बांग्लादेशी पत्रकार मुक्तदिर राशिद ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद उत्पन्न स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में राशिद ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल, खासकर जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई छात्र शिबिर, हादी की मौत पर लोगों की सहानुभूति का राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं. उन्होंने उदाहरण दिया कि शिबिर के नेताओं ने हादी की बॉडी ले जा रही एम्बुलेंस पर कब्जा करने की कोशिश की, जो राजनीति का स्पष्ट संकेत है. राशिद ने जोर दिया कि हादी ने गोली लगने से पहले कहा था – “अगर मैं मारा जाता हूं, तो मुझे सिर्फ न्याय दिलाओ, कुछ और नहीं.”न्याय की मांग और राजनीतिक अस्थिरता की चिंता
राशिद ने हादी की मौत से पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता की तुलना गाजा, इजराइल और कश्मीर जैसे मुद्दों से की, जहां सहानुभूति को राजनीतिक लामबंदी में बदल दिया जाता है. उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां सत्ता या नेतृत्व बदलाव के लिए इस स्थिति का इस्तेमाल करना चाहती हैं. पत्रकार ने हादी की हत्या की स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि बिना गहरी जांच के हिंसा बढ़ सकती है, जैसा कि प्रोथोम एलो और डेली स्टार अखबारों पर हमलों में देखा गया, जो फ्रिंज तत्वों या जमात से जुड़े छात्रों का काम हो सकता है.विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल
राशिद ने आरोप लगाया कि स्थिति बिगड़ने पर अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे कुछ विदेशी तत्व आग में घी डाल रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान और भारत के उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी लोग प्रदर्शनकारियों को भड़का कर सैन्य या कानून व्यवस्था पर हमला करवाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने दोहराया कि हादी की तरह बांग्लादेशी वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए इस मामले में सिर्फ इंसाफ चाहिए, राजनीति नहीं. इस बीच, भारत ने बांग्लादेश में हादी की हत्या और अन्य घटनाओं के बीच हाई कमिश्नर को दूसरी बार तलब किया है.
