US attack on Venezuela: अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला भी भीषण तबाही मचाई, इसके बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया है. डोनाल्ड ट्रंप के इस रवैये की कई देश प्रशंसा कर रहे हैं तो कुछ देश आलोचना कर रहे हैं. ट्रंप के इस सीक्रेट प्लान के बारे में कुछ अखबारों और चैनलों को पहले से पता था. हालांकि उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को खतरे में डालने से बचने के लिए जानकारी पब्लिश नहीं करने का फैसला किया. इसके बारे में अब खुलासा हुआ है.
इन्हें थी पहले से जानकारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट को वेनेजुएला पर US की सीक्रेट रेड के शुरू होने से कुछ समय पहले ही पता था, लेकिन उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को खतरे में डालने से बचने के लिए जानकारी पब्लिश नहीं करने का फैसला किया. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट सेमाफोर ने एडमिनिस्ट्रेशन और न्यूज ऑर्गनाइज़ेशन के बीच कम्युनिकेशन से जुड़े लोगों का हवाला देते हुए बताया कि दोनों अखबारों के सीनियर एडिटर्स को मिशन से पहले सेंसिटिव ऑपरेशनल डिटेल्स के बारे में बताया गया था.
पुरानी परंपरा रही है
अंदरूनी बातचीत के बाद न्यूजरूम ने ऑपरेशन में शामिल US कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कुछ समय के लिए पब्लिकेशन रोकने का फैसला किया. यह फैसला अमेरिकी जर्नलिज्म में नेशनल सिक्योरिटी के मामलों में, खासकर जब जान का खतरा हो, संयम बरतने की पुरानी परंपरा को दिखाता है. यह कदम इसलिए और भी अहम हो जाता है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में US प्रेसिडेंट और पुराने मीडिया आउटलेट्स के बीच गहरी दुश्मनी रही है.
पूरी दुनिया में मची हलचल
अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस पर मिलिट्री हमले किए और देश के मौजूदा प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ पकड़ लिया, जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद एक कथित नार्को-टेरर नेटवर्क को खत्म करना था, जबकि काराकस ने इस ऑपरेशन को युद्ध का एक गैर-कानूनी काम और इंटरनेशनल कानून का खुला उल्लंघन बताया.
