IMF on Pakistan loans and corruption: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को 1.29 बिलियन डॉलर का नया वित्तीय सहायता पैकेज मंजूर कर दिया है, जबकि हाल ही में जारी अपनी ही रिपोर्ट में इस देश में भ्रष्टाचार और संस्थागत गिरावट की गंभीर चेतावनी दी गई थी. IMF की 186 पृष्ठों की शासन और भ्रष्टाचार नैदानिक मूल्यांकन रिपोर्ट में पाकिस्तान के सरकारी तंत्र और आर्थिक प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार को मैक्रो-क्रिटिकल बताया गया है, जो विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सरकारी खर्च अनुमोदित बजट से अक्सर बहुत अधिक होता है. वित्तीय वर्ष 2024–25 में वास्तविक खर्च बजट से लगभग 9.4 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना अधिक है. यह अतिरिक्त खर्च संसद में चर्चा किए बिना नियमित रूप से मंजूर कर दिया जाता है. सरकारी मंत्रालयों को पहले से पता होता है कि वे अतिरिक्त खर्च कर सकते हैं और वित्त मंत्रालय राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें अनुमति देता है.
IMF ने अपनी रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र विकास कार्यक्रम की स्थिति भी गंभीर रूप से चिंताजनक बताई है. यह कार्यक्रम बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए बनाया गया था, लेकिन यह अधूरी परियोजनाओं का कब्रगाह बन चुका है. लगभग 10.7 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाएं लंबित हैं और केवल 1.1 ट्रिलियन रुपये की वार्षिक आवंटन से इसे पूरा होने में लगभग दस साल लग सकते हैं. इस प्रणाली में चयन और प्राथमिकता तय करने के पारदर्शी मानदंड न होने के कारण देरी, लागत वृद्धि और गुणवत्ता में कमी आम हो गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि IMF को अपनी शर्तों के अनुरूप भ्रष्टाचार विरोधी उपायों को ऋण देने की प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए. जब भ्रष्टाचार मैक्रो-क्रिटिकल है, तो वित्तीय सहायता केवल तब दी जानी चाहिए जब सुधारात्मक उपाय लागू हों, यदि यह नहीं किया गया, तो IMF की मदद अस्थायी राहत प्रदान करेगी, लेकिन पाकिस्तान की आर्थिक और संस्थागत कमजोरियों को दूर नहीं कर पाएगी.
पाकिस्तान के संस्थानों को ही अपने देश के सुधार के लिए कदम उठाने होंगे. IMF का ऋण केवल अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन देश में भ्रष्टाचार जारी रहा, तो यह पैसा स्थायी विकास की राह नहीं खोल पाएगा. रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि बिना पारदर्शिता और ठोस सुधार के, IMF का समर्थन केवल संकटों को स्थिर करने का साधन बनेगा, न कि स्थायी आर्थिक मजबूती का मार्ग बनेगा.
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