Russia reaffirms Taiwan as integral part of China: रूस ने ताइवान मुद्दे पर अपना रुख एक बार फिर बेहद साफ और सख्त शब्दों में सामने रखा है. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ताइवान चीन का अटूट हिस्सा है और रूस ‘ताइवान की स्वतंत्रता’ के किसी भी स्वरूप का विरोध करता है. मंत्रालय ने दोहराया कि यह रुख नया नहीं है, बल्कि वर्षों से चला आ रहा और उच्चतम स्तर पर बार-बार पुष्टि किया गया है.

‘एक-चीन सिद्धांत’ पर जोर
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कुछ देश ‘एक-चीन सिद्धांत’ का पालन करने का दावा तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में यथास्थिति बनाए रखने की बात करते हैं. रूस का मानना है कि यह रवैया चीन के राष्ट्रीय एकीकरण के सिद्धांत के सीधे खिलाफ है.

ताइवान मुद्दे का हो रहा इस्तेमाल
रूस ने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में कुछ देश ताइवान मुद्दे को चीन के खिलाफ सैन्य और रणनीतिक घेराबंदी के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. बयान में कहा गया कि इस तरह की रणनीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती है और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है.

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चीन का आंतरिक मामला
रूसी विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि ताइवान मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है. चीन को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का पूरा वैध अधिकार है. रूस ने यह भी साफ किया कि इस मुद्दे पर उसका रुख अपरिवर्तित रहेगा.

अमेरिका की रिपोर्ट से बढ़ा तनाव
इसी बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा कांग्रेस को सौंपी गई एक रिपोर्ट ने इस मुद्दे को और गर्मा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन ताइवान पर कब्जा करने के लिए अपनी सैन्य क्षमता लगातार बढ़ा रहा है और उसका लक्ष्य 2027 तक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार होना है.

पीएलए की रणनीति
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने 2027 से जुड़े अपने लक्ष्यों की ओर “लगातार प्रगति” की है. इन लक्ष्यों में ताइवान पर रणनीतिक निर्णायक जीत हासिल करने की क्षमता भी शामिल है. अमेरिका को पीएलए एक “मजबूत दुश्मन” के रूप में देखता है.

ताइवान पर बढ़ता दबाव
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की रणनीति अब सिर्फ ताइवान की आजादी को रोकने तक सीमित नहीं है. बीजिंग, ताइपे पर अपनी शर्तों पर एकीकरण के लिए लगातार दबाव बना रहा है. इसमें सैन्य गतिविधियां, कूटनीति, आर्थिक कदम और सूचना अभियान शामिल हैं, जिनका मकसद ताइवान के प्रतिरोध को कमजोर करना है.