Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध कब खत्म होगा? ये बड़ा सवाल है. दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों को लेकर आज यानी 28 दिसंबर का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करने वाले हैं. यह मीटिंग अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के पाम बीच में होगी, ज रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग से ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक सख्त बयान ने माहौल और तनावपूर्ण बना दिया है.

व्हाइट हाउस ने बताया है कि ट्रंप और जेलेंस्की की यह मुलाकात रविवार 28 दिसंबर को तय की गई है, जिसमें यूक्रेन एक नया 20-पॉइंट शांति प्रस्ताव पेश करेगा, जिसका उद्देश्य लगभग चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है. जेलेंस्की इस बातचीत में अमेरिका से सुरक्षा गारंटी और युद्धविराम से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन इससे पहले रूस की तरफ से यूक्रेन के लिए धमकी भरा बयान दिया गया है.

पुतिन ने दिया सख्त संदेश

इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने शनिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान का हवाला देते हुए बताया कि रूस को साफ दिखाई दे रहा है कि कीव शांतिपूर्ण तरीकों से युद्ध खत्म करने में कोई जल्दी नहीं दिखा रहा है. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, पुतिन ने कहा कि अगर यूक्रेन शांति वार्ता के जरिए समाधान नहीं चाहता, तो रूस अपने तथाकथित ‘विशेष सैन्य अभियान’ के सभी लक्ष्यों को बलपूर्वक पूरा करेगा. ये बयान एक तरह से यूक्रेन के लिए धमकी के तौर पर देखा जा रहा है.

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यूक्रेन पर हमलों के बाद आया पुतिन का बयान

रूसी राष्ट्रपति पुतिन का ये बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब रूस ने यूक्रेन पर रात भर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. इन हमलों के कुछ घंटों बाद ही क्रेमलिन की ओर से यह सख्त संदेश दिया गया. इस बयान के जरिए पुतिन ने यह भी संकेत दे दिया है कि रूस किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है और सैन्य रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा. उधर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूसी हमलों को लेकर कहा कि ये हमले साफ दिखाते हैं कि रूस युद्ध जारी रखना चाहता है, जबकि यूक्रेन शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. उन्होंने दोहराया कि कीव कभी भी शांति प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगा.

इसी बीच क्रेमलिन ने दावा किया है कि रूसी सेना ने यूक्रेन के डोनेट्स्क और जापोरिज़्ज़िया क्षेत्रों में कई इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. रूसी कमांडरों ने पुतिन को जानकारी दी कि उनकी सेनाएं पूर्वी और दक्षिणी मोर्चों पर आगे बढ़ रही हैं.

ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि किसी भी समझौते पर अंतिम फैसला उन्हीं की मंजूरी से होगा. उन्होंने कहा, ‘जब तक मैं मंजूरी नहीं देता, तब तक कोई समझौता तय नहीं है.’ ट्रंप ने ये भी साफ कर दिया कि वह जेलेंस्की के प्रस्ताव को ध्यान से देखेंगे.

जेलेंस्की के 20 प्वाइंट वाले मसौदे में क्या-क्या है?

आज होने वाली मीटिंग से पहले जेलेंस्की ने बताया है कि वह शांति योजना का नया मसौदा लेकर आ रहे हैं. इसमें सीमा पर असैन्य क्षेत्र (Demilitarised Zone) बनाने और अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी पर बातचीत जैसे मुद्दे शामिल हैं. इससे पहले जेलेंस्की कनाडा गए थे और वहां से फ्लोरिडा पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि बैठक में दोनों देश ज्यादा से ज्यादा मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी ठोस समझौते की गारंटी नहीं दी जा सकती. जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नए साल से पहले कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं.

जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने नाटो, कनाडा, जर्मनी, फिनलैंड, डेनमार्क और एस्टोनिया के नेताओं से भी बात की है ताकि सभी देश एक जैसी रणनीति पर काम कर सकें. उन्होंने कहा कि यूक्रेन कभी भी शांति की राह में रुकावट नहीं बनेगा. यूक्रेन के अनुसार, यह 20-पॉइंट शांति योजना लगभग 90 प्रतिशत तैयार है. इसमें जापोरिज़्ज़िया परमाणु संयंत्र और डोनबास क्षेत्र जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा होगी. हालांकि रूस की तरफ से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई साफ सहमति नहीं दिखी है. रूस ने सिर्फ इतना कहा है कि उसे प्रस्ताव मिले हैं और उन पर बातचीत हुई है.

रूस को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

वहीं ट्रंप ने भी उम्मीद जताई कि यह बातचीत सकारात्मक रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात कर सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था इस समय दबाव में है और हालात रूस के लिए आसान नहीं हैं. उन्होंने यह भी इशारा दिया कि अमेरिका शांति वार्ता में बड़ी भूमिका निभा रहा है. अब पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात पर टिकी हैं. एक तरफ अमेरिका की कोशिश है कि किसी तरह शांति वार्ता को आगे बढ़ाया जाए, तो दूसरी तरफ पुतिन का सख्त रुख इस बात का संकेत देता है कि रूस फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है.

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