान जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेताओं पर युद्ध अपराधों के आरोप में मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दी गई थी और इसके बाद हाई कोर्ट ने पार्टी के रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया था. हालांकि, 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद जमात-ए-इस्लामी पर लगा बैन हटा लिया गया जिसके बाद पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां फिर से शुरू कर दीं. 2026 में होने वाले आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व में है और जमात-ए-इस्लामी के बीच मुख्य मुकाबला होने की संभावना है. इसके अलावा, शेख हसीना के खिलाफ बगावत करने वाली नई पार्टी, नेशनल सिटिज़न्स पार्टी (NCP) भी चुनावी मैदान में उतरेगी.

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बाग्लादेश में फरवरी, 2026 में होंगे चुनाव 

राशिद ने चुनावी माहौल पर भी टिप्पणी की और कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याएं कोई नई बात नहीं हैं लेकिन हाल ही में हुई छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव के करीब आते ही हालात में बदलाव आता रहता है जैसा कि हम देख रहे हैं. चुनाव फरवरी 2026 में होने की संभावना है जैसा कि इलेक्शन कमीशन ने बताया है. हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव तय समय पर होंगे लेकिन इसके पहले कुछ अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं जिससे राजनीतिक माहौल में काफी कन्फ्यूजन और हंगामा बढ़ा है.