वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क के मैनहैटन की संघीय अदालत में पेश किया गया. उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस भी उनके साथ रहीं. दोनों पर ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों से जुड़े कई गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं. जिस कोकीन के कथित अवैध कारोबार के नाम पर मादुरो की जिंदगी बर्बाद हो गई, उसकी खेती करने वाले वेनेजुएला के पड़ोसी देश बोलीविया का एक किसान कैसे वहां का राष्ट्रपति बन गया, ये दिलचस्प कहानी आइए आपको बताते हैं.

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क में मुकदमा चलाने के बाद एक बार फिर यह चर्चा गरम है कि कैसे लैटिन अमेरिकी देश कोकीन के अवैध वैश्विक कारोबार से सीधे जुड़े हैं. अमेरिकी कोर्ट में दावा किया गया है कि मादुरो एक भ्रष्ट और अवैध सरकार चला रहे थे, जो बड़े पैमाने पर ड्रग तस्करी से चल रही थी. इस तस्करी से अमेरिका में हजारों टन कोकीन पहुंचाई गई. मादुरो पर उनकी पत्नी, बेटे और तीन अन्य लोगों के साथ आरोप लगाए गए हैं. उन पर तीन बड़े आरोप हैं- नार्को-टेररिज्म में सक्रिय भूमिका, कोकीन का आयात-निर्यात और घातक हथियारों का जमावड़ा.

कोकीन की अनसुनी कहानी

अब आपको कोकीन की पैदावार और कारोबार की जिस अनसुनी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, उसकी मालुमात करोड़ों लोगों को नहीं होगी. अमेरिका वेनेजुएला को ‘नार्को-स्टेट’ बताया है, तब उसकी तुलना उसके पड़ोसी देश बोलीविया से हो रही है, क्योंकि बोलीविया की सरकार के नियमों के तहत कोका की खेती कानूनी है. लेकिन बोलीविया का मॉडल वेनेजुएला पर लगे आरोपों से बिल्कुल अलग है. खास बात यह है कि वहां कोका की खेती और कोकीन बनाने के बीच साफ फर्क किया जाता है.

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‘कोका हां, कोकीन नहीं’

बोलीविया की पॉलिसी  ‘कोका हां, कोकीन नहीं’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें पंजीकृत किसानों को तय इलाकों में सीमित खेती की इजाजत है. 

कोका बनाम कोकीन

बोलीविया में कोका पत्ते की खेती और उसका पारंपरिक इस्तेमाल कानूनी है, न कि कोकीन. सैकड़ों सालों से एंडीज पर्वत क्षेत्र के आदिवासी लोग कोका पत्ते चबाते हैं या उसकी चाय पीते हैं, ताकि थकान कम हो और ऊंचाई से होने वाली बीमारी से राहत मिल सके. आपको बताते चलें कि बोलीविया के कानून में कोका को सांस्कृतिक विरासत माना गया है, लेकिन कोकीन बनाना और उसकी तस्करी पूरी तरह गैरकानूनी है.

हालांकि, अमेरिकी ड्रग प्रवर्तन एजेंसी (DEA) के अनुसार, दुनिया की 70–80 प्रतिशत कोकीन कोलंबिया में बनती है, जिसमें स्थानीय कोका और पेरू व बोलीविया से लाई गई सामग्री का इस्तेमाल होता है.

एवो मोरालेस के दौर में नीति में बदलाव

बोलीविया की कोका पॉलिसी तब अस्तित्व में आई जब एवो मोरालेस 2006 में देश के राष्ट्रपति बने. एवो मोरालेस खुद कभी कोका की खेती करने वाले किसान और उनकी यूनियन के नेता थे. मोरालेस ने अमेरिका समर्थित ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ अभियान को खारिज करते हुए यह कहा था कि जबरन फसल नष्ट करने से गरीब किसान तबाह होते हैं, लेकिन ड्रग माफिया पर कोई असर नहीं पड़ता’. उनकी सरकार ने कोका की खेती को एक नियंत्रित आर्थिक गतिविधि के रूप में देखा, जो लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़ी है.

नष्ट करने के बजाय नियंत्रण

बोलीविया ने जबरन खेती खत्म करने की नीति छोड़कर ‘सोशल कंट्रोल’ सिस्टम अपनाया. इसके तहत किसानों को सीमित जमीन पर कोका उगाने की अनुमति दी गई, जिस पर किसान यूनियन और सरकार नजर रखते हैं.

2017 में सरकार ने कानूनी खेती की सीमा बढ़ाकर 22,000 हेक्टेयर कर दी (पहले यह 12,000 हेक्टेयर थी). उसी साल बने जनरल लॉ ऑफ कोका ने खेती, व्यापार और उपभोग से जुड़े नियम तय किए और देश के भीतर एक कानूनी बाजार बनाया.

क्या कहते हैं आंकड़ें?

कोका की खेती मुख्य रूप से तीन देशों – कोलंबिया, पेरू और बोलीविया में होती है संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स और अपराध एजेंसी (UNODC) की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, बोलीविया में 34,000 हेक्टेयर में कोका की खेती हुई, जो कानूनी सीमा से ज्यादा है. 2023 में यह आंकड़ा 31,000 हेक्टेयर था.

अंतरराष्ट्रीय कानून की स्थिति

बोलीविया की नीति अंतरराष्ट्रीय ड्रग कानूनों से टकराती थी. 2011 में उसने संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदार्थों पर एकल सम्मेलन से खुद को अलग कर लिया. 2013 में वह दोबारा इसमें शामिल हुआ, लेकिन इस शर्त के साथ कि उसके देश में कोका का पारंपरिक इस्तेमाल मान्य रहेगा. इससे बोलीविया ने कोका के पारंपरिक उपयोग और अवैध कोकीन तस्करी के बीच साफ अंतर कर दिया.

अमेरिकी DEA के अनुसार, अवैध कोकीन का सबसे बड़ा उत्पादक कोलंबिया है. पेरू, बोलीविया और चिली से बड़ी मात्रा में कोका आती है. कोलंबिया के ड्रग कार्टेल इन देशों से आने वाली कोका को प्रोसेस करके दुनिया भर में कोकीन की तस्करी करते हैं.