
People’s Movement against Khamenei in Iran: ईरान में बगावत की आग तेजी से फैलती जा रही है. कहा जा रहा है कि अगर ये सफल हुई तो दुनिया में कट्टर इस्लाम खत्म हो जाएगा. ईरान में हो रही इस नई क्रांति की बागडोर अब महिलाओं ने अपने हाथों में ले ली है. यानी आप कह सकते हैं कि ईरान में क्रांति की नई लड़ाई अब खलीफा Vs खातून की हो गई . जिसमें एक तरफ ईरान के सबसे शक्तिशाली धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई हैं. दूसरी तरफ वो ईरानी महिलाएं है, जो पिछले 47 साल से ईरान में खुलकर सांस नहीं ले पा रहीं और पाबंदियों से घुटन महसूस कर रही हैं.
खलीफा के खिलाफ सड़कों पर खातून
अब उनकी मानसिकता करो या मरो वाली हो गई है. वो बुर्का छोड़कर सड़कों पर उतर रही हैं और खलीफा को ललकार रही हैं. आज आपको जानना चाहिए ईरान की नई क्रांति के 13वें दिन ऐसा क्या क्या हुआ,जिसके बाद कहा जा रहा है कि ये जुमा ईरान में खामेनेई के शासन का आखिरी जुमा साबित हो सकता है. ईरान की क्रांति की आग में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कैसे घी डालने का काम कर रहे हैं. वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान को कौन सा गिफ्ट दे रहे हैं, जिसके जिसके बाद ईरान के परमाणु बम हासिल करने की चर्चा शुरू हो गई है .
ईरान 2022 में हिजाब विरोधी आंदोलन का साक्षी बना था. इस बार विरोध प्रदर्शन महंगाई की वजह से शुरू हुए,जो धीरे धीरे ईरान से खामेनेई शासन को हटाने के आंदोलन में तब्दील हो गए. खामेनेई विरोधी इस आंदोलन में महिलाओं की साझेदारी बहुत ज्यादा है. ईरान की महिलाओं ने खामेनेई के विरोध का जो नया तरीका निकाला है . वो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है. दुनिया में इसे ईरान की महिलाओं का जलता विरोध कहा जा रहा है.
ईरान की महिलाएं जलते विरोध के प्रदर्शन में खामेनेई की तस्वीरों को सिगरेट से जला रही हैं और सोशल मीडिया में इसे पोस्ट कर रही हैं. सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और जी न्यूज़ भी सिगरेट पीने का समर्थन नहीं करता. लेकिन ईरान की महिलाओं की तस्वीरें देखकर दुनिया दंग है. ये डिजिटल विरोध पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है. आज आपको ईरानी महिलाओं के इस विरोध के मतलब को भी समझना चाहिए.
‘हम तुम्हें रोज जला-जलाकर मारेंगे’
सिगरेट पीना ईरान में महिलाओं के लिए सामाजिक और धार्मिक तौर पर अच्छा नहीं माना जाता है. खुले तौर पर सिगरेट पीना इस्लामी शासन में अनैतिक महिला का टैग दिलवा देता है. जब महिलाएं खामेनेई की तस्वीर पर सिगरेट से आग लगाती हैं, तो वे तीन नियम तोड़ती हैं.
ईरानी महिलाएं इस प्रदर्शन के जरिए कट्टर धार्मिक सत्ता को चुनौती दे रही हैं. महिला की आज्ञाकारी छवि को तोड़ रही हैं और सार्वजनिक डर को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं. यानी संदेश दे रही हैं कि जिन चीजों से हमें डराया जाता था, उसी से हम तुम्हें जला रहे हैं.
सिगरेट स्लो बर्न का प्रतीक है. सिगरेट में आग नहीं भड़कती, वह धीरे-धीरे सुलगती है. ईरानी महिलाएं इस तस्वीर से खामेनेई को संदेश दे रही हैं तुम्हारा शासन एक धमाके से नहीं, बल्कि हमारी रोज की अवज्ञा से धीरे-धीरे जलेगा.
