Bangladesh Elections: बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों के मद्देनजर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) जमात-ए-इस्लामी के साथ संभावित सीट-शेयरिंग समझौते की दिशा में तेजी से बढ़ रही है. बता दें, NCP जो शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के खिलाफ छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों से उभरी थी अब चुनावों से पहले अपना राजनीतिक आधार स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही है.
अंदरूनी कलह के कारण कमजोर पड़ रही NCP
बता दें, NCP की शुरुआत उन छात्रों द्वारा की गई थी जिन्होंने मुहम्मद यूनुस को अंतरिम प्रशासन के प्रमुख के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी. हालांकि, पार्टी अब तक अपनी डिजिटल लोकप्रियता को जमीनी समर्थन में नहीं बदल पाई है और अब जमात-ए-इस्लामी और BNP के साथ गठबंधन की कोशिश कर रही है. पार्टी के भीतर यह गठबंधन की तलाश अंदरूनी कलह का कारण बनी है जिसके परिणामस्वरूप इस्तीफे और गुटबाजी हुई है. NCP अब केवल 30 सीटों पर ही चुनाव लड़ने की योजना बना रही है जिन पर उसे जमात-ए-इस्लामी के साथ समझौता करने की उम्मीद है. इस उथल-पुथल ने पार्टी को दो खेमों में बांट दिया है -एक जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन का समर्थन कर रहा है जबकि दूसरा BNP के साथ बातचीत का पक्षधर है. गुरुवार को मीर अरशदुल हक के इस्तीफे के बाद यह विवाद और बढ़ा जो NCP के जमात विरोधी गुट के एक प्रमुख नेता थे.
ये भी पढ़ें: बांग्लादेश में कट्टरपंथी सेना बनाने की फिराक में ISI, कर रहा 8000 से ज्यादा युवाओं की भर्ती; पढ़ा रहा शरिया का पाठ
बता दें, NCP और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर बातचीत चल रही है जबकि जमात ने अपनी अंतिम स्थिति अभी तक सार्वजनिक नहीं की है. इसके अलावा, जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने कहा है कि किसी भी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया जा सकता है बशर्ते वह उनकी तीन विशिष्ट शर्तों पर सहमत हो. हालांकि, NCP की राजनीति में बदलाव के साथ यह देखा जाना है कि पार्टी अपने संस्थापक सिद्धांतों से कितना भटकती है और आगामी चुनावों में अपनी राजनीतिक दिशा किस ओर ले जाती है.
