
Are Trump and Putin pushing world towards nuclear war: दुनिया में एक और टकराव की दहशत बढ़ती जा रही है. टकराव की ये संभावना जुड़ी है अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से. कहा जा रहा है कि ट्रंप और पुतिन दोनों परमाणु शक्ति के इस्तेमाल की तरफ बढ़ रहे हैं. ऐसी आशंका जाहिर करने की वजह है अमेरिका और रूस की परमाणु संधि को लेकर ट्रंप का एक बड़ा बयान.
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा है कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अमेरिका और रूस के बीच START संधि की मियाद खत्म हो रही है. मुझे लगता है कि हम और रूस इससे बेहतर समझौता कर सकते हैं लेकिन इस नई प्रस्तावित संधि में चीन जैसे देशों को भी शामिल करना होगा ताकि पूरी दुनिया में एटमी ताकत की सीमा तय की जा सके.
रूस के साथ परमाणु संधि पर ट्रंप गंभीर नहीं
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. परमाणु संधि को लेकर ये शब्द इस्तेमाल करके ट्रंप ने संकेत दे दिया है कि रूस के साथ की गई परमाणु संधि को लेकर वो गंभीर नहीं हैं और शायद ट्रंप इस संधि को जड़ से खत्म करना चाहते हैं. अब हम आपको इस संधि से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं ताकि आप समझ सकें कि ट्रंप और पुतिन ने अगर संधि को खारिज किया तो इससे कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.
वर्ष 1991 में अमेरिका और रूस ने START संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस संधि के तहत दोनों देशों ने तय किया था कि वो नए परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे. वर्ष 2009 और 2021 में इस संधि की मियाद बढ़ाई गई थी. अब 5 फरवरी को अमेरिका और रूस की मौजूदा START संधि खत्म होने जा रही है.
अलास्का में ट्रंप के साथ मीटिंग के दौरान पुतिन ने संधि को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन संधि को लेकर ट्रंप ने जिस तरह चीन का जिक्र किया है. वो इशारा दे रहा है कि ट्रंप वर्तमान संधि को आगे नहीं बढ़ाना चाहते. परमाणु संधि सिर्फ एक बिंदु है. असल में पिछले तकरीबन 3 महीनों से पुतिन और ट्रंप के बीच तल्खी लगातार बढ़ रही है. सुपरपावर्स के बीच इस तनाव को समझने के लिए आपको अमेरिका और रूस की हालिया टाइमलाइन बेहद गौर से समझनी चाहिए.
‘परमाणु शक्ति से संपन्न देश असल में अंधे इंसान’
अक्टूबर 2025 में ट्रंप सरकार ने यूक्रेन को रूस के तेल और ऊर्जा संसाधनों पर हमले की अनुमति दे दी थी. 7 जनवरी 2026 को अमेरिकी नेवी ने रूस के एक कार्गो जहाज को जब्त कर लिया था. 8 जनवरी को ट्रंप ने ऐलान किया था कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. 8 जनवरी की ही रात को पुतिन ने अमेरिका से प्रस्तावित यूक्रेन का युद्धविराम प्रस्ताव ठुकरा दिया था और आज यानी 9 जनवरी को पुतिन ने ऐलान किया है कि यूक्रेन में अगर यूरोपीय देशों ने शांति सेना भेजी तो उस शांति सेना के सैनिक भी रूस का निशाना बनेंगे.
दोनों पक्षों की तरफ से लगातार हो रही कार्रवाई और बयानबाजी बता रही है कि ना तो ट्रंप पीछे हटने के मूड में हैं और ना ही पुतिन. बड़ी ताकतों के बीच ऐसे ही टकराव को लेकर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंगर ने एक महत्वपूर्ण बात कही थी.
किसिंगर कहते थे कि परमाणु शक्ति से संपन्न देश असल में अंधे इंसान जैसे होते हैं. ऐसे देशों को नैतिकता या तर्क नहीं नजर आता बल्कि अगर इन्हें एक दूसरे के सामने ला दिया जाए तो उसका नतीजा सिर्फ और सिर्फ तबाही ही होता है.
परमाणु युद्ध हुआ तो 10 साल तक नहीं दिखेगा सूरज
कुछ ऐसे ही हालात अमेरिका और रूस के बीच भी बनते नजर आ रहे हैं . ट्रंप की ईगो और पुतिन का सख्त रुख दोनों सुपरपावर्स को एक दूसरे के सामने लाकर खड़ा कर चुका है. आप कल्पना भी नहीं कर सकते..अगर इन दोनों देशों ने परमाणु संधि से कदम दूर उठाए और परमाणु युद्ध की तरफ कदम बढ़ाए तो कितनी बड़ी तबाही होगी.
#DNAमित्रों | ट्रंप..संधि तोड़ेंगे, ‘परमाणु बम’ फोड़ेंगे ! 5 फरवरी के बाद परमाणु युद्ध तय ?
रूस के साथ परमाणु संधि पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा ‘मुझे संधि से रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता’. 5 फरवरी को खत्म होगी परमाणु संधि की मियाद #DNA #DNAWithRahulSinha #Russia #DonaldTrump… pic.twitter.com/E4aMPtkcYf
— Zee News (@ZeeNews) January 9, 2026
रूस और अमेरिका के पास कुल मिलाकर 1100 से ज्यादा न्यूक्लियर हथियार हैं. अगर ये हथियार एक दूसरे पर दागे जाएं तो न्यूक्लिर विंटर आ जाएगा यानी एक ऐसा दौर जिसमें हर तरफ दर्द और तबाही होगी. न्यूक्लियर विंटर में एटमी हथियारों के धमाकों से पैदा हुआ धुआं और कालिख पृथ्वी के वातावरण की ऊपरी परत को ढक देगा और धरती के 70 प्रतिशत हिस्से तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचेगी.
कालिख और धुएं की ऐसी परत तकरीबन 10 साल तक मौजूद रहेगी. लंबे वक्त तक सूर्य की रोशनी ना मिलने की वजह से धरती का औसत तापमान 15 से 20 डिग्री कम हो जाएगा यानी सर्दी तेजी से बढ़ेगी. सर्द मौसम की वजह से बरसात का चक्र प्रभावित होगा और दुनिया की तकरीबन 55 प्रतिशत खेती तबाह हो जाएगी. यानी न्यूक्लियर विंटर तबाही के साथ ही साथ भुखमरी भी लेकर आएगा.
इसी वजह से दुनिया चाहती है कि ट्रंप और पुतिन अपने रवैये को थोड़ा नरम करें और परमाणु संधि को आगे बढ़ाएं ताकि दुनिया के ऊपर मंडराता न्यूक्लियर वॉर का ये संकट खत्म हो जाए.