महिलाओं के साथ पुरुष भी कर रहे प्रदर्शन
इसके अलावा ईरान में सड़क पर प्रदर्शन की सजा जेल या मौत है. जबकि इंटरनेट पर पोस्ट से सारी दुनिया पर नजर डाल रही है. तेहरान से छह हजार किलोमीटर से ज्यादा दूर वाशिंगटन में भी ऐसा ही नजारा दिख रहा है. वहां रह रहीं ईरानी महिलाएं खामेनेई की फोटो को जलाकर डर की दीवार को तोड़ रही हैं, ताकि बाकी महिलाएं भी हिम्मत करें. वैसे अब ये हिम्मत ईरान की सड़कों पर दिखाई भी दे रही है.
ईरान के सभी प्रांतों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं. पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी इसमें मौजूद हैं. ईरान के इस्लामिक शासन से ईरानी महिलाएं नफरत करती हैं. उसे समझने के लिए आज आपको एक वायरल वीडियो के बारे में जानना चाहिए. इस वीडियो में एक ईरानी महिला जिसके मुंह से खून निकल रहा है . वो बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है. ये महिला बुरी तरह घायल होने के बाद नारे लगा रही है.
ये महिला कह रही है उसे किसी का डर नहीं है और वो 47 साल बाद सांस ले पा रही है. जरा सोचिए,ईरान जैसे धार्मिक पाबंदी वाले देश में बुरी तरह से जख्मी ये महिला बगैर हिजाब के सड़कों पर निकली है. उसके आस पास ईरान की पुलिस मौजूद है. लेकिन वो नारा लगा रही है कि उसे अब किसी का डर नहीं.
सड़कों पर उतरकर गाना गा रही महिलाएं
क्या मनोस्थिति होगी इस महिला की. जिसे आज अपनी जान की परवाह तक नहीं है. बस वो किसी तरस पाबंदियों वाले इस्लामिक शासन से मुक्ति पाना चाहती है. लेकिन ये सोच ईरान की सिर्फ एक महिला की नहीं. ईरान की ज्यादातर महिलाएं ऐसा ही सोच रही हैं.
ईरानी महिलाएं सिर्फ खामेनेई मुर्दाबाद के नारे नहीं लगा रहीं. मौका मिल रहा है तो ईरान की पुलिस और सेना पर पत्थर भी फेंक रही हैं. जो महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल रही. वो भी अपनी बालकनी से जब प्रदर्शनकारियों को इस्लामी शासन की पुलिस पर हावी देखती हैं तो खुश हो जाती हैं.
ईरान में महिलाओं के गाने और नाचने पर भी पाबंदी है. अब ईरानी महिलाएं सड़कों पर खुलकर बैंड के साथ गाना गा रही हैं. ये ईरान में अनिवार्य हिजाब और नैतिकता पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन है. ईरान की सड़कों पर महिलाओं का ग्रुप भी प्रदर्शन कर रहा है. सड़कों पर खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगाती ये महिलाओं की आवाज़ बता रही है कि अब इनको किसी का डर नहीं रह गया है.
इस्लामिक क्रांति ने कैसे बना दिया गुलाम
आपने इन महिलाओं के मुंह से वेलायत-ए-फ़क़ीह मुर्दाबाद के नारे भी सुने. वेलायत-ए-फ़क़ीह ईरान की वह व्यवस्था है जिसमें धार्मिक सर्वोच्च नेता को अंतिम सत्ता प्राप्त होती है. यह नारा उसी शासन प्रणाली के खिलाफ है. आज आपको ये भी जानना चाहिए ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद धीरे धीरे ईरान की मॉडर्न महिलाओं से कौन कौन से अधिकार छीन लिए गए और किस वजह से आज वो मरकर भी कट्टरता से आजादी पाना चाहती हैं.
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद, जब ईरान में कट्टर इस्लामिक शासन स्थापित हुआ. तब महिलाओं की आजादी पर कानूनी, सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर कई सख्त पाबंदियां लगा दी गईं. जिन्होंने सीधे तौर पर महिलाओं के जीवन को प्रभावित किया.
ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब कानूनी तौर पर जरूरी कर दिया गया. बाल दिखाना या मेकअप करना ईरान में अपराध है. जिसके उल्लंघन पर जुर्माना, गिरफ्तारी, मारपीट होती है . महिलाओं को हिरासत में भी लिया जाता है. इसके लिए अलग से “मोरैलिटी पुलिस” बनाई गई . जो सड़कों पर गश्त देती रहती है.
