Somaliland: इजरायल ने सोमालीलैंड को एक राष्ट्र के तौर पर मंजूरी देकर अंतर्राष्ट्रीय पर कई विवाद खड़े कर दिए हैं. कभी सोमालिया का हिस्सा रहे सोमालीलैंड 1991 के गृह युद्ध के बाद से खुद के एक राष्ट्र के तौर पर अलग चला रहा है. हालांकि इस तीन दशक के दौरान उसे किसी भी देश ने उसे एक अलग राष्ट्र के तौर पर कबूल नहीं किया लेकिन 26 दिसंबर 2025 को इजरायल ने उसे यह मान्यता दे दी है. जिसका बड़े पैमाने पर विरोध भी रहा है. ना सिर्फ सोमालिया बल्कि कई मुस्लिम देशों ने भी इसको अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताया है.
इजरायल की मान्यता के बाद क्या बदलेगा?
इजरायली अफसरों का कहना है कि इस ऐलान का मतलब है कि अब इजरायल और सोमालीलैंड के बीच पूरे राजनयिक संबंध बनेंगे. इसमें एक-दूसरे के देश में दूतावास खोलना और राजदूत नियुक्त करना भी शामिल है. सोमालीलैंड के राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि यह कदम सोमालीलैंड की दशकों पुरानी अंतरराष्ट्रीय मान्यता की कोशिश में एक बड़ा पड़ाव है. बयान में कहा गया कि यह मान्यता उनके इतिहास, कानून और नैतिक अधिकार के आधार पर अलग राष्ट्र बनने के दावे को मजबूत करती है. सोमालीलैंड ने इजरायल को शांति, विकास और क्षेत्रीय स्थिरता में साझेदार बताया.

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एक दूसरे के देश में दूतावास खोलने के अलावा दोनों देश औपचारिक रूप से साथ काम करेंगे.
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नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल खेती, स्वास्थ्य, तकनीक और आर्थिक विकास में सोमालीलैंड के साथ सहयोग बढ़ाएगा.
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नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति को इजरायल आने का निमंत्रण भी दिया, ताकि साझा मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़े.
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नेतन्याहू ने कहा कि यह घोषणा अब्राहम समझौतों के तहत हुई है. अब्राहम समझौते वे समझौते हैं जिनके जरिए इजराइल और कुछ अरब देशों के बीच रिश्ते सामान्य हुए थे.
सोमालीलैंड की मान्यता देने की बात पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. ट्रंप ने अगस्त 2025 में कहा था कि वह सोमालीलैंड को एक राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने पर गौर कर रहा है.
सोमालीलैंड क्या है?
सोमालीलैंड अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका इलाके में मौजूद है. कानूनी तौर पर यह सोमालिया का ही हिस्सा है. हालांकि 1991 में जब सोमालिया में गृहयुद्ध शुरू हुआ तब सोमालीलैंड ने कहा,हम अब सोमालिया से अलग होकर अपना देश बनाएंगे और पिछले 30 भी ज्यादा वर्षों से खुद को अलग देश की तरह चला रहा है. इसकी सीमाएं इथियोपिया, जिबूती और अदन की खाड़ी (समुद्र) से लगती हैं. हालांकि अपनी सरकार, संसद, राष्ट्रपति, पुलिस, सेना होने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के ज्यादातर देश इसे अलग देश नहीं मानते.
अरब देशों में भी नाराजगी
सोमालिया की केंद्रीय सरकार इजरायल के इस कदम का विरोध कर रही है. सरकार का कहना है कि सोमालीलैंड सोमालिया का हिस्सा बना रहेगा, साथ ही चेतावनी दी कि इजरायल के जरिए दी गई एकतरफा मान्यता इलाके में अस्थिरता पैदा होने का खतरा है. इसके अलावा कई मुस्लिम देश भी इजरायल के इस कदम के खिलाफ हैं. अरब लीग में सोमालिया के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अली अब्दी आवारी ने कहा है कि इजरायल के जरिए सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश मानना आक्रामक और भड़काऊ कदम है साथ ही यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है.
फिलिस्तीनियों को विस्थापित करने का इरादा?
सोमाली प्रतिनिधि ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल का मकसद सोमालिया में अलगाववादी ताकतों की हिमायत करना है. ताकि फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से जबरन हटाने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने साफ कहा कि सोमालिया किसी भी हाल में फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से बेदखल करने का हिस्सा नहीं बनेगा. दरअसल कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ने गाजा से विस्थापित फिलिस्तीनियों को किसी तीसरे देश में बसाने के विकल्प देखे थे. जिनमें सोमालिया और सोमालीलैंड का जिक्र आया था. यह खबर सबसे पहले Associated Press ने दी थी, बाद में Al Jazeera ने भी इसका जिक्र किया.
इजरायल को मान्यता देने में क्या फायदा?
सोमालिया और सोमालीलैंड दोनों ही अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) के किनारे पर मौजूद हैं. यह इलाका दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया का बड़ा व्यापारिक हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है. ऐसे में इजरायल इस इलाके में अपनी पकड़ बनाना चाहता है, क्योंकि गाजा के साथ जंग के दौरान यमन हूती विद्रोहियों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदब क्षेत्रों में जहाजों पर हमले किए थे. इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिपिंग बाधित हुई थी. बीमा और माल ढुलाई की लागत में बढ़ौतरी हुई और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करना भी महंगा हुआ था. ऐसे में लाल सागर की सुरक्षा के लिए सोमालीलैंड का समर्थन बेहद जरूरी है.