सभी 31 प्रांतों में शुरू हो चुकी बगावत
ईरान में महिलाओं के लिए ढीले और पूरे शरीर ढकने वाले कपड़े पहनना जरूरी है. तलाक में पुरुषों को ज़्यादा अधिकार मिले हैं जबकि महिलाओं को कठिन कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. शादी के लिए भी ईरान में पिता या अभिभावक की अनुमति ज़रूरी है. ईरान में कम उम्र में शादी को भी वैध बनाया गया है.
ईरान में पासपोर्ट बनवाने या विदेश जाने के लिए पति की अनुमति जरूरी है. महिला के अकेले यात्रा करने पर सामाजिक और कानूनी दबाव रहता है. ईरान में महिलाएं जज और राष्ट्रपति जैसे पदों की रेस से व्यावहारिक तौर पर बाहर है. यानी वो इतनी पाबंदियों के साथ जज या राष्ट्रपति बनने के बारे में सोच भी नहीं सकतीं.
ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ सिर्फ महिलाएं सड़क पर नहीं उतरी हैं. इस वक्त सारे देश में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान में कुल 31 प्रांत हैं और सभी 31 प्रांतों में इस्लामी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इस शुक्रवार को ईरान के लिए इसलिए भी संवेदनशील माना गया क्योंकि सिर्फ एक दिन पहले निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ईरान के सभी लोगों से बाहर निकलने की अपील की थी.
इस्लामिक शासन को चैलेंज कर रहे लोग
जिसके बाद हजारों प्रदर्शनकारी तेहरान और दूसरे शहरों में एक साथ सड़कों पर उतर गए. ईरान की सड़कों पर आजादी-आजादी और खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगने लगे. ईरान के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और आगजनी शुरू हो गई. वे ऐसा करके ईरान की सेना और इस्लामिक शासन की पुलिस को चैलेंज दे रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों ने इस्फहान में ईरान के सरकारी टीवी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्ट की एक इमारत को आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकारी टीवी प्रोपेगैंडा कर रहा था. राजधानी की सड़कें भी अब पूरी तरह सरकार के कंट्रोल में नहीं रह गई. प्रदर्शनकारी तेहरान के चौराहों पर लगे सीसीटीवी तोड़ रहे हैं ताकि उनको पहचान कर कार्रवाई ना की जा सके.
प्रदर्शनकारी मौका मिलते ही सुरक्षाकर्मियों की पिटाई भी कर रहे हैं. पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के तेज होने के साथ ही राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की सरकार ने ताकत का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. आज आपको प्रदर्शनकारियों पर ईरान की सरकार की सख्ती के बारे में भी जानना चाहिए.
विरोध को सख्ती से दबाने की कोशिश हुई तेज
ईरान में कल रात से ही इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया गया. जिससे तस्वीरों और वीडियो से आंदोलन की आग और ना फैले. ईरान में सरकार ने इंटरनेशनल टेलीफोन कॉल भी बंद कर दी हैं. सरकार का दावा है विरोध प्रदर्शनों को देश के बाहर से निर्देश मिल रहे हैं. अब तक ईरान में 45 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. लगभग 2300 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. ईरान में 50 से 70 शहर ऐसे हैं. जहां पर प्रदर्शनकारी सरकार पर भारी पड़ रहे हैं. हालांकि तेहरान और बड़े शहरों में अभी भी सरकारी कार्यालयों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर सरकार का कंट्रोल है.
ईरान की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है…इस नाजुक स्थिति को आप ईरान सरकार के दो कदमों से समझ सकते हैं. सोचिए आज पूरा ईरान बगैर इंटरनेट के चल रहा है . क्या कोई और देश इसकी कल्पना कर सकता है. ईरान में इंटरनेशनल कॉल को भी बंद कर दिया गया है यानी ईरान के लोगों को दुनिया से काट दिया गया है. ईरान के लोग अब दुनिया से संपर्क ही नहीं कर सकते.
ईरान का आरोप है कि देश में चल रहे प्रदर्शन को अमेरिका भड़का रहा है . ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने सीधे डॉनल्ड ट्रंप पर निशाना साधा. खामेनेई ने कहा ईरान विदेशी ताकतों की सेवा करने वाले भाड़े के लोगों को बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को अपने देश को संभालना चाहिए जिसमें हर तरह की घटनाएं हो रही हैं.
अमेरिका का प्रोपेगंडा वॉर भी एक्टिव
खामेनेई के तेवर बता रहे हैं कि ईरान में उग्र प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती जाएगी. इसीलिए ईरान में इंटरनेट और इंटरनेशनल कॉल को बंद कर दिया गया है. खामेनेई ने अपने देश के लोगों को संबोधित किया.इसे समझा जा सकता है. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी ईरान के लोगों को संदेश दिया है और खामेनेई के बारे में बड़ा खुलासा किया है.
जिस वक्त खामेनेई ईरान में बैठकर डॉनल्ड ट्रंप पर देश में हिंसा फैलाने का आरोप लगा रहे थे. उसी वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के लोगों और दुनिया को बता रहे थे कि खामेनेई ईरान से भागने वाले हैं. ट्रंप ने ये भी कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को ईरान में मारा गया तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. खामेनेई और डॉनल्ड ट्रंप के तेवर बता रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में कभी भी संघर्ष शुरू हो सकता है. अब तक जुबानी तीर चला रहे खामेनेई और ट्रंप एक दूसरे पर मिसाइलें भी छोड़ सकते हैं. आपको ये जानना चाहिए ईरान, अमेरिका और इजरायल इसकी क्या क्या तैयारियां कर रहे हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने किस तरह ईरान-इराक बॉर्डर पर अपने डेल्टा कमांडो तैनात कर दिए हैं. आज उन्होंने फिर से ईरान को कड़ी कार्रवाई की धमकी दी है और ईरान इस धमकी को बिल्कुल भी हलके में नहीं ले रहा. ईरान ने फिलहाल अपना एयर स्पेस बंद कर दिया है.
ईरान ने बंद कर दिया अपना एयरस्पेस
ईरान ने इसके लिए एक नोटम जारी किया है. इस समय किसी भी दूसरे देश का विमान ईरान में एंट्री नहीं कर सकता.
ईरान ने इस प्रतिबंध को इराक, तुर्किये और अजरबैजान की सीमाओं के पास प्रभावी रूप से लागू किया है क्योंकि इस तरफ से अमेरिकी हमले की आशंका ज्यादा है. इस प्रतिबंध को लागू करवाने के लिए ईरान ने अपना एयर डिफेंस एक्टिव कर दिया है. यानी अमेरिका, ईरान में वेनेजुएला जैसी स्ट्राइक करता है तो ईरानी मिसाइलों से डेल्टा कमांडो का स्वागत होगा. कोई भी देश ऐसे नोटम आमतौर पर आंतरिक अशांति, सैन्य गतिविधियों या बाहरी हमलों की आशंका के दौरान जारी करता है.
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— Zee News (@ZeeNews) January 9, 2026
ईरान खुद पर हमले से पहले इज़रायल या अमेरिका पर हमला कर सकता है. इसके लिए ईरान की मिसाइलें भी तैयार हैं. लेकिन आज ईरान के दुश्मनों के लिए एक और बुरी खबर आई है. जिसकी चर्चा यूरोपीय देश सबसे ज्यादा कर रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा खामेनेई रूस भाग सकते हैं. लेकिन यूरोपीय देश चर्चा कर रहे हैं कि रूस, ईरान को एक ऐसी मिसाइल दे रहा है, जिसके बाद खामेनेई को शायद ईरान छोड़ने की जरूरत ना पड़े.
इस्कंदर मिसाइल की ताकत को जानें
ईरान के डिफेंस सूत्रों ने इस बात का खुलासा किया है कि ईरान को रूस से इस्कंदर मिसाइल मिलने वाली है. इस खबर के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान ने परमाणु बम हासिल कर लिया है. रूस की इस्कंदर मिसाइल की ताकत और ईरानी परमाणु बम से इसके कनेक्शन के बारे में भी आज आपको जरूर जानना चाहिए.
रूस की इस्कंदर मिसाइल की रेंज 500 किलोमीटर है. यानी इससे ईरान अपने प्रॉक्सी के इलाकों यानी सीरिया..इराक और लेबनान से इज़रायल के तेल अवीव और हाइफा तक हमला कर सकता है. जबकि अमेरिका के कुवैत, क़तर, UAE, और इराक के बेस इसकी रेंज में आते हैं. इस्कंदर की रफ्तार 7 मैक यानी आवाज से 7 गुना ज्यादा है. इसलिए इसको रोकना भी मुश्किल है. ये 480 से 700 किलोग्राम के वॉरहेड के साथ हमला कर सकती है.
इस्कंदर परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है . ये ही इस मिसाइल की वो ताकत है. जिससे अमेरिका और इज़रायल दोनों को डर लगेगा. Iskander परमाणु वारहेड ले जा सकती है. अगर ईरान ने परमाणु बम बना लिया होगा या फिर बनाने के बहुत करीब होगा तो भी ये अमेरिका के लिए खतरनाक है. इसकी वजह ये है कि इस्कंदर के तौर पर ईरान के पास इसे लॉन्च करने के लिए एक भरोसेमंद और अचूक डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी होगा. फिलहाल इस खबर पर ईरान और रूस की प्रतिक्रिया नहीं मिली है. लेकिन ऐसे गुप्त समझौतों की जानकारी इस संवेदनशील समय में दुनिया को नहीं दी जाती. ये भी एक रणनीतिक सच है.
जंग में अकेला नहीं है ईरान
ईरान इस लड़ाई में बिल्कुल अकेला नहीं खड़ा है. रूस के साथ साथ चीन और ब्रिक्स के देश भी उससे रणनीतिक सहयोग कर रहे हैं. अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच रूस, चीन और ईरान ने दक्षिण अफ्रीका के तटों पर एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है. जिसे BRICS देशों की बढ़ती सैन्य सक्रियता और रणनीतिक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है. इस सैन्य अभ्यास को Will for Peace का नाम दिया गया है. इस युद्धाभ्यास को चीन लीड कर रहा है. जबकि दक्षिण अफ्रीका मेजबान की भूमिका में है. जिसके अमेरिका से संबंध बहुत अच्छे नहीं चल रहे. वहीं ईरान हाल ही में ब्रिक्स में शामिल हुआ है. युद्धाभ्यास वाला गठबंधन अगर युद्ध के दौरान भी साथ आता है तो ईरान के दुश्मनों की टेंशन बढ़ सकती है.
ईरान की मिसाइलों से अमेरिका से ज्यादा खतरा इज़रायल को है. तनाव को देखते हुए इज़रायल भी अपनी सुरक्षा के लिए सबसे घातक हथियार तैनात कर रहा है. इज़रायल ने अब लेज़र से मिसाइल और ड्रोन गिराने वाली नई ढाल को एक्टिवेट कर दिया है. इज़रायल की सुरक्षा अब आयरन बीम करेगा . आयरन बीम दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है जो गोली या मिसाइल नहीं बल्कि तेज़ लेज़र किरण से हमला करता है. ईरान की मिसाइल और ड्रोन पावर के सामने ये आयरन डोम से ज्यादा भरोसेमंद साबित हो सकता है.
इजरायल ने बचाव की शुरू की तैयारियां
आपको ये भी समझना चाहिए इजरायल का आयरन बीम कैसे काम करता है. जैसे तेज धूप से कागज जल जाता है, वैसे ही आयरन बीम एक बहुत शक्तिशाली लेज़र से दुश्मन की मिसाइल या ड्रोन को पिघला देता है. आयरन बीम का रडार दुश्मन के ड्रोन या रॉकेट को पकड़ता है. सिस्टम उसे ट्रैक करता है. लेज़र किरण उस पर डाली जाती है.
कुछ सेकंड में वह उड़ते-उड़ते जलकर गिर जाता है. यानी ईरान अगर अपनी सुरक्षा को हलके में नहीं ले रहा तो इज़रायल ने भी तैयारी पूरी कर ली है. और मिडिल ईस्ट में एक बड़ी चिंगारी भीषण युद्ध की शुरूआत करा सकती है . ईरान में हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए अगले 24 घंटे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.
